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हरिद्वार से लौटने लगीं कांवड़ियों की टोली, सेक्टर, सबजोनल, जोनल मजिस्ट्रेट ने संभाला मोर्चा
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 12 Jul 2017 11:52 PM IST
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हरिद्वार से कांवड़ लेकर आते कांवड़िए।
- फोटो : अमर उजाला
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हरिद्वार से गंगाजल लेकर आने वाले कांवड़ियों की संख्या यहां तेजी से बढ़ रही है। कांवड़ मार्ग पर बम-बम का जयघोष गूंजने लगा है। सभी सेक्टर, सब जोनल और जोनल मजिस्ट्रेट अपनी ड्यूटी पर पहुंच गए हैं। प्रशासन ने शिवचौक पर कंट्रोल रूम बनाया है। शहर के मुख्य 24 स्थान सीसीटीवी के माध्यम से कंट्रोल रूम से जुड़े हैं।
कांवड़ यात्रा को लेकर जिले में एक उत्साह का माहौल बनता नजर आ रहा है। कांवड़ मार्गों पर तेजी के साथ कांवड़ियों की संख्या बढ़ने लगी है। कुछ शिविर भी प्रारंभ हो चुके हैं। इन शिविरों में कांवड़ियों की सेवा हो रही है। मार्ग पर कांवड़ियों की संख्या बढ़ते ही जिला प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। बुधवार से जिले के सभी 16 जोन के इंचार्जों ने अपना काम शुरू कर दिया है। 47 सब जोनल मजिस्ट्रेट और 83 सेक्टर मजिस्ट्रेट भी ड्यूटी पर पहुंच गए हैं।
किसी तरह की कोई घटना न हो, व्यवस्था में कोई कमी न रहे इस पर नजर रखी जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने भी ड्यूटी को संभाल लिया है। कांवड़ियों को किसी प्रकार की कोई बाधा न हो, इस प्रकार के इंतजाम किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने कांवड़ यात्रा में भारी भीड़ को दृष्टिगत रखते हुए शिवचौक को कंट्रोल रूम बनाया है। कंट्रोल रूम को पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है।
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यहां बैठे अधिकारी शहर के भीतर के सभी चौराहों, मुख्य मार्गों पर दृष्टि रख सकते हैं। 24 स्थलों को सीसीटीवी के माध्यम से जोड़ा गया है। इसी के साथ ही यदि कोई कांवड़ियां बिछड़ जाता है या किसी प्रकार की सूचना देनी है तो उसके लिए पूरे मार्ग पर लाउडस्पीकर लगाए गए हैं। यह भी शिवचौक से ही कंट्रोल होगा। डीएम जीएस प्रियदर्शी ने बताया कि कंट्रोल रूम का शुभारंभ बृहस्पतिवार को होगा।
डीएम-एसएसपी ने किया निरीक्षण
मुजफ्फरनगर। डीएम जीएस प्रियदर्शी और एसएसपी अनंत देव ने कांवड़ मार्ग का निरीक्षण किया। दोनों अधिकारियों ने कच्ची सड़क, घासमंडी, शिवचौक, मीनाक्षी चौक की व्यवस्थाओं को देखा। ड्यूटी पर तैनात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
कांवड़ यात्रा से शिवमय होता माहौल
खतौली। इस बार की कांवड़ यात्रा में हरिद्वार से लेकर जयपुर तक केसरिया रंग की अद्भुत छटा देखने को मिलेगी। श्रावण मास में चारों ओर ऊं, बम-बम भोले, हर-हर महादेव की गूंज सुनाई देने लगी है। लाखों शिवभक्त अपने ईष्ट भगवान भोलेशंकर का जलाभिषेक करने के लिए हरिद्वार, ऋषिकेश, गंगोत्री का आध्यात्मिक सफर तय कर गंगाजल लेकर तेजी से शिवालयों की ओर बढ़ने लगे हैं।
इनमें राजस्थान, हरियाणा और पंजाब की लंबी दूरी से आने वाले कांवड़ियां शामिल हैं। कांवड़ यात्रा को दुनिया की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्रा माना गया है। शिवरात्रि से एक दिन पूर्व हरिद्वार से लेकर जयपुर तक 494 किलोमीटर की लंबी दूरी के पग-पग पर केसरिया रंग में कांवड़ियां दिखाई देंगे। लंबी दूरी के कांवड़ियां शिवालयों की ओर बढ़ चले हैं। जबकि दिल्ली समेत आसपास के लाखों कांवड़ियां हरिद्वार की ओर बढ़ रहे हैं। दिल्ली-दून नेशनल हाईवे पूरी तरह धर्म के रंग में सराबोर हो चुका है। हर कोई शिव आराधना में लीन हो चला है।
कैसी-कैसी कांवड़ लाते हैं कांवड़िये
खड़ी कांवड़ : इस तरह की कांवड़ को प्रतिज्ञा के साथ लाने का नियम बना है। आराम अथवा नित्य क्रिया करने की दशा में भी इस कांवड़ को अपने किसी साथी के कंधों पर रखना होता है।
झूला कांवड़ : इस श्रेणी में आने वाली कांवड़ को आराम करने अथवा नित्य क्रिया के दौरान किसी पेड़ पर झुलाने की सहूलियत प्राप्त होती है।
डाक कांवड़ : निश्चित समय प्रतिज्ञा के साथ लाई जाने वाली कांवड़ डाक कांवड़ कहलाती है। इसमें अक्सर 15 से 20 कांवड़ियों का समूह क्रमवार दौड़ता रहता है।
बैठी कांवड़ : इस तरह की कांवड़ को सबसे सरल माना गया है। इसमें किसी तरह की पाबंदी नहीं मानी गई है। भक्त विश्राम के दौरान कांवड़ को पेड़ अथवा जमीन पर भी रख सकता है।
पवित्रता जरूरी: सभी तरह की कांवड़ को लाने के लिए पवित्रता बेहद अहम मानी गई है। नित्य क्रिया करने के बाद फिर से स्नान करने के बाद ही कांवड़ उठाई जा सकती है।
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कांवड़ यात्रा को लेकर जिले में एक उत्साह का माहौल बनता नजर आ रहा है। कांवड़ मार्गों पर तेजी के साथ कांवड़ियों की संख्या बढ़ने लगी है। कुछ शिविर भी प्रारंभ हो चुके हैं। इन शिविरों में कांवड़ियों की सेवा हो रही है। मार्ग पर कांवड़ियों की संख्या बढ़ते ही जिला प्रशासन भी अलर्ट हो गया है। बुधवार से जिले के सभी 16 जोन के इंचार्जों ने अपना काम शुरू कर दिया है। 47 सब जोनल मजिस्ट्रेट और 83 सेक्टर मजिस्ट्रेट भी ड्यूटी पर पहुंच गए हैं।
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किसी तरह की कोई घटना न हो, व्यवस्था में कोई कमी न रहे इस पर नजर रखी जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने भी ड्यूटी को संभाल लिया है। कांवड़ियों को किसी प्रकार की कोई बाधा न हो, इस प्रकार के इंतजाम किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन ने कांवड़ यात्रा में भारी भीड़ को दृष्टिगत रखते हुए शिवचौक को कंट्रोल रूम बनाया है। कंट्रोल रूम को पूरी तरह आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है।
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यहां बैठे अधिकारी शहर के भीतर के सभी चौराहों, मुख्य मार्गों पर दृष्टि रख सकते हैं। 24 स्थलों को सीसीटीवी के माध्यम से जोड़ा गया है। इसी के साथ ही यदि कोई कांवड़ियां बिछड़ जाता है या किसी प्रकार की सूचना देनी है तो उसके लिए पूरे मार्ग पर लाउडस्पीकर लगाए गए हैं। यह भी शिवचौक से ही कंट्रोल होगा। डीएम जीएस प्रियदर्शी ने बताया कि कंट्रोल रूम का शुभारंभ बृहस्पतिवार को होगा।
डीएम-एसएसपी ने किया निरीक्षण
मुजफ्फरनगर। डीएम जीएस प्रियदर्शी और एसएसपी अनंत देव ने कांवड़ मार्ग का निरीक्षण किया। दोनों अधिकारियों ने कच्ची सड़क, घासमंडी, शिवचौक, मीनाक्षी चौक की व्यवस्थाओं को देखा। ड्यूटी पर तैनात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
कांवड़ यात्रा से शिवमय होता माहौल
खतौली। इस बार की कांवड़ यात्रा में हरिद्वार से लेकर जयपुर तक केसरिया रंग की अद्भुत छटा देखने को मिलेगी। श्रावण मास में चारों ओर ऊं, बम-बम भोले, हर-हर महादेव की गूंज सुनाई देने लगी है। लाखों शिवभक्त अपने ईष्ट भगवान भोलेशंकर का जलाभिषेक करने के लिए हरिद्वार, ऋषिकेश, गंगोत्री का आध्यात्मिक सफर तय कर गंगाजल लेकर तेजी से शिवालयों की ओर बढ़ने लगे हैं।
इनमें राजस्थान, हरियाणा और पंजाब की लंबी दूरी से आने वाले कांवड़ियां शामिल हैं। कांवड़ यात्रा को दुनिया की सबसे लंबी पैदल धार्मिक यात्रा माना गया है। शिवरात्रि से एक दिन पूर्व हरिद्वार से लेकर जयपुर तक 494 किलोमीटर की लंबी दूरी के पग-पग पर केसरिया रंग में कांवड़ियां दिखाई देंगे। लंबी दूरी के कांवड़ियां शिवालयों की ओर बढ़ चले हैं। जबकि दिल्ली समेत आसपास के लाखों कांवड़ियां हरिद्वार की ओर बढ़ रहे हैं। दिल्ली-दून नेशनल हाईवे पूरी तरह धर्म के रंग में सराबोर हो चुका है। हर कोई शिव आराधना में लीन हो चला है।
कैसी-कैसी कांवड़ लाते हैं कांवड़िये
खड़ी कांवड़ : इस तरह की कांवड़ को प्रतिज्ञा के साथ लाने का नियम बना है। आराम अथवा नित्य क्रिया करने की दशा में भी इस कांवड़ को अपने किसी साथी के कंधों पर रखना होता है।
झूला कांवड़ : इस श्रेणी में आने वाली कांवड़ को आराम करने अथवा नित्य क्रिया के दौरान किसी पेड़ पर झुलाने की सहूलियत प्राप्त होती है।
डाक कांवड़ : निश्चित समय प्रतिज्ञा के साथ लाई जाने वाली कांवड़ डाक कांवड़ कहलाती है। इसमें अक्सर 15 से 20 कांवड़ियों का समूह क्रमवार दौड़ता रहता है।
बैठी कांवड़ : इस तरह की कांवड़ को सबसे सरल माना गया है। इसमें किसी तरह की पाबंदी नहीं मानी गई है। भक्त विश्राम के दौरान कांवड़ को पेड़ अथवा जमीन पर भी रख सकता है।
पवित्रता जरूरी: सभी तरह की कांवड़ को लाने के लिए पवित्रता बेहद अहम मानी गई है। नित्य क्रिया करने के बाद फिर से स्नान करने के बाद ही कांवड़ उठाई जा सकती है।