अमर उजाला पड़ताल: बेटियां चली गईं ससुराल, बाबुल को सरकारी मदद का इंतजार, दफ्तर में काट रहे चक्कर
सरकार ने श्रमिकों के उत्थान के लिए जनकल्याण की 50 से अधिक योजनाएं चलाई हैं। चाहे वह छात्रवृति योजना हो या फिर बालिका मदद योजना। किसी भी योजना का लाभ श्रमिकों को नहीं मिल सका है। अब वे दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
विस्तार
श्रमिकों को आर्थिक मदद की योजनाएं लापरवाही की भेंट चढ़ रही हैं। बेटी के जन्म से लेकर विवाह तक की योजना, अंतिम संस्कार से लेकर श्रमिक को दी जाने वाली मृत्यु उपरांत की मदद, श्रमिकों के बच्चों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति जैसी सरकार की जन कल्याण की योजनाएं यहां दम तोड़ रही हैं। हालत यह कि बेटियां शादी के बाद ससुराल चली गईं, लेकिन सरकारी मदद के लिए उनके पिता कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
तीन साल से पांच हजार श्रमिकों के आवेदन लंबित हैं। सरकार ने श्रमिकों के उत्थान के लिए जनकल्याण की 50 से अधिक योजनाएं चलाई हैं। हालत यह है कि जिन श्रमिकों की मौत हो जाती है और उनके परिवारों को भी विभाग से दी जाने वाली आर्थिक मदद नहीं मिल रही है।
रोनी हरजीपुर गांव की खुशी और वाणी के श्रमिक पिता ने संत रविदास छात्रवृत्ति योजना में डेढ़ साल पहले आवेदन किया था। बेटियां पास होकर अन्य कक्षाओं में पहुंच गईं, लेकिन योजना का लाभ नहीं मिला।
यह भी पढ़ें: बड़ा हादसा: हरिद्वार की लोहा फैक्टरी की भट्टी में डाले गए सरिया में आया उबाल, मुजफ्फरनगर के सात श्रमिक झुलसे
दो साल बाद भी नहीं मिले ढाई लाख
नंगला पिथौरा की अंजलि के पति श्रमिक नरेंद्र की ढाई वर्ष पूर्व मौत हो चुकी है। आवेदन के बाद श्रमिक की अंत्येष्टि के लिए मिलने वाली 25 हजार की आर्थिक मदद उसे मिली, लेकिन मौत के बाद मिलने वाली ढाई लाख रुपये की मदद आज तक नहीं मिली है। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य रहे जगदीश पांचाल भी विभागीय अधिकारियों से मिले, लेकिन अफसरों पर कोई असर नहीं हुआ।
शादी हो गई कब मिलेगी मदद
गांव न्यामू के सुरेंद्र ने बेटी की शादी के लिए 28 नवंबर 2021 में आवेदन किया था। बेटी की शादी हो चुकी है। आवेदन के बाद ये यह भी विभाग के चक्कर काट रहे हैं।
बालिका मदद योजना का उड़ रहा मजाक
गांव शेरपुर के सलीम ने बताया कि उसने चार जनवरी 2021 को उसने बालिका मदद योजना में आवेदन किया था। वह मजदूरी करते हैं और विभाग में उनका रजिस्ट्रेशन है। उन्हें बताया गया था कि योजना में 15 हजार रुपये मिलेंगे।
आरोप है कि एक कर्मचारी ने रिपोर्ट लगवाने के उससे 1200 रुपये लिए थे और कहा था यह फीस हम सबसे लेते हैं। ढाई वर्ष हो गए अभी तक पैसा नहीं मिला है। जब भी आते हैं तो बताया जाता है कि पैसा पास हो गया है।
बाछूराम पूछ रहा हमारा क्या कसूर
बुढ़ाना के गांव उकावली के बाछुराम ने 25 फरवरी 2022 में बेटी होने पर मदद के लिए आवेदन किया था। श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने दो माह बाद 25 अप्रैल को उनके आवेदन पर योजना का लाभ देने की संस्तुति कर दी।
जब पैसा नहीं आया तो इंटरनेट से आवेदन निकलवाया गया तो उस पर लिखा आया कि आवेदन श्रम प्रवर्तन अधिकारी स्तर पर लंबित है, जबकि 25 अप्रैल 2022 की इंटरनेट की रिपोर्ट भी हमारे पास है। अधिकारी कोई उत्तर नहीं देते हैं। 15 बार से अधिक वह यहां कार्यालय पर आ चुका है।
बेटी की शादी हो चुकी मदद नहीं आई
रामपुरी के राकेश पांचाल मिस्त्री का कार्य करते हैं। श