{"_id":"599c81194f1c1b61038b483f","slug":"station-master-and-gangman-cites-delhi","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्टेशन मास्टर और सारे गैंगमैन दिल्ली तलब, ऑडियो की जांच के लिए रेस्ट कीपर प्रदीप को भी बुलाया ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्टेशन मास्टर और सारे गैंगमैन दिल्ली तलब, ऑडियो की जांच के लिए रेस्ट कीपर प्रदीप को भी बुलाया
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 23 Aug 2017 12:38 AM IST
विज्ञापन
घटनास्थल पर जांच करने पहुंचे सीओ।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कलिंग उत्कल एक्सप्रेस हादसे के बाद वायरल ऑडियो को लेकर जांच-पड़ताल तेज हो गई है। ऑडियो में बोल रहे रेस्ट कीपर प्रदीप को सीआरएम ने दिल्ली बुलाया है। इसके अलावा हादसे के दिन ड्यूटी पर तैनात स्टेशन मास्टर समेत 16 नंबर के सभी गैंगमैनों को पूछताछ के लिए तलब किया गया है। उधर, रेस्ट कीपर की मां प्रर्मिला का कहना है कि ट्रेन हादसे में सबसे ज्यादा स्टेशन मास्टर जिम्मेदार हैं।
हादसे के बाद सफेदा फाटक पर ड्यूटी करने वाले रेस्ट कीपर प्रदीप के ऑडियो से रेलवे महकमे में खलबली मची हुई है। सोशल मीडिया पर ऑडियो वायरल होने के बाद 19 अगस्त को खतौली रेलवे ट्रैक पर जेई प्रदीप कुमार और गैंगमैनों ने कैसे लापरवाही बरती थी, उसका खुलासा हो गया था। लापरवाही की वजह से रेलवे बोर्ड ने डीआरएम, जीएम समेत चार इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई कर दी थी। सोमवार को जांच के लिए दुर्घटनास्थल पहुंचे रेल संरक्षा आयुक्त एसके पाठक ने भी ऑडियो को जांच का अहम हिस्सा माना था।
रेस्ट कीपर प्रदीप खतौली के दयालपुरम में रहता है। उसके पिता भी रेलवे विभाग मेें काम करते थे। हादसे वाले दिन रेस्ट कीपर प्रदीप सफेदा रोड के फाटक नंबर-32ए पर गेटमैन की ड्यूटी कर रहा था। ऑडियो जारी होने के बाद वह देश की सुर्खियां बन गया। सीआरएस एसके पाठक ने ऑडियो की जांच-पड़ताल के लिए रेस्ट कीपर को दिल्ली बुलाया है।
विज्ञापन
दुर्घटना को लेकर गंभीर आयुक्त ने इसके अलावा 19 अगस्त को स्टेशन मास्टर का दायित्व निभा रहे एएसएम प्रकाश सिंह समेत 16 नंबर के सभी गैंगमैनों को पूछताछ के लिए दिल्ली तलब किया है। ऑडियो की जांच में रेलवे आईटी विभाग के एक्सपर्ट्स लगे हैं। उधर, रेस्ट कीपर प्रदीप की मां प्रर्मिला ने बताया कि उसके बेटे की शुक्रवार और शनिवार को ड्यूटी रहती है। उसकी हादसे में कोई गलती नहीं है। हादसे का असली जिम्मेदार स्टेशन मास्टर है। उसे ही सजा मिलनी चाहिए।
जान पर खेलकर जनता ने किया सहयोग
डीएम जीएस प्रियदर्शी ने कहा कि खतौली ट्रेन हादसे के बाद आम जनता ने जिस तरह मानवता का परिचय दिया, उसकी जितनी तारीफ की जाए कम है। पुलिस-प्रशासन के पहुंचने से पहले ही लोगों ने डिब्बों में घुसकर घायलों को निकालना शुरू कर दिया था। एक घंटे में प्रशासन सभी घायलों को हॉस्पिटल तक पहुंचाने में सफल रहा। इसके पीछे आम जनता का बड़ा सहयोग रहा।
खतौली ट्रेन हादसे के बाद डीएम प्रियदर्शी ने मंगलवार को अपने कार्यालय में जनसमस्याएं सुनीं। इसी बीच अनौपचारिक बातचीत में डीएम ने खतौली हादसे में जनसहयोग की प्रशंसा की। डीएम ने बताया कि हादसे के 20 मिनट के अंदर वह घटनास्थल पर पहुंच गए थे। पुलिस-प्रशासन के पहुंचने से पहले ही लोगों ने बचाव कार्य शुरू कर दिया था। लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना घायलों के वाहनों को निकालने में सहयोग किया। यही कारण रहा कि एक घंटे के अंदर सभी घायलों को हॉस्पिटल भेज दिया गया। ट्रेन के अंदर फंसे घायलों को निकालने में कटर का सहयोग लिया गया।
लोगों की जान बचाना प्राथमिकता थी। इस कारण हमने कुछ आदेश नियम से हटकर भी किए। परिस्थितिवश ऐसा करना जरूरी था। डीएम ने कहा कि खतौली सीएचसी और जिला चिकित्सालय की टीम की तारीफ करनी होगी। हमारे जिले में केवल एक घायल की मौत ही जिला चिकित्सालय में हुई, बाकी सभी घायलों को बचा लिया गया। जिस घायल की मौत हुई, वह 70 साल के बुजुर्ग थे। मेरठ में दो और गाजियाबाद में एक घायल की मौत हुई।
