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शहीदों की शौर्य गाथा ने जगाया देशभक्ति का जज्बा

Sat, 25 Jul 2020 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2020 12:15 AM IST
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Shaurya saga of royalty aroused patriotism
शुकतीर्थ में कारगिल शहीद स्मारक पर परमवीर चक्र विजेता मनोज पांडे के माता-पिता को सम्मानित करते व? - फोटो : MUZAFFARNAGAR
शहीदों की शौर्य गाथा ने जगाया देशभक्ति का जज्बा
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मुजफ्फरनगर, मोरना। शुकतीर्थ के गंगा तट पर स्थापित कारगिल शहीद स्मारक वीर सैनिकों की शौर्य गाथा का प्रतीक है। राष्ट्रसंत स्वामी कल्याणदेव ने ज्ञान, भक्ति और कर्म की धरा पर स्मारक को स्थापित कर देशभक्ति की प्रेरणा ज्योति जलाई थी। भागवत भूमि पर स्थापित भव्य स्मारक राष्ट्रभक्ति का प्रेरक है। शिलापट्ट पर 527 शहीद सैनिकों के नाम, बटालियन और राज्य का विवरण अंकित है। टाइगर हिल्स से आए पत्थर स्मारक के स्तंभ पर रखे गए है। वीतराग स्वामी कल्याणदेव ने स्मारक का लोकार्पण 9 मार्च, 2003 को तत्कालीन महा निदेशक एनसीसी बी.के. बोपन्ना से कराया था। ऑपरेशन विजय में वीरगति पाने वाले परिवारों को शुकतीर्थ आमंत्रित किया गया था। लखनऊ के परमवीर चक्र विजेता मनोज पांडे की मां मोहिनी पांडे तथा पिता गोपीचंद पांडे को वीतराग संत ने विशेष रूप से सम्मानित किया था। 2004 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत ने स्मारक पर शहीद सैनिकों को श्रद्धाजंलि अर्पित की थी। उन्हीं के प्रयास से गंगा घाट के किनारे विजयंत टैंक की स्थापना हुई थी। तत्कालीन रक्षा मंत्री जार्ज फर्नाडीस तथा रक्षा राज्य मंत्री चमन लाल गुप्ता ने शुकतीर्थ आकर वीरों को नमन किया था। 28 सितंबर, 2018 को राष्ट्रीय सैनिक संस्था के संरक्षक स्वामी ओमानंद तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरचक्र विजेता तेजेंद्र पाल त्यागी के आमंत्रण पर तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने स्मारक परिसर में शहीद सरदार भगत सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया था। यहां भारत रत्न नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा भी लगी हुई है।
-कारगिल शहीद स्मारक देशभक्ति का प्रतीक है। देशभर के श्रद्धालु धार्मिक नगरी में आकर वीर सपूतों के बलिदान को नमन करते हैं। गुरुदेव की तीर्थ धाम को यह अमूल्य धरोहर है।- स्वामी ओमानंद, पीठाधीश्वर, भागवत पीठ शुकदेव आश्रम।
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-कारगिल युद्ध में भारत के जिन सैनिकों ने प्राणों की आहुति दी थी, उनकी स्मृति को स्मरण रखने के लिए वीतराग संत ने तीर्थ में कारगिल शहीद स्मारक बनाने का संकल्प पूरा किया। - निरंजन सिंह मलिक, पूर्व उप थलसेनाध्यक्ष एवं चेयरमैन कारगिल स्मारक निर्माण समिति।
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स्मारक में 16 साल बाद भी नहीं खुला पुस्तकालय
मोरना। कारगिल शहीद स्मारक पर 16 साल बाद भी पुस्तकालय और वाचनालय प्रारंभ नहीं हो पाया है। वर्ष 2005 में तत्कालीन उप राष्ट्रपति भैरो सिंह शेखावत ने शिलान्यास किया था। राज्यसभा सांसद कुलदीप नैयर की सांसद निधि से यह निर्माण हुआ था। प्रशासन की उपेक्षा के कारण स्मारक का सौंदर्यकरण भी नहीं हो पा रहा है। राष्ट्रीय सैनिक संस्था के प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन सुरेश चंद्र त्यागी, पूर्व चेयरमैन भोकरहेड़ी कैप्टन ज्ञानेंद्र, संस्था जिलाध्यक्ष रहकड़ा के सूबेदार अशोक कुमार, राजेंद्र राठी, हवलदार सुधीश कुमार कहते हैं कि सांसद और विधायक अपनी निधि से बजट देकर स्मारक का सौंदर्यकरण और रखरखाव कराए।

शुकतीर्थ में कारगिल स्मारक के शिलापट पर अंकित शहीदों के नाम।

शुकतीर्थ में कारगिल स्मारक के शिलापट पर अंकित शहीदों के नाम।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ में स्थापित कारगिल शहीद स्मारक।

मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ में स्थापित कारगिल शहीद स्मारक।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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