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वरिष्ठजनों को स्वास्थ्य सुविधाओं की दरकार

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 30 Sep 2020 11:33 PM IST
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दीपक गुप्ता
दीपक गुप्ता - फोटो : MUZAFFARNAGAR

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वरिष्ठजनों को स्वास्थ्य सुविधाओं की दरकार
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मुजफ्फरनगर। वरिष्ठ नागरिकों के लिए यूं तो हर जगह अलग से व्यवस्था के आदेश हैं, लेकिन वास्तविक जीवन में कहीं ऐसा नजर नहीं आता। स्वास्थ्य सेवाएं हों या सार्वजनिक जीवन से जुड़ी व्यवस्था, हर कहीं बुजुर्गों को भीड़ में शामिल होकर कई बार घंटों-घंटों तक खड़े रहना या इधर से उधर चक्कर काटने पड़ते हैं। बैंकों में तो यह आम बात है, जबकि सरकारी अस्पतालों में भी दवा के लिए यही स्थिति नजर आती है। रोडवेज बसों में वरिष्ठजनों की सीट पर अन्य मुसाफिर कब्जा जमाए बैठे रहते हैं, तो रेलवे रिजर्वेशन और टिकट खिड़कियों पर भी कमोबेश बुजुर्गों को इसी तरह के हालात का सामना करना पड़ता है। अंतरराष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक दिवस पर वरिष्ठजन इन्हीं सब अपेक्षाओं को पूरा होते देखना चाहते हैं, ताकि सार्वजनिक जीवन के इस मोड़ पर उन्हें सही सम्मान मिल सके।
- डीएवी डिग्री कॉलेज के पूर्व लॉ विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राजीव कुमार ऐरन कहते हैं कि वरिष्ठ नागरिक जहां भी जाएं, उन्हें वहां प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उम्र के इस मोड़ पर बुजुर्ग अधिक देर लाइन में खड़े नहीं हो सकते, इसलिए उनके लिए अलग लाइन की व्यवस्था होनी चाहिए। कोविड-19 के समय में सरकारी अस्पतालों में एक दिन बुजुर्गों के लिए नियत होना चाहिए, जिस दिन केवल बुजुर्गों को बिना किसी परेशान या भीड़ में घुसने के तत्काल उनकी स्वास्थ्य जांच हो और डॉक्टर उन्हें सही उपचार दे सकें। इसके साथ ही पुलिस का रवैया भी बुजुर्गों के प्रति सही होना चाहिए।

- दीपक गुप्ता एडवोकेट कहते हैं कि उम्र के इस मोड़ पर सरकार हर कदम पर साथ दे रही है। जरूरत केवल स्वास्थ्य सेवाओं में प्राथमिकता की है। बुजुर्गों को स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्राथमिकता के आधार पर मिलने चाहिए। हर बुजुर्ग को आयुष्मान योजना का लाभ मिले। यदि वे कहीं भी सफर पर या सार्वजनिक सेवा का लाभ लेने जाएं तो उन्हें प्राथमिकता मिले और संबंधित कर्मचारी उनके साथ मित्रवत व्यवहार करें। वहीं, इनकी पुत्रवधू चारू गुप्ता कहती हैं कि उनके ससुर उनके आइडल हैं, जिन्होंने खुद को समाज में साबित किया है। इन जैसे अन्य बुजुर्गों को भी हर जगह प्राथमिकता मिलनी चाहिए, ताकि उन्हें उम्र के इस मोड़ पर किसी तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।
- गुलजारी लाल गुलाटी कहते हैं कि बच्चे समाज की रीढ़ की हड्डी होते हैं, तो वृद्ध भी समाज की आंखें होती हैं, जिनके नजरिए और तजुर्बे से समाज आगे बढ़ता है। सरकार ने वृद्धों के लिए हालांकि बहुत सी योजनाएं शुरू कर रखी है, फिर भी हमारे शहर में एक लाइब्रेरी की कमी खलती है, जिसमें बुजुर्ग बैठकर अध्ययन कर अपना समय व्यतीत कर सकें। वहीं, समय-समय पर सीनियर सिटीजंस का हेल्थ चेकअप भी सरकार द्वारा कराया जाना चाहिए।
- अत्री सभा के अध्यक्ष मनमोहन बत्रा एडवोकेट और एसडी पब्लिक स्कूल की शिक्षिका उनकी पत्नी किरण बत्रा कहते हैं कि अब वे बुजुर्गों की श्रेणी में आ गए हैं। पहले जैसा काम नहीं कर सकते। ऐसे में जबकि बच्चे बाहर रहते हैं, तो बुजुर्गों को सभी तरह के किराए में, चाहे वह एयरलाइन हो, रोडवेज हो, रेलवे हो या अन्य क्षेत्र, सब जगह किराए में छूट मिलनी चाहिए। प्राथमिकता के आधार पर बुजुर्गों को हेल्थ केयर में एनरॉल करना चाहिए। हेल्थ डेस्क बनाकर सभी बुजुर्गों को समय-समय पर कॉल कर उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए। वहीं, सार्वजनिक सेवाओं में भी बुजुर्गों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
प्रोफेसर राजीव कुमार
प्रोफेसर राजीव कुमार- फोटो : MUZAFFARNAGAR
मनमोहन बत्रा, किरण बत्रा
मनमोहन बत्रा, किरण बत्रा- फोटो : MUZAFFARNAGAR
गुलजारी लाल गुलाटी
गुलजारी लाल गुलाटी- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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