कुल चार घायलों की मौत हादसे के बाद हुई है। जिस तरह का हादसा था और घायलों की संख्या सैकड़ों में थी, ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने का डर था। डीएम ने माना कि मोर्चरी पर एंबुलेंस भेजने में देरी हुई। लीक से हटकर भी कुछ आदेश करने पड़ते हैं। मोर्चरी पर मौजूद एसडीएम सदर ऐसा नहीं कर पाए। पूरी रात दिल्ली और लखनऊ के अधिकारियों से सामंजस्य बनाने का काम एडीएम वित्त ने किया। पुलिस ने मौके पर ही पंचनामा भरकर जनता को परेशान नहीं होने दिया।
विज्ञापन
हादसे के बाद सफेदा फाटक पर ड्यूटी करने वाले रेस्ट कीपर प्रदीप के ऑडियो से रेलवे महकमे में खलबली मची हुई है। सोशल मीडिया पर ऑडियो वायरल होने के बाद 19 अगस्त को खतौली रेलवे ट्रैक पर जेई प्रदीप कुमार और गैंगमैनों ने कैसे लापरवाही बरती थी, उसका खुलासा हो गया था। लापरवाही की वजह से रेलवे बोर्ड ने डीआरएम, जीएम समेत चार इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई कर दी थी। सोमवार को जांच के लिए दुर्घटनास्थल पहुंचे रेल संरक्षा आयुक्त एसके पाठक ने भी ऑडियो को जांच का अहम हिस्सा माना था।
विज्ञापन
रेस्ट कीपर प्रदीप खतौली के दयालपुरम में रहता है। उसके पिता भी रेलवे विभाग मेें काम करते थे। हादसे वाले दिन रेस्ट कीपर प्रदीप सफेदा रोड के फाटक नंबर-32ए पर गेटमैन की ड्यूटी कर रहा था। ऑडियो जारी होने के बाद वह देश की सुर्खियां बन गया। सीआरएस एसके पाठक ने ऑडियो की जांच-पड़ताल के लिए रेस्ट कीपर को दिल्ली बुलाया है।
विज्ञापन
दुर्घटना को लेकर गंभीर आयुक्त ने इसके अलावा 19 अगस्त को स्टेशन मास्टर का दायित्व निभा रहे एएसएम प्रकाश सिंह समेत 16 नंबर के सभी गैंगमैनों को पूछताछ के लिए दिल्ली तलब किया है। ऑडियो की जांच में रेलवे आईटी विभाग के एक्सपर्ट्स लगे हैं। उधर, रेस्ट कीपर प्रदीप की मां प्रर्मिला ने बताया कि उसके बेटे की शुक्रवार और शनिवार को ड्यूटी रहती है। उसकी हादसे में कोई गलती नहीं है। हादसे का असली जिम्मेदार स्टेशन मास्टर है। उसे ही सजा मिलनी चाहिए।
जान पर खेलकर जनता ने किया सहयोग
डीएम जीएस प्रियदर्शी ने कहा कि खतौली ट्रेन हादसे के बाद आम जनता ने जिस तरह मानवता का परिचय दिया, उसकी जितनी तारीफ की जाए कम है। पुलिस-प्रशासन के पहुंचने से पहले ही लोगों ने डिब्बों में घुसकर घायलों को निकालना शुरू कर दिया था। एक घंटे में प्रशासन सभी घायलों को हॉस्पिटल तक पहुंचाने में सफल रहा। इसके पीछे आम जनता का बड़ा सहयोग रहा।
खतौली ट्रेन हादसे के बाद डीएम प्रियदर्शी ने मंगलवार को अपने कार्यालय में जनसमस्याएं सुनीं। इसी बीच अनौपचारिक बातचीत में डीएम ने खतौली हादसे में जनसहयोग की प्रशंसा की। डीएम ने बताया कि हादसे के 20 मिनट के अंदर वह घटनास्थल पर पहुंच गए थे। पुलिस-प्रशासन के पहुंचने से पहले ही लोगों ने बचाव कार्य शुरू कर दिया था। लोगों ने अपनी जान की परवाह किए बिना घायलों के वाहनों को निकालने में सहयोग किया। यही कारण रहा कि एक घंटे के अंदर सभी घायलों को हॉस्पिटल भेज दिया गया। ट्रेन के अंदर फंसे घायलों को निकालने में कटर का सहयोग लिया गया।
लोगों की जान बचाना प्राथमिकता थी। इस कारण हमने कुछ आदेश नियम से हटकर भी किए। परिस्थितिवश ऐसा करना जरूरी था। डीएम ने कहा कि खतौली सीएचसी और जिला चिकित्सालय की टीम की तारीफ करनी होगी। हमारे जिले में केवल एक घायल की मौत ही जिला चिकित्सालय में हुई, बाकी सभी घायलों को बचा लिया गया। जिस घायल की मौत हुई, वह 70 साल के बुजुर्ग थे। मेरठ में दो और गाजियाबाद में एक घायल की मौत हुई।
कुल चार घायलों की मौत हादसे के बाद हुई है। जिस तरह का हादसा था और घायलों की संख्या सैकड़ों में थी, ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने का डर था। डीएम ने माना कि मोर्चरी पर एंबुलेंस भेजने में देरी हुई। लीक से हटकर भी कुछ आदेश करने पड़ते हैं। मोर्चरी पर मौजूद एसडीएम सदर ऐसा नहीं कर पाए। पूरी रात दिल्ली और लखनऊ के अधिकारियों से सामंजस्य बनाने का काम एडीएम वित्त ने किया। पुलिस ने मौके पर ही पंचनामा भरकर जनता को परेशान नहीं होने दिया।