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जान जोखिम में डालकर घास फूंस के बने पुल से गुजरते हैं शिवभक्त

Sat, 15 Feb 2020 11:51 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 15 Feb 2020 11:51 PM IST
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Shiva devotees pass through a bridge made of grass thatch
4-मोरना के गांव योगिन्द्रनगर में सोनाली नदी पर बना घास फूंस पुल। - फोटो : KHATAULI
मोरना। गांव योगेंद्रनगर के सोनाली नदी पर घास फूस के बने पुल से प्रत्येक वर्ष काफी संख्या में शिव भक्तों को जोखिम उठाकर गुजरना पड़ता है। शासन व प्रशासन का कोई अधिकारी टूटे पुल को बनवाने में रुचि नहीं ले रहा है।
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मोरना ब्लाक के गांव योगेंद्रनगर के ढूंढी घाट पर कई वर्षों से घास फूस का पुल बना हुआ है। काफी संख्या में शिवभक्त हरिद्वार से गंगाजल लेकर इस जोखिम भरे पुल को पार करते हैं। कई बार पुल टूटने से शिवभक्त सोलानी नदी में गिर चुके हैं। हालांकि वहां शिव भक्तों की सेवा करने वाले ग्रामीण पानी में कूदकर शिवभक्तों की जान बचाते हैं। ग्रामीणों इसकी शिकायत जिले के आला अधिकारियों को भी कर चुके हैं, लेकिन सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिला। ग्रामीणों का कहना है कि जब से योगेंद्रनगर गांव बसा है, सभी गांव वालों की फसल नदी के उस पार है। खेती करने के लिए ग्रामीणों को अपनी भैंसा बुग्गी से नदी से पार होकर जाना पड़ता है, जिसमें कई बार भैंसा बुग्गी डूबने से कई व्यक्तियों की मौत भी हो चुकी है और पशु भी मर चुके हैं। गांव के सोम सिंह प्रताप, महिपाल, लोकपाल, ऋषिपाल, मेनपाल, राजकमल, सेवाराम, राजीव, धीरज सिंह, सूरज, समनचंद, प्रवीण, अतर सिंह, जयसिंह, उमेश कुमार, मेनपाल, बबलू, रामपाल, शेरसिंह, मामचंद, संजीव कुमार, मुकेश कुमार, जयचंद आदि ग्रामीणों ने बताया कि पिछले लोकसभा चुनाव में ग्रामीणों ने चुनाव का बहिष्कार करते हुए करीब 12 बजे तक गांव में वोटिंग नहीं की थी। गांव में पहुंचे अधिकारियों ने लिखित में आश्वासन देकर कहा था कि कांवड़ मेले से पहले सोलानी नदी पर 30 मीटर लंबा पुल बनवा देंगे। इसके बाद ग्रामीणों ने मतदान किया था। गांव में सांसद या विधायक भी वोट लेने के नाम पर आश्वासन देते हैं कि पुल वे अपनी जेब से रुपये खर्च करके बनवा देंगे, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई भी इसकी सुध नहीं लेता।
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मेहनताना नहीं मिलता तो काम छोड़ा
-गांव के ही मल्हा जाति के इंद्रपाल, ओम प्रकाश ने बताया कि उनका परिवार पिछले 300 वर्षों से इस घाट पर गांव वालों की सेवा कर रहा है। हमारे पूर्वजों ने गांव वालों को नाव के द्वारा नदी पार कराई, जिसका हमें प्रत्येक परिवार से मेहनताना दिया जाता था और आज हमारा परिवार लोहे का पुल बनाकर ग्रामीणों की सेवा कर रहा है, लेकिन अब ग्रामीण कोई भी मेहनताना नहीं देता, इसलिए हमने यह काम छोड़ दिया है।
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बिजनौर से बसपा सांसद मलूक नागर का कहना है कि वे इस बारे में क्षेत्र में आकर बात करेंगे। फिलहाल वे पार्टी की बैठकों में व्यस्त चल रहे हैं।
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