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प्रदेश की तस्वीर और तकदीर बदलेंगे : शिवपाल यादव
मुजफ्फरनगर/अमर उजाला/ब्यूरो
Updated Sat, 01 Sep 2018 12:41 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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बुढ़ाना। राष्ट्रीय एकता सम्मेलन में पहुंचे नवगठित सेक्युलर मोर्चा के राष्ट्रूीय अध्यक्ष शिवपाल यादव का सपा में उपेक्षा का दर्द छलककर बाहर आया और उन्होंने बताया कि क्यों उन्हें मोर्चा का गठन करना पड़ा। उन्होंने कहा कि परिवार में अब बुजुर्गों का सम्मान नहीं रह गया है। सपा में वह दो-दो बार मंत्री रहे, उनके ऊपर कोई आरोप नहीं लगा, फिर भी वह बर्खास्त हुए। बहुत लंबा इंतजार किया, सोचा परिवार न टूटे, कसमें खाई, कोई समाधान नहीं निकला। उन्होंने कहा कि बुुुजुर्गों को सम्मान मिलना चाहिए, भले ही मुझे टिकट न मिले। मजबूरी में मोर्चा बनाना पड़ा। पार्टी के सभी उपेक्षित लोगों के लिए मोर्चे का गठन किया गया है। सभी हमारे साथ हैं।
कस्बे में कांधला रोड पर शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव ने कहा कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने प्रदेश में बहुत कुछ देखा है। प्रदेश का राजनीतिक माहौल बेहद खराब हो चुका है। किसान और गरीब की हालत बेहद खराब है। प्रदेश में चारों तरफ अराजकता फैली है।
प्रदेश की तस्वीर और तकदीर बदलने के लिए यह मोर्चा बनाया है। हमारे मोर्चे में बुजुर्गों और धर्म गुरुओं को पूरा सम्मान मिलेगा। दंगे के दौरान पहुंचकर मैने अमन चैन कायम कराया था। सम्मेलन में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि हिंदुस्तान में हिंदू व मुस्लिमों को लड़ाकर राजनीति की जा रही है। हिंदुस्तान का मुसलमान गद्दार नहीं हो सकता। मुसलमान होना ही उनके लिए वतन परस्ती का सबूत है।
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पाकिस्तान से नफरत करने वाले वहां जाकर गले मिलते हैं। क्या उनकी गर्दन काट लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुल्क के बंटवारे पर दस्तखत मुस्लिमों ने नहीं महात्मा गांधी ने किए थे।उन्होंने सवाल उठा कि पाकिस्तान से नफरत करने वाले हमारे प्रधानमंत्री ने वहां के प्रधानमंत्री इमरान खान को ‘प्रेमपत्र’ क्यों लिखा। ये पवित्र भूमि चौधरी चरण सिंह व वीर जवानों की है। आरक्षण का घोर विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि जाति के आधार पर आरक्षण को खत्म कर आर्थिक आधार पर आरक्षण किया जाना चाहिए। कार्यक्रम में गरीब नवाज फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंसार रजा ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर कादिर सिद्दीकी, कारी नौशाद, मुज्जमिल सैफी, शहजाद राजपूत आदि ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का आयोजन कादिर सिद्दीकी, मुज्जमिल सैफी सहारनपुर ने किया।
‘किसी पार्टी से गठबंधन नहीं होगा’
बुढ़ाना। समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव ने कहा कि उनका मोर्चा प्रदेश की सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगा। उन्होंने किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन से इंकार किया। कस्बे के काधंला रोड पर आयोजित राष्ट्रीय एकता सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पहुुंचे पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव ने पत्रकार वार्ता में कहा कि उनका मोर्चा सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगा।
भाजपा अथवा किसी अन्य पार्टी के साथ गठबंधन के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि उनका किसी पार्टी से गठबंधन नहीं होगा। अलग मोर्चा बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी, क्या परिवार में उन्हें सम्मान नहीं मिला, इस प्रश्न पर उन्होंने कहा कि प्रदेश में सभी राजनीतिक दलों के हालात खराब है। प्रदेश के उपेक्षित लोगों के लिए यह मोर्चा बना है।
