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ऐतिहासिक दूधली मेले पर छाया कोरोना का साया

Sat, 15 Aug 2020 12:33 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 15 Aug 2020 12:33 AM IST
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Shadow of Corona on the historic Dudhli Fair
14द्वठ्ठद्दष्द्ध02 एवं 02ड्ड-दूधली गांव में ऐतिहासिक गोगा म्हाड़ी - फोटो : MUZAFFARNAGAR
ऐतिहासिक दूधली मेले पर छाया कोरोना का साया
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चरथावल। कोरोना की बंदिश के कारण दूधली की ऐतिहासिक म्हाड़ी पर मेला नहीं सजेगा। करीब पांच सौ साल से लगने वाले मेला ग्रामीणों की याद में पहली बार स्थगित रहेगा। विभिन्न प्रांतों के लाखों श्रद्धालुओं को इस बार 20 अगस्त में लगने वाले मेले में गोगा म्हाड़ी पर दर्शन नहीं करने का मलाल रहेगा।
कोविड महामारी धार्मिक परंपराओं के लिए इतिहास बन गई है। दूधली गांव स्थित जाहरवीर गोगा माढ़ी की मान्यता राजस्थान के बागड़ के बाद मानी जाती हैं। मान्यता है कि करीब पांच सौ साल पहले इस गांव के मजरे मरूवा आलमगीरपुर निवासी किसान भक्त की मन्नत पूरी हुई, तो वह आस्था में वशीभूत होकर अपने यहां जन्मे बछेरे को पैदल बागड़ (राजस्थान) में जाहरवीर को अर्पित करने पहुंच गया। जाहरवीर को खुद प्रकट होने पर ही उसने बछेरा भेंट करने का संकल्प लिया था। मान्यता है कि भक्ति से प्रसन्न होकर जाहरवीर ने खुद प्रकट होकर बछेरा लिया और भक्त किसान को गांव में माढ़ी बनाने को पांच ईट प्रदान की थीं। बुजुर्ग महेंद्र सिंह बताते है कि उस वक्त गोगा ने किसान को वचन दिया था कि यदि ईट कहीं भी रख दोंगे, तो वहां से उठेगी नहीं। लेकिन किसान गोगा के वादे को भूल गया और थकावट के कारण दूधली में हुक्का पीने की खातिर ईटों की चद्दर रख दी। उसके बाद वहां से ईंट नहीं उठी और वहीं म्हाड़ी बनानी पड़ी थी। म्हाड़ी की महिमा कई प्रांतों में विख्यात है। तभी से गांव में मेला लगता आ रहा है। हर साल भादों में भव्य मेला सजता है। इस बार मेला की तिथि 20 अगस्त तय थी। इस बार मेले में उत्तर प्रदेश के अलावा पंजाब, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड़, राजस्थान तक के लाखों श्रद्धालुओं के नहीं आने का मलाल है।
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- ग्राम प्रधान के पति रविंद्र पुंडीर बताते है कई पीढ़ियों के मुताबिक करीब पांच सौ साल से लगते आ रहा मेला इस बार नहीं लगने का हर किसी को मलाल है। दूर प्रांतों में रिश्तेदारियों में इस बार मेला नहीं लगने की खबर भेजी जा रही है।
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- भाजपा मंडल अध्यक्ष विकास आर्य ने बताया कि म्हाड़ी की मान्यता पूरे भारत में है। गांव में हर परिवार में मेले से कई दिन पहले उत्सव सा नजारा रहता था। कोविड से बचाव के कारण मेले के लिए दूरदराज से आने वाले सर्कस, झूले और दुकान वाले नहीं आए है।

वर्जन:
एसओ सूबे सिंह ने बताया कि कोविड गाइडलाइन के कारण कहीं भी कोई मेला नहीं लग रहा है। दूधली म्हाड़ी पर मेला नहीं लगेगा और कमेटी के लोग इसमें सहयोग करेंगे।
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