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सोलर घड़ी, पृथ्वी की परिधि नापने का प्रशिक्षण दिया
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जीआईसी में चल रही विज्ञान कार्यशाला में सौर घडी बनाते शिक्षक।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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सोलर घड़ी, पृथ्वी की परिधि नापने का प्रशिक्षण दिया
मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय विज्ञान और संचार परिषद विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार के तत्वावधान में प्रगति विज्ञान संस्था द्वारा राजकीय इंटर कॉलेज में पांच दिवसीय कार्यशाला के तीसरे दिन अध्यापकों को सोलर घड़ी, पृथ्वी की परिधि आदि मापने का प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला में जिला विद्यालय निरीक्षक गजेंद्र कुमार ने कहा कि प्रकृति को समझना ही विज्ञान है। ब्रह्म्मांड के रहस्यों को समझा जा सकता है। यह ही सबसे बड़ा आश्चर्य है। कार्यक्रम प्रभारी दीपक शर्मा ने सोलर घड़ी बनाकर कार्यशाला का आकर्षण बढ़ाया। विज्ञान शिक्षकों ने समूह बनाकर पांच सोलर घड़ियां बनाई और उसमें समय देखकर ज्ञान प्राप्त करते हुए आनंदित हुए। प्रधानाचार्य डॉ. विकास कुमार ने ध्वनी, ऊष्मा, चुंबक आदि पर आधारित जीरो वैल्यू मॉडल बनाने सिखाएं। डॉ अनुप्रिया ने बॉल की मदद से भाप इंजन, डीएनए की संरचना, तरंग संरचना, माउंटेन , घाटी का बनना, पृथ्वी में दरार का बनना आदि की व्याख्या की। कार्यशाला में विभिन्न माध्यमिक विद्यालयों के 40 से अधिक शिक्षक शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया। इस मौके पर देवेंद्र कुमार, मदन गोपाल, सोहन पाल, आदि का सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विकास शर्मा ने किया।
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मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय विज्ञान और संचार परिषद विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार के तत्वावधान में प्रगति विज्ञान संस्था द्वारा राजकीय इंटर कॉलेज में पांच दिवसीय कार्यशाला के तीसरे दिन अध्यापकों को सोलर घड़ी, पृथ्वी की परिधि आदि मापने का प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला में जिला विद्यालय निरीक्षक गजेंद्र कुमार ने कहा कि प्रकृति को समझना ही विज्ञान है। ब्रह्म्मांड के रहस्यों को समझा जा सकता है। यह ही सबसे बड़ा आश्चर्य है। कार्यक्रम प्रभारी दीपक शर्मा ने सोलर घड़ी बनाकर कार्यशाला का आकर्षण बढ़ाया। विज्ञान शिक्षकों ने समूह बनाकर पांच सोलर घड़ियां बनाई और उसमें समय देखकर ज्ञान प्राप्त करते हुए आनंदित हुए। प्रधानाचार्य डॉ. विकास कुमार ने ध्वनी, ऊष्मा, चुंबक आदि पर आधारित जीरो वैल्यू मॉडल बनाने सिखाएं। डॉ अनुप्रिया ने बॉल की मदद से भाप इंजन, डीएनए की संरचना, तरंग संरचना, माउंटेन , घाटी का बनना, पृथ्वी में दरार का बनना आदि की व्याख्या की। कार्यशाला में विभिन्न माध्यमिक विद्यालयों के 40 से अधिक शिक्षक शिक्षिकाओं ने प्रतिभाग किया। इस मौके पर देवेंद्र कुमार, मदन गोपाल, सोहन पाल, आदि का सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विकास शर्मा ने किया।
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