परिवार में बुजुुर्गों का सम्मान नहीं है। नेताजी हर दु:ख दर्द में शामिल रहा हूं। बुजुर्गों को सम्मान न मिलने तथा उनकी उपेक्षाओं के कारण उन्हें मोर्चा बनाने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने परिवार के किसी भी सदस्य व सपा के किसी भी नेता के बारे में कुछ भी कहने से इंकार किया। दो वर्षों के इंतजार के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। योगी और मोदी सरकार के बारे में उन्होंने कहा कि चारों तरफ लूट मची हुई है। प्रदेश के हालात खराब है। गरीब किसान परेशान है। आजादी के बाद 70 सालों में गरीब व किसान की दशा में कोई सुधार नहीं हुआ। समाजवादी सेक्युलर मोर्चा उत्तर प्रदेश की तस्वीर व तकदीर बदलेगा।
शिवपाल के करीबियों ने किया कार्यक्रम से किनारा
मुजफ्फरनगर। सपा को मुजफ्फरनगर में हुए दंगे ने प्रदेश की सत्ता से बाहर कर दिया था। उसी जमीं से पूर्व सीएम अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने नवगठित समाजवादी सेक्युलर मोर्चा की रैली कर अपने इरादों का आगाज किया है। हालांकि बुढ़ाना में आयोजित उनकी सभा से सपाइयों ने किनारा किया। शिवपाल के सहारे जिले की राजनीति में चमके सपा के पदाधिकारी भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे।
वर्ष 2013 में तत्कालीन अखिलेश सरकार में फैली नफरत की हिंसा में मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ और बागपत झुलस गए थे। दंगे में 65 से ज्यादा मौतें हुई और पचास हजार ग्रामीण बेघर हो गए। उस वक्त सरकार में शिवपाल यादव कैबिनेट में सबसे ताकतवर मंत्री थे। दंगे का सपा डैमेज कंट्रोल नहीं कर पाई और पार्टी से सत्ता छिन गई। दंगे से पीड़ित हजारों लोगों ने बुढ़ाना और जौला के राहत शिविरों में शरण ली थी।
समाजवादी सेक्युलर मोर्चा बना कर सूबे में नई सियासी हलचल पैदा करने वाले सपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल ने जिले में राष्ट्रीय एकता सम्मेलन कर अपनी पारी की शुरुआत की है। तीन दिन पहले ही उन्होंने लखनऊ में मोर्चे के गठन की घोषणा की थी। अपने खास सलाहकारों की राय पर यादव ने बुढ़ाना से वेस्ट यूपी में मोर्चे की दस्तक दी। हालांकि बीत दो दशक में उनके करीब रहे सपा के बड़े पदाधिकारियों ने भी उनके सम्मेलन को तवज्जो नहीं दी। वरिष्ठ सपा नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों में से भी कोई बुढ़ाना नहीं पहुंचा। सिर्फ सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष इलम सिंह गुर्जर जरूर उनके साथ दिखे। सम्मेलन के आयोजन में सहारनपुर, मेरठ, बागपत आदि अन्य जिलों के समर्थकों की भूमिका रही। सपा जिलाध्यक्ष गौरव स्वरूप और पूर्व राज्यमंत्री मुकेश चौधरी ने कहा कि सपा का कोई भी कार्यकर्ता मोर्चा की गतिविधि में शामिल नहीं होगा। सपाइयों की निष्ठा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से जुड़ी है।
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कस्बे में कांधला रोड पर शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव ने कहा कि उन्होंने अपनी आंखों के सामने प्रदेश में बहुत कुछ देखा है। प्रदेश का राजनीतिक माहौल बेहद खराब हो चुका है। किसान और गरीब की हालत बेहद खराब है। प्रदेश में चारों तरफ अराजकता फैली है।
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प्रदेश की तस्वीर और तकदीर बदलने के लिए यह मोर्चा बनाया है। हमारे मोर्चे में बुजुर्गों और धर्म गुरुओं को पूरा सम्मान मिलेगा। दंगे के दौरान पहुंचकर मैने अमन चैन कायम कराया था। सम्मेलन में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि हिंदुस्तान में हिंदू व मुस्लिमों को लड़ाकर राजनीति की जा रही है। हिंदुस्तान का मुसलमान गद्दार नहीं हो सकता। मुसलमान होना ही उनके लिए वतन परस्ती का सबूत है।
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पाकिस्तान से नफरत करने वाले वहां जाकर गले मिलते हैं। क्या उनकी गर्दन काट लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुल्क के बंटवारे पर दस्तखत मुस्लिमों ने नहीं महात्मा गांधी ने किए थे।उन्होंने सवाल उठा कि पाकिस्तान से नफरत करने वाले हमारे प्रधानमंत्री ने वहां के प्रधानमंत्री इमरान खान को ‘प्रेमपत्र’ क्यों लिखा। ये पवित्र भूमि चौधरी चरण सिंह व वीर जवानों की है। आरक्षण का घोर विरोध करते हुए उन्होंने कहा कि जाति के आधार पर आरक्षण को खत्म कर आर्थिक आधार पर आरक्षण किया जाना चाहिए। कार्यक्रम में गरीब नवाज फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंसार रजा ने भी विचार व्यक्त किए। इस मौके पर कादिर सिद्दीकी, कारी नौशाद, मुज्जमिल सैफी, शहजाद राजपूत आदि ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का आयोजन कादिर सिद्दीकी, मुज्जमिल सैफी सहारनपुर ने किया।
