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विद्यार्थियों को परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता
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मुजफ्फरनगर। अभिभावकों की शिकायत पर डीएम के आदेश पर गठित जांच कमेटी के अध्यक्ष डीआईओएस ने शारदेन स्कूल को सुधार के लिए आठ सुझाव दिए हैं। सुझावों को लागू कर आठ दिन में जवाब देने के लिए कहा गया है। सुझाव में कहा गया है कि समय से फीस नहीं आने पर किसी छात्र को परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।
डीआईओएस गजेंद्र कुमार ने शारदेन स्कूल को पत्र जारी किया है। इस पत्र में कहा गया है कि विद्यालय में शिक्षा का स्तर सुधारने को विशेष प्रयास किए जाएं। अभिभावकों की शिकायतें सुनकर उनका निस्तारण करने के लिए विद्यालय में एक अधिकारी को नियुक्त किया जाए। कोविड के चलते इस सत्र में फीस बढ़ाने का कोई प्रस्ताव शासन का नहीं है। विद्यालय की निर्धारित फीस को वेबसाइट पर डाला जाए, ताकि बाद में कोई विवाद न हो। विद्यालय में शिक्षक अभिभावक संघ का गठन किया जाए। प्रति माह इसकी बैठक होनी चाहिए।
विद्यालय में पाठ्य पुस्तक, ड्रेस या अन्य सामग्री के विक्रय एवं वितरण के लिए कोई स्टॉल नहीं होना चाहिए। अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से पुस्तकें आदि के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। किसी भी बच्चे को फीस जमा न होने के कारण ऑनलाइन या ऑफलाइन शिक्षा और परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। न ही अभिभावक को प्रताड़ित किया जा सकता है।
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अभिभावक से समन्वय बना आसान किश्तों में पैसा जमा करें। आर्थिक स्थिति के आधार पर छूट भी दी जा सकती है। शिक्षा केवल एनसीईआरटी की पुस्तकों से ही दी जाए। विद्यालय में अभिभावकों के मध्य अच्छा वातावरण बनाया जाए। सभी कमियों और सुझावों को 15 दिन में लागू कर कार्यालय को अवगत कराएं। अवहेलना पर विद्यालय के विरुद्ध कार्रवाई को बाध्य होना पड़ेगा।
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डीआईओएस गजेंद्र कुमार ने शारदेन स्कूल को पत्र जारी किया है। इस पत्र में कहा गया है कि विद्यालय में शिक्षा का स्तर सुधारने को विशेष प्रयास किए जाएं। अभिभावकों की शिकायतें सुनकर उनका निस्तारण करने के लिए विद्यालय में एक अधिकारी को नियुक्त किया जाए। कोविड के चलते इस सत्र में फीस बढ़ाने का कोई प्रस्ताव शासन का नहीं है। विद्यालय की निर्धारित फीस को वेबसाइट पर डाला जाए, ताकि बाद में कोई विवाद न हो। विद्यालय में शिक्षक अभिभावक संघ का गठन किया जाए। प्रति माह इसकी बैठक होनी चाहिए।
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विद्यालय में पाठ्य पुस्तक, ड्रेस या अन्य सामग्री के विक्रय एवं वितरण के लिए कोई स्टॉल नहीं होना चाहिए। अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से पुस्तकें आदि के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। किसी भी बच्चे को फीस जमा न होने के कारण ऑनलाइन या ऑफलाइन शिक्षा और परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। न ही अभिभावक को प्रताड़ित किया जा सकता है।
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अभिभावक से समन्वय बना आसान किश्तों में पैसा जमा करें। आर्थिक स्थिति के आधार पर छूट भी दी जा सकती है। शिक्षा केवल एनसीईआरटी की पुस्तकों से ही दी जाए। विद्यालय में अभिभावकों के मध्य अच्छा वातावरण बनाया जाए। सभी कमियों और सुझावों को 15 दिन में लागू कर कार्यालय को अवगत कराएं। अवहेलना पर विद्यालय के विरुद्ध कार्रवाई को बाध्य होना पड़ेगा।