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खाद्यान्न और फलों के ख्रराब होने से देश को बड़ा नुकसान

Sat, 26 Sep 2020 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 26 Sep 2020 12:18 AM IST
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Special lecture at Chaudhary Chhoturam PG College
मुजफ्फरनगर। चौधरी छोटूराम पीजी कॉलेज में विशेष व्याख्यान की शृंखला में पोस्ट हार्वेस्ट प्रोसेसिंग एंड वैल्यू एडिशन फार इंक्रीजिंग एग्रीकल्चर इनकम विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी ( सीफैट) लुधियाना के निदेशक डॉ आरके सिंह ने कृषि के छात्रों एवं महाविद्यालय के शिक्षकों को इस विषय पर जानकारी दी।
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उन्होंने कहा कि हमारे देश में 292 मिलियन टन खाद्यान्न तथा 312 मिलियन टन फल उत्पादन होता है, जिसका तीन से 18 प्रतिशत का नुकसान पोस्ट हार्वेस्ट की तकनीकी के अभाव में हो जाता है। अगर इसकी वैल्यू निकाली जाए तो लगभग 93000 करोड़ रुपये का नुकसान हर वर्ष देश को उठाना पड़ता है। इस महत्वपूर्ण क्षेत्र कृषि का देश की कुल जीडीपी में 15 .4 प्रतिशत तथा रोजगार में 57 प्रतिशत की भागीदारी है। कृषि विशेषज्ञ, किसानों एवं कृषि छात्रों को इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है। फ्रेश सब्जी अथवा फलों पर अगर फूड पॉलिथीन की रैपिंग करके फ्रिज में रख दिया जाए तो उस सब्जी-फल की जीवन क्षमता लगभग दोगुनी बढ़ जाती है, जबकि रैपिंग पर पड़ने वाला खर्चा बहुत ही मामूली सा होता है। इस तरह से संस्थान द्वारा विकसित अनेकों तकनीकी एवं यंत्रों की विस्तृत जानकारी दी। प्राचार्य डॉ नरेश मलिक ने आभार जताया। डॉक्टर एके सिंह ने मुख्य वक्ता का संक्षिप्त परिचय कराया। शस्य विज्ञान विभाग के डॉक्टर ओमबीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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