‘किसी पार्टी से गठबंधन नहीं होगा’
बुढ़ाना। समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव ने कहा कि उनका मोर्चा प्रदेश की सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगा। उन्होंने किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन से इंकार किया। कस्बे के काधंला रोड पर आयोजित राष्ट्रीय एकता सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पहुुंचे पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव ने पत्रकार वार्ता में कहा कि उनका मोर्चा सभी 80 सीटों पर चुनाव लड़ेगा।
भाजपा अथवा किसी अन्य पार्टी के साथ गठबंधन के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि उनका किसी पार्टी से गठबंधन नहीं होगा। अलग मोर्चा बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी, क्या परिवार में उन्हें सम्मान नहीं मिला, इस प्रश्न पर उन्होंने कहा कि प्रदेश में सभी राजनीतिक दलों के हालात खराब है। प्रदेश के उपेक्षित लोगों के लिए यह मोर्चा बना है।
परिवार में बुजुुर्गों का सम्मान नहीं है। नेताजी हर दु:ख दर्द में शामिल रहा हूं। बुजुर्गों को सम्मान न मिलने तथा उनकी उपेक्षाओं के कारण उन्हें मोर्चा बनाने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने परिवार के किसी भी सदस्य व सपा के किसी भी नेता के बारे में कुछ भी कहने से इंकार किया। दो वर्षों के इंतजार के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। योगी और मोदी सरकार के बारे में उन्होंने कहा कि चारों तरफ लूट मची हुई है। प्रदेश के हालात खराब है। गरीब किसान परेशान है। आजादी के बाद 70 सालों में गरीब व किसान की दशा में कोई सुधार नहीं हुआ। समाजवादी सेक्युलर मोर्चा उत्तर प्रदेश की तस्वीर व तकदीर बदलेगा।
शिवपाल के करीबियों ने किया कार्यक्रम से किनारा
मुजफ्फरनगर। सपा को मुजफ्फरनगर में हुए दंगे ने प्रदेश की सत्ता से बाहर कर दिया था। उसी जमीं से पूर्व सीएम अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने नवगठित समाजवादी सेक्युलर मोर्चा की रैली कर अपने इरादों का आगाज किया है। हालांकि बुढ़ाना में आयोजित उनकी सभा से सपाइयों ने किनारा किया। शिवपाल के सहारे जिले की राजनीति में चमके सपा के पदाधिकारी भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे।
वर्ष 2013 में तत्कालीन अखिलेश सरकार में फैली नफरत की हिंसा में मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ और बागपत झुलस गए थे। दंगे में 65 से ज्यादा मौतें हुई और पचास हजार ग्रामीण बेघर हो गए। उस वक्त सरकार में शिवपाल यादव कैबिनेट में सबसे ताकतवर मंत्री थे। दंगे का सपा डैमेज कंट्रोल नहीं कर पाई और पार्टी से सत्ता छिन गई। दंगे से पीड़ित हजारों लोगों ने बुढ़ाना और जौला के राहत शिविरों में शरण ली थी।
समाजवादी सेक्युलर मोर्चा बना कर सूबे में नई सियासी हलचल पैदा करने वाले सपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल ने जिले में राष्ट्रीय एकता सम्मेलन कर अपनी पारी की शुरुआत की है। तीन दिन पहले ही उन्होंने लखनऊ में मोर्चे के गठन की घोषणा की थी। अपने खास सलाहकारों की राय पर यादव ने बुढ़ाना से वेस्ट यूपी में मोर्चे की दस्तक दी। हालांकि बीत दो दशक में उनके करीब रहे सपा के बड़े पदाधिकारियों ने भी उनके सम्मेलन को तवज्जो नहीं दी। वरिष्ठ सपा नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों में से भी कोई बुढ़ाना नहीं पहुंचा। सिर्फ सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष इलम सिंह गुर्जर जरूर उनके साथ दिखे। सम्मेलन के आयोजन में सहारनपुर, मेरठ, बागपत आदि अन्य जिलों के समर्थकों की भूमिका रही। सपा जिलाध्यक्ष गौरव स्वरूप और पूर्व राज्यमंत्री मुकेश चौधरी ने कहा कि सपा का कोई भी कार्यकर्ता मोर्चा की गतिविधि में शामिल नहीं होगा। सपाइयों की निष्ठा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से जुड़ी है।