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Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर - खून की जांच के बाद ही शुरू करें सर्पदंश का इलाज
Wed, 14 Feb 2024 02:48 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 14 Feb 2024 02:48 AM IST
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- चिकित्सक, फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्स को दिया सर्प दंश प्रबंधन प्रशिक्षण
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। जिला चिकित्सालय और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक, फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्स को सर्पदंश प्रबंधन प्रशिक्षण दिया गया। सीएमओ डॉ. महावीर सिंह फौजदार ने सभी से एंटी वेनम (वैक्सीन) की उपलब्धता की जानकारी ली। विशेषज्ञों ने कहा कि सर्पदंश के बाद अस्पताल पहुंचने वाले मरीज की सबसे पहले खून की जांच की जाए।
स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय स्थित रेड क्रॉस भवन में सर्पदंश प्रबंधन प्रशिक्षण का आयोजन हुआ। जिसमें महिला और पुरुष अस्पताल के साथ-साथ सभी सीएचसी के चिकित्सक, फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्स को सर्पदंश के बाद दिए जाने वाले उपचार के बारे में बताया। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. योगेंद्र त्रिखा ने सभी को जानकारी देते हुए कहा कि सर्पदंश के बाद अस्पताल पहुंचने वाले मरीज की खून की जांच की जाए। इसके अलावा यह भी देखा जाए कि मरीज का खून अगर करीब 20 मिनट के भीतर जम गया है तो उसे किसी जहरीले सर्प ने नहीं काटा है, अगर खून पतला ही रहता है तो समझ जाए कि जहर का असर है।
उन्होंने सर्प दंश के बाद क्या करें और क्या न करें के बारे में बताया। साथ ही सर्प दंश वाले मरीज को किस तरह से उपचार देने हैं, उसकी भी जानकारी दी। इस दौरान सीएमओ डॉ. महावीर सिंह फौजदार ने बताया कि जिले में सर्पदंश के मामले में पुरकाजी, जानसठ और मोरना का क्षेत्र संदेवनशील माना जाता है। जिन क्षेत्रों में बाढ़ आती है, वहां सर्पदंश के केस अधिक रहते हैं।
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सीएमओ डॉ. महावीर सिंह फौजदार ने कहा कि जिन सीएचसी पर एंटी वेनम नहीं है, वह तुरंत ही सूचना देकर मुख्यालय से एंटी वेनम लेकर जाएं। उन्होंने कहा कि भारत में 50 तरह की प्रजाति के सर्प होते हैं। अधिकांश मामलों में देखा गया है कि सर्पदंश के बाद मरीज की हृदय गति रुकने के कारण मौत हो जाती है। उन्होंने कहा कि सर्पदंश के बाद मरीज डरता और घबरा जाता है। इस मौके पर जिला सर्विलांस अधिकारी अलका सिंह, डॉ. बाबूराम, जिला एपिडेमियोलोजिस्ट डॉ. शमशेर आलम, वेक्टर बॉर्न कंसलटेंट अहतेशाम खान, फार्मासिस्ट मोहम्मद हारून मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर। जिला चिकित्सालय और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक, फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्स को सर्पदंश प्रबंधन प्रशिक्षण दिया गया। सीएमओ डॉ. महावीर सिंह फौजदार ने सभी से एंटी वेनम (वैक्सीन) की उपलब्धता की जानकारी ली। विशेषज्ञों ने कहा कि सर्पदंश के बाद अस्पताल पहुंचने वाले मरीज की सबसे पहले खून की जांच की जाए।
स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय स्थित रेड क्रॉस भवन में सर्पदंश प्रबंधन प्रशिक्षण का आयोजन हुआ। जिसमें महिला और पुरुष अस्पताल के साथ-साथ सभी सीएचसी के चिकित्सक, फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्स को सर्पदंश के बाद दिए जाने वाले उपचार के बारे में बताया। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. योगेंद्र त्रिखा ने सभी को जानकारी देते हुए कहा कि सर्पदंश के बाद अस्पताल पहुंचने वाले मरीज की खून की जांच की जाए। इसके अलावा यह भी देखा जाए कि मरीज का खून अगर करीब 20 मिनट के भीतर जम गया है तो उसे किसी जहरीले सर्प ने नहीं काटा है, अगर खून पतला ही रहता है तो समझ जाए कि जहर का असर है।
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उन्होंने सर्प दंश के बाद क्या करें और क्या न करें के बारे में बताया। साथ ही सर्प दंश वाले मरीज को किस तरह से उपचार देने हैं, उसकी भी जानकारी दी। इस दौरान सीएमओ डॉ. महावीर सिंह फौजदार ने बताया कि जिले में सर्पदंश के मामले में पुरकाजी, जानसठ और मोरना का क्षेत्र संदेवनशील माना जाता है। जिन क्षेत्रों में बाढ़ आती है, वहां सर्पदंश के केस अधिक रहते हैं।
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सीएमओ डॉ. महावीर सिंह फौजदार ने कहा कि जिन सीएचसी पर एंटी वेनम नहीं है, वह तुरंत ही सूचना देकर मुख्यालय से एंटी वेनम लेकर जाएं। उन्होंने कहा कि भारत में 50 तरह की प्रजाति के सर्प होते हैं। अधिकांश मामलों में देखा गया है कि सर्पदंश के बाद मरीज की हृदय गति रुकने के कारण मौत हो जाती है। उन्होंने कहा कि सर्पदंश के बाद मरीज डरता और घबरा जाता है। इस मौके पर जिला सर्विलांस अधिकारी अलका सिंह, डॉ. बाबूराम, जिला एपिडेमियोलोजिस्ट डॉ. शमशेर आलम, वेक्टर बॉर्न कंसलटेंट अहतेशाम खान, फार्मासिस्ट मोहम्मद हारून मौजूद रहे।