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आदिवासी कल्याण बोर्ड की चेयरमैन बनी शहर की बेटी श्रुति

Fri, 12 Mar 2021 12:02 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 12 Mar 2021 12:02 AM IST
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Shruti becomes chairman of tribal welfare board
आदिवासी कल्याण बोर्ड राजस्थान की चेयरमैन बनीं मुजफ्फरनगर की श्रुति सिंह अपने माता-पिता के साथ। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
आदिवासी कल्याण बोर्ड की चेयरमैन बनी शहर की बेटी श्रुति
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मुजफ्फरनगर। आदिवासी कल्याण एवं उद्यमिता परिषद की राजस्थान प्रांत की चेयरमैन बनने का गौरव शहर की बेटी श्रुति सिंह को मिला है। होनहार बेटी की खास उपलब्धि पर परिजन, संबंधी और रिश्तेदार प्रफुल्लित हैं। वह राजस्थान के 12 प्रतिशत पिछड़े आदिवासी बहुल क्षेत्र में महिलाओं के विकास और उत्थान के लिए कार्य करेंगी। उन्हें वुमन इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (विक्की) ने इस पद पर मनोनीत किया है। राजस्थान में 22 सदस्यों के साथ सभी जिलों में आदिवासी जनजाति के हितों के लिए श्रुति शिक्षा की रोशनी जलाएंगी।
शहर की जाट कॉलोनी निवासी नरेंद्र सिंह की बेटी श्रुति सिंह बचपन से मेधावी रही है। श्रुति ने पिलानी से कक्षा 12 तक की शिक्षा हासिल की। दिल्ली विश्वविद्यालय से कॉमर्स में स्नातक किया। कॅरियर के सुनहरा सफर उनके लिए वर्ष 2015 रहा। नोएडा बिरला इंस्टीट्यूट एंड मैनेजमेंट टेक्नालॉजी से एमबीए में शानदार सफलता के साथ गोल्ड मेडल प्राप्त किया। नोएडा की मल्टीनेशनल कंपनी में डेढ़ साल तक जॉब किया। कंपनी में भारत के अलावा यूएस और कनाडा की स्टार्टअप कंपनियों को नए आइडिया के साथ निवेश दिलाने के लिए प्रेरित किया। उसके बाद उन्हें एमएनसी बंगलूरू में मार्केटिंग हेड पर जॉब मिल गया। अभी वहीं कार्यरत हैं। श्रुति सिंह को उनकी मार्केटिंग क्षेत्र में महिलाओं के लिए उत्कृष्ट कार्यों को देखते हुए विक्की संस्था की चेयरमैन डॉ. हरवीन अरोरा ने राजस्थान का जिम्मा सौंपा। विक्की संस्था दुनिया के 120 से ज्यादा देशों में उद्यमिता के क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाने की कार्य करती है। श्रुति ने फोन पर बातचीत में बताया कि राजस्थान में 22 सदस्यों के साथ सभी जिलों में आदिवासी जनजाति के हितों के लिए वह शिक्षा की रोशनी जलाएंगी। बेहतर स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एनजीओ से जोड़ेंगी। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना उनकी प्राथमिकता में है।
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परिवार को उच्च शिक्षा के हिमायती रहें दादा मामचंद
श्रुति सिंह का जन्म शामली जनपद के बनत में हुआ। दादा चौ. मामचंद कहते थे कि परिवार और समाज के विकास में शिक्षा जरूरी है। श्रुति बताती हैं कि जब लड़कियों को प्राइमरी तक शिक्षा दिलाने के बाद घर पर बैठा दिया जाता था, तब दादा जी की इच्छा से परिवार में सभी सदस्यों की उच्च शिक्षा प्राथमिकता पर रही। पिता नरेंद्र सिंह मेरठ से कृषि उत्पादन मंडी समिति से सचिव के पद से इसी वर्ष जनवरी में सेवानिवृत्त हुए। वे मुजफ्फरनगर में भी कार्यरत रहे। पिता की नौकरी के बाद उनका परिवार शहर की जाट कॉलोनी में आकर रहने लगा। माता ब्रजेश गृहिणी हैं। उन्होंने कॅरियर में हर कदम मोटिवेट किया। माता-पिता, बड़ी बहन प्रीति सिंह, छोटा भाई आयुष प्रताप सिंह के अलावा तमाम रिश्तेदार और संबंधी इस कामयाबी पर गदगद हैं।
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