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संस्कार, चरित्र और आचरण का खजाना है श्रीराम कथा: मोरारी बापू

Tue, 22 Dec 2020 12:38 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 22 Dec 2020 12:38 AM IST
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Shri Ram Katha is the treasure of rituals and conduct: Morari Bapu
शुकतीर्थ में राम कथा सुनाते मोरारी बापू। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
संस्कार और आचरण का खजाना है श्रीराम कथा: मोरारी बापू
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मोरना (मुजफ्फरनगर)। कथा मर्मज्ञ मोरारी बापू ने कहा कि हरिनाम उसे फलित होता है. जिसका स्वभाव गाय के समान हो। कुदरती गरीबी ही असली अमीरी है। दया गरीब का आभूषण है. जिसमें दया हो वह ही साधु होता है। भजन करने वाला हो, या न हो बस वह शीलवान हो। गरीब को कभी मत सताओ, उससे प्रेम करो।

सोमवार को भागवत उद्गम स्थल शुकतीर्थ गंगा घाट पर आयोजित श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथा व्यास मोरारी बापू ने अमृत वर्षा करते हुए कहा कि श्रीराम कथा में संस्कार, चरित्र और आचरण का खजाना भरा पड़ा है। आस्था अनुसार जितना चाहे लूट लो, तुम्हें कोई रोकने वाला नहीं है। परमात्मा ने स्वभाव में गरीबी दी हो तो ग्लानि मत करना। हरिनाम उसका सफल होता है, जिसका स्वभाव सरल होता है। कथाएं भगवान श्रीमुख से निकलती हैं, जिसमें प्रेम का अमृत रूपी प्रसाद होता है, वह सामने वाले पर निर्भर है कि वह कथा रूपी प्रसाद अपने ह्दय में कितना ग्रहण करता है। जीवन संघर्ष का दूसरा नाम रामायण ग्रंथ है। झरनों से पतली से धारा निकलती है, जो आगे चलकर विशाल नदी का रूप धारण कर मोक्षदायिनी बनती है। ऐसे ही भक्ति का छोटा सा अंकुर अगर ह्दय में अंकुरित हो जाए, तो वह कथाओं में परिवर्तित हो जाता है। शरणगम प्रमार्थ को मानता है। निरंतर चलते रहना। राम तत्व ज्ञान और गुणों का भंडार है, वह भक्ति की पराकाष्ठा है। सती कथा का सुख प्राप्त नहीं कर सकती। भक्ति की जिज्ञासा भगवान शिव का वरदान है, सच्चिदानंद मतलब श्रीराम. जिसकी भक्ति ब्रह्मांड करें, वह ईश्वर साक्षात राम है। उन्होंने कहा कि बुद्धि सुधार प्रतीक्षा का मार्ग से संभव है। कथा क्रीड़ा है, जितनी चाहे मौज उड़ाओ। इसमें कर्म की वचनता नहीं होती, रहमत बरसती है। उन्होंने कहा कि जिसने परमात्मा के चरणों में प्यार नहीं किया वह सांसारिक क्रियाएं भोगता रहेगा। यम, नियम, आसन, ध्यान, धारणा, प्राणायाम, समाधि है, हरिनाम सीधी समाधि है। उदारता आपको सम्मान दिलाती है और भक्ति प्रेम करना सिखाती है।
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