{"_id":"62e03590c858090bd86d8884","slug":"shiva-worship-brings-happiness-and-prosperity-swami-omanand-muzaffarnagar-news-mrt5985661108","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिव उपासना से मिलती है सुख समृध्दि:- स्वामी ओमानंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिव उपासना से मिलती है सुख समृध्दि:- स्वामी ओमानंद
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
मोरना। श्रावण शिवरात्रि के पावन अवसर पर भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ स्तिथ शिव मंदिर में विश्व कल्याणार्थ रुद्राभिषेक किया गया। पीठाधीस्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने षोडशोपचार से भगवान शिव और उनके गणों का पूजन किया। वेदपाठी ब्राह्मणों ने रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों से नमक चमक द्वारा विधि विधान से भगवान शंकर का अभिषेक करवाया।
इस दौरान स्वामी ओमानंद ने कहा कि कांवड़ लाना भी एक साधना और तपस्या है, जो कांवड़ लाकर भगवान शिव पर चढ़ाता है उसका जीवन सफल और सार्थक हो जाता है। कांवड़ के माध्यम से गंगा जल लेकर विभिन्न शिवालयों पर जलाभिषेक करना भी भक्तों का शिव के प्रति समर्पण तथा पूजा आराधना का एक पुनीत साधन है, जिससे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर प्रधानाचार्य गिरीश चंद्र उप्रैती कथाव्यास अचल कृष्ण शास्त्री, आशीष माधव शास्त्री, आचार्य अरुण, आचार्य युवराज, ठाकुर प्रसाद एवं छात्र उपस्थित रहे।
विज्ञापन
मोरना। श्रावण शिवरात्रि के पावन अवसर पर भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ स्तिथ शिव मंदिर में विश्व कल्याणार्थ रुद्राभिषेक किया गया। पीठाधीस्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने षोडशोपचार से भगवान शिव और उनके गणों का पूजन किया। वेदपाठी ब्राह्मणों ने रुद्राष्टाध्यायी के मंत्रों से नमक चमक द्वारा विधि विधान से भगवान शंकर का अभिषेक करवाया।
इस दौरान स्वामी ओमानंद ने कहा कि कांवड़ लाना भी एक साधना और तपस्या है, जो कांवड़ लाकर भगवान शिव पर चढ़ाता है उसका जीवन सफल और सार्थक हो जाता है। कांवड़ के माध्यम से गंगा जल लेकर विभिन्न शिवालयों पर जलाभिषेक करना भी भक्तों का शिव के प्रति समर्पण तथा पूजा आराधना का एक पुनीत साधन है, जिससे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर प्रधानाचार्य गिरीश चंद्र उप्रैती कथाव्यास अचल कृष्ण शास्त्री, आशीष माधव शास्त्री, आचार्य अरुण, आचार्य युवराज, ठाकुर प्रसाद एवं छात्र उपस्थित रहे।
विज्ञापन