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सूर्य ग्रहण के कारण बंद रहे मंदिरों के कपाट
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सूर्य ग्रहण के चलते बंद रहे शि चौक के मंदिर के कपाट।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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सूर्य ग्रहण के कारण बंद रहे मंदिरों के कपाट
मुजफ्फरनगर। सूर्य ग्रहण के कारण मंदिरों के कपाट बंद रहे। मोक्ष काल पूरा होने के बाद मंदिरों की धुलाई की गई। इसके बाद पूजा-अर्चना शुरू हुई।
बुधवार शाम से सूर्यग्रहण का सूतक काल शुरू हो गया था। सूतक काल प्रारंभ होने से पहले ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे। बृहस्पतिवार सुबह लगभग आठ बजे से सूर्य ग्रहण शुरू हुआ और दोपहर करीब 11 बजे तक रहा। मोक्ष काल पूरा होने के बाद मंदिरों के कपाट खोले गए और धुलाई आदि करने के बाद भगवान को पंचामृत से स्नान कराकर पूजा-अर्चना शुरू हुई। सूर्य ग्रहण के दौरान लोगों ने दान किया। आकाश में बादल छाए रहने के कारण शहर में ग्रहण दिखाई नहीं दिया।
मीरापुर। आकाश में बादल व धुंध छाए रहने के कारण सूर्य ग्रहण की खगोलीय घटना देखने से लोग वंचित रह गए। प्रात: से ही काफी लोग तरह-तरह के उपकरण लेकर सूर्य ग्रहण देखने के लिए लालायित थे। आकाश में कोहरा व बादल छाए रहने के कारण सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई दिया। दोपहर करीब दो बजे सूर्य के दर्शन हुए, लेकिन तब तक ग्रहण पूर्ण हो चुका था। उधर, ग्रहण के कारण मंदिरों के कपाट बंद रहे और दोपहर बाद लोगों ने अनाज, वस्त्र आदि का दान किया। गंगा बैराज पर सुबह लोग स्नान के लिए भी गए।
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मुजफ्फरनगर। सूर्य ग्रहण के कारण मंदिरों के कपाट बंद रहे। मोक्ष काल पूरा होने के बाद मंदिरों की धुलाई की गई। इसके बाद पूजा-अर्चना शुरू हुई।
बुधवार शाम से सूर्यग्रहण का सूतक काल शुरू हो गया था। सूतक काल प्रारंभ होने से पहले ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए थे। बृहस्पतिवार सुबह लगभग आठ बजे से सूर्य ग्रहण शुरू हुआ और दोपहर करीब 11 बजे तक रहा। मोक्ष काल पूरा होने के बाद मंदिरों के कपाट खोले गए और धुलाई आदि करने के बाद भगवान को पंचामृत से स्नान कराकर पूजा-अर्चना शुरू हुई। सूर्य ग्रहण के दौरान लोगों ने दान किया। आकाश में बादल छाए रहने के कारण शहर में ग्रहण दिखाई नहीं दिया।
मीरापुर। आकाश में बादल व धुंध छाए रहने के कारण सूर्य ग्रहण की खगोलीय घटना देखने से लोग वंचित रह गए। प्रात: से ही काफी लोग तरह-तरह के उपकरण लेकर सूर्य ग्रहण देखने के लिए लालायित थे। आकाश में कोहरा व बादल छाए रहने के कारण सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई दिया। दोपहर करीब दो बजे सूर्य के दर्शन हुए, लेकिन तब तक ग्रहण पूर्ण हो चुका था। उधर, ग्रहण के कारण मंदिरों के कपाट बंद रहे और दोपहर बाद लोगों ने अनाज, वस्त्र आदि का दान किया। गंगा बैराज पर सुबह लोग स्नान के लिए भी गए।
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