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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Sita would have been saved if the mother and son had received justice on time.

Muzaffarnagar News: मां-बेटे को समय पर न्याय मिलता तो बच जाती सीता

Sun, 31 May 2026 01:21 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 31 May 2026 01:21 AM IST
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Sita would have been saved if the mother and son had received justice on time.
अमर उजाला ब्यूरो
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मुजफ्फरनगर। न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय, कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने लिखा कि निर्णय घटना के 15 साल बाद आया। न्याय व्यवस्था का एक अंग होने के कारण मेरे ऊपर भी एक प्रश्नगत चिन्ह लगता है और एक विफलता का भी द्योतक है।
मां-बेटे की हत्या के प्रकरण का अतिशीघ्र विचारण कर यह निर्णय लगभग 12-13 वर्ष पूर्व आता तो सिद्धदोष रईस उर्फ रहीस उर्फ जहूर हसन पुनः अपराध करने की हिम्मत नहीं कर पाता और एक और महिला सीता को जान से हाथ नहीं धोना पड़ता।
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शीघ्र और कठोर निर्णय अपराधियों का मनोबल गिराते हैं और अपराधियों के मन में कानून का डर पैदा करके अपराधों को कम करते हैं। शीघ्र सजा मिलने से अपराधियों में यह संदेश जाता है कि अपराध का परिणाम तुरंत और निश्चित है, जिससे वह दोबारा अपराध करने से बचते हैं।
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जल्दी न्याय होने से गवाहों के मुकरने या सबूतों के नष्ट होने की संभावना काफी कम हो जाती है, जिससे मामलों में सजा की दर बढ़ती है। जब अपराधी देखते हैं कि शीघ्र सजा नहीं मिल रही है, तो वह सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर अपराध को अपनी आजीविका या ताकत का जरिया बना लेते हैं।
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शीघ्र फैसलों के लिए यह बदलाव जरूरी
शीघ्र निर्णय के लिए जजों की नियुक्ति में वृद्धि, न्यायालय के स्टाफ में विशेषकर स्टेनों की संख्या में वृद्धि ताकि प्रत्येक कोर्ट में दो-तीन स्टेनों नियुक्त हो सके और तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता है ताकि समय पर न्याय सुनिश्चित हो सके।

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जानिये कौन है सीता...क्या है रईस से संबंध
टंकी निर्माण के ठेकेदार और राजमिस्त्री रईस की काम के दौरान ही राजस्थान के धौलपुर के गांव बहरावती निवासी सीता (40) से जान पहचान हुई। करीब दो साल पहले दोनों ने शादी कर ली। इसी साल 21 जनवरी को बरेली में दहेज के लिए सीता की हत्या कर दी गई, जिसका मुकदमा बरेली के बिशारतगंज में 22 जनवरी को दर्ज हुआ था। इसी मामले में पुलिस ने उसके पकड़ा। चार अप्रैल को आरोपपत्र दाखिल किया गया। बरेली जेल से ही मां-बेटे की हत्या में सुनवाई के लिए उसे लाया गया था।
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