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भोग व मोक्ष प्राप्त कराने वाली है श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी
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देवबंद। शक्तिपीठ श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर देश विदेश में रहने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मां श्री त्रिपुर बाला सुंदरी देवी की उपासना करने वालों को भोग और मोक्ष प्राप्त होते हैं। शक्तिपीठ की पौराणिकता का प्रमाण मंदिर के निकासी द्वार पर लगे पत्थर पर अंकित उस भाषा से मिलता है, इसे आज तक पुरातत्व विभाग के वैज्ञानिक भी नहीं पढ़ सके।
श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर लगभग 34 बीघा भूमि में फैला है। इस शक्तिपीठ पर ही भारतीय शक संवत के अनुसार प्रत्येक वर्ष चैत्र मास की चतुर्दशी तिथि पर भव्य मेला आयोजित होता है। इसमें हजारों श्रद्धालु मां भगवती के दर्शन कर प्रसाद चढ़ाते हैं। मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने बताया श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी एक छोटी प्रतिमा में प्राकृत रूप में विराजमान है। चांदी की पिंडी से आवृत इस प्रतिमा को पुजारी आंखें बंद करके स्नान कराने के बाद चंदन और इत्र से सुशोभित कर पुन: आवरण में छिपा देते हैं।
उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष चैत्र सुदी चौदस से पूर्व तेज हवाएं आंधी तूफान तथा वर्षा के साथ मां भगवती शक्तिपीठ में प्रवेश करती है और बाद में इसी प्रकार लौटती है। ऐसा आदिकाल से होता आ रहा है। यह रहस्य अनसुलझा है। इसके बारे में मान्यता है कि माता भगवती देवी मंदिर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराती है और लगभग एक सप्ताह के बाद तेज हवाओं व बूंदाबांदी के साथ ही माता त्रिलोकपुर (हिमाचल प्रदेश) के मुख्य मंदिर में लौट जाती है। पंडित सतेंद्र शर्मा ने बताया श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर की स्थापना कब और किसने की, इसके पुख्ता प्रमाण तो किसी के पास नहीं है, परंतु मारकंडे पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों से पता चलता है कि इस शक्तिपीठ की स्थापना महाभारत काल में हुई थी। पांडवों ने अज्ञातवास का कुछ समय यहां बिताया था।
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ब्रह्मा-विष्णु और महेश तीन पुर से है त्रिपुर बाला
देवबंद। पंडित सतेंद्र शर्मा ने बताया ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीन पुर (शरीर) जिनमें है, वह त्रिपुर बाला है। मां राजेश्वरी त्रिपुर बाला सुंदरी प्रात: कालीन सूर्यमंडल की आभा वाली है, उसके चार भुजा एवं तीन नेत्र हैं। वह अपने हाथ में पाश, धनुष बाण और अंकुश लिए है, मस्तक पर बालचंद्र सुशोभित है।
पूजा अर्चना करने वाले श्रद्धालु सोशल डिस्टेसिंग का नहीं रख रहे ध्यान
देवबंद। नवरात्र आरंभ होते ही मंदिर में पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगने लगी है। बुधवार को श्रद्धालुओं ने मां भगवती के द्वितीय स्वरूप माता ब्रह्मचारिणी की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की। मंदिर कमेटी ने श्रद्धालुओं के लिए सैनिटाइजर की व्यवस्था की है। अधिकांश श्रद्धालु मास्क लगाकर ही पूजा अर्चना करने पहुंच रहे हैं, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान कम रखा जा रहा है। इससे कोरोना संक्रमण और बढ़ सकता है।
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श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर लगभग 34 बीघा भूमि में फैला है। इस शक्तिपीठ पर ही भारतीय शक संवत के अनुसार प्रत्येक वर्ष चैत्र मास की चतुर्दशी तिथि पर भव्य मेला आयोजित होता है। इसमें हजारों श्रद्धालु मां भगवती के दर्शन कर प्रसाद चढ़ाते हैं। मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने बताया श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी एक छोटी प्रतिमा में प्राकृत रूप में विराजमान है। चांदी की पिंडी से आवृत इस प्रतिमा को पुजारी आंखें बंद करके स्नान कराने के बाद चंदन और इत्र से सुशोभित कर पुन: आवरण में छिपा देते हैं।
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उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष चैत्र सुदी चौदस से पूर्व तेज हवाएं आंधी तूफान तथा वर्षा के साथ मां भगवती शक्तिपीठ में प्रवेश करती है और बाद में इसी प्रकार लौटती है। ऐसा आदिकाल से होता आ रहा है। यह रहस्य अनसुलझा है। इसके बारे में मान्यता है कि माता भगवती देवी मंदिर में अपनी उपस्थिति दर्ज कराती है और लगभग एक सप्ताह के बाद तेज हवाओं व बूंदाबांदी के साथ ही माता त्रिलोकपुर (हिमाचल प्रदेश) के मुख्य मंदिर में लौट जाती है। पंडित सतेंद्र शर्मा ने बताया श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर की स्थापना कब और किसने की, इसके पुख्ता प्रमाण तो किसी के पास नहीं है, परंतु मारकंडे पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों से पता चलता है कि इस शक्तिपीठ की स्थापना महाभारत काल में हुई थी। पांडवों ने अज्ञातवास का कुछ समय यहां बिताया था।
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ब्रह्मा-विष्णु और महेश तीन पुर से है त्रिपुर बाला
देवबंद। पंडित सतेंद्र शर्मा ने बताया ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीन पुर (शरीर) जिनमें है, वह त्रिपुर बाला है। मां राजेश्वरी त्रिपुर बाला सुंदरी प्रात: कालीन सूर्यमंडल की आभा वाली है, उसके चार भुजा एवं तीन नेत्र हैं। वह अपने हाथ में पाश, धनुष बाण और अंकुश लिए है, मस्तक पर बालचंद्र सुशोभित है।
पूजा अर्चना करने वाले श्रद्धालु सोशल डिस्टेसिंग का नहीं रख रहे ध्यान
देवबंद। नवरात्र आरंभ होते ही मंदिर में पूजा अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लगने लगी है। बुधवार को श्रद्धालुओं ने मां भगवती के द्वितीय स्वरूप माता ब्रह्मचारिणी की विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की। मंदिर कमेटी ने श्रद्धालुओं के लिए सैनिटाइजर की व्यवस्था की है। अधिकांश श्रद्धालु मास्क लगाकर ही पूजा अर्चना करने पहुंच रहे हैं, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान कम रखा जा रहा है। इससे कोरोना संक्रमण और बढ़ सकता है।