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लोहा फैक्ट्री में स्क्रैप की जांच करने पहुंची पुलिस
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Wed, 27 Jun 2018 12:13 AM IST
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खतौली में फैक्ट्री में जांच करने पहुंची पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरनगर के सरवट में कबाड़ी की दुकान में विस्फोट होने पर चार लोगों की मौत होने से प्रशासन स्क्रैप को लेकर सतर्क हो गया। पुलिस ने खतौली हाइवे पर स्थित एक लोहा फैक्ट्री में पहुंचकर स्क्रैप की जांच पड़ताल की। इसके अलावा पुलिस ने नगर में सभी कबाड़ियों की दुकानों तथा गैस वेल्डिंग की दुकानों को चिह्नित करना शुरू कर दिया है।
भंगेला पुलिस चौकी प्रभारी प्रदीप कुमार चीमा मंगलवार को हाइवे पर स्थित गुरदेव इंजीनियरिंग एंड इंस्डस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री में बाहर से आने वाले स्क्रैप की जांच करने पहुंची। दरोगा फैक्ट्री मालिक से बाहर से आने वाले स्क्रैप के बारे में पूछताछ की। मालिक ने बताया कि उनकी फैक्ट्री में सिर्फ शुगर मिलों से स्क्रैप आता है और मिलों का सामान बनाया जाता है।
अन्य बाहरी जगहों ने उनके यहां स्क्रैप नहीं आता है। दरोगा ने फैक्ट्री का निरीक्षण किया। इंस्पेक्टर अंबिका प्रसाद भारद्वाज ने शहर में हुई विस्फोट की घटना को गंभीरता से लेते हुए दरोगाओं से नगर के सभी कबाड़ियों और गैस वेल्डिंग की दुकानों को चिह्नित करके उनके यहां आने वाले स्क्रैप की जांच पड़ताल करने के निर्देश दिए। दरोगाओं ने चिह्नित करने का काम शुरू कर दिया है।
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खतौली में मिसाइलों का मिला था जखीरा
खतौली। गांव कढ़ली के जंगल में करीब 21 वर्ष पूर्व निष्प्रयोज्य मिसाइलों का जखीरा मिला था। उस वक्त ट्रक चालक इन मिसाइलों को जंगल में गिरकर फरार हो गया था। दो साल पूर्व बुढ़ाना रोड के नाले के अंदर निष्प्रयोज्य मिसाइल पड़ी मिली थी।
जिनको देखकर लोग घबरा गए थे। लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी थी। पुलिस ने नाले से करीब आधा दर्जन निष्प्रयोज्य मिसाइलों को निकलवाया था। मेरठ सेना की बम निरोधक दस्ते को बुलवाकर इनकी जांच पड़ताल कराई थी। जांच पड़ताल करने पर पता चला था कि सभी मिसाइल निष्प्रयोज्य निकली थी।
जानसठ में भी 10 साल पूर्व हुआ था विस्फोट
जानसठ। दस साल पूर्व कबाड़ में खरीदी गई निष्प्रयोज्य मिसाइल को कबाड़ी द्वारा तोड़ते हुए तेज धमाके के साथ विस्फोट हुआ था। धमाका इतना तेज था कि आसपास के मकान तक दहल गए थे। निष्प्रयोज्य मिसाइल को तोड़ते हुए कबाड़ी बाल बाल गच गया था। कबाड़ी की दुकान के आगे नाले से पुलिस ने आधा दर्जन निष्प्रयोज्य मिसाइल बरामद की थी।
पुलिस ने इन मिसाइलों को कई दिनों तक पानी में डालकर सुरक्षित स्थान पर रखा था। मेरठ सेना के बम निरोधक दस्ते ने इन निष्प्रयोज्य मिसाइलों को खादर क्षेत्र में सुनसान जगहों पर ले जाकर मशीनों से चलाकर देखी थीं। इनमें से कई मिसाइल चल भी गई थी, लेकिन उनकी क्षमता इतनी तीव्र नहीं थी। जो काफी दूर तक मार कर सके।
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भंगेला पुलिस चौकी प्रभारी प्रदीप कुमार चीमा मंगलवार को हाइवे पर स्थित गुरदेव इंजीनियरिंग एंड इंस्डस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री में बाहर से आने वाले स्क्रैप की जांच करने पहुंची। दरोगा फैक्ट्री मालिक से बाहर से आने वाले स्क्रैप के बारे में पूछताछ की। मालिक ने बताया कि उनकी फैक्ट्री में सिर्फ शुगर मिलों से स्क्रैप आता है और मिलों का सामान बनाया जाता है।
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अन्य बाहरी जगहों ने उनके यहां स्क्रैप नहीं आता है। दरोगा ने फैक्ट्री का निरीक्षण किया। इंस्पेक्टर अंबिका प्रसाद भारद्वाज ने शहर में हुई विस्फोट की घटना को गंभीरता से लेते हुए दरोगाओं से नगर के सभी कबाड़ियों और गैस वेल्डिंग की दुकानों को चिह्नित करके उनके यहां आने वाले स्क्रैप की जांच पड़ताल करने के निर्देश दिए। दरोगाओं ने चिह्नित करने का काम शुरू कर दिया है।
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खतौली में मिसाइलों का मिला था जखीरा
खतौली। गांव कढ़ली के जंगल में करीब 21 वर्ष पूर्व निष्प्रयोज्य मिसाइलों का जखीरा मिला था। उस वक्त ट्रक चालक इन मिसाइलों को जंगल में गिरकर फरार हो गया था। दो साल पूर्व बुढ़ाना रोड के नाले के अंदर निष्प्रयोज्य मिसाइल पड़ी मिली थी।
जिनको देखकर लोग घबरा गए थे। लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी थी। पुलिस ने नाले से करीब आधा दर्जन निष्प्रयोज्य मिसाइलों को निकलवाया था। मेरठ सेना की बम निरोधक दस्ते को बुलवाकर इनकी जांच पड़ताल कराई थी। जांच पड़ताल करने पर पता चला था कि सभी मिसाइल निष्प्रयोज्य निकली थी।
जानसठ में भी 10 साल पूर्व हुआ था विस्फोट
जानसठ। दस साल पूर्व कबाड़ में खरीदी गई निष्प्रयोज्य मिसाइल को कबाड़ी द्वारा तोड़ते हुए तेज धमाके के साथ विस्फोट हुआ था। धमाका इतना तेज था कि आसपास के मकान तक दहल गए थे। निष्प्रयोज्य मिसाइल को तोड़ते हुए कबाड़ी बाल बाल गच गया था। कबाड़ी की दुकान के आगे नाले से पुलिस ने आधा दर्जन निष्प्रयोज्य मिसाइल बरामद की थी।
पुलिस ने इन मिसाइलों को कई दिनों तक पानी में डालकर सुरक्षित स्थान पर रखा था। मेरठ सेना के बम निरोधक दस्ते ने इन निष्प्रयोज्य मिसाइलों को खादर क्षेत्र में सुनसान जगहों पर ले जाकर मशीनों से चलाकर देखी थीं। इनमें से कई मिसाइल चल भी गई थी, लेकिन उनकी क्षमता इतनी तीव्र नहीं थी। जो काफी दूर तक मार कर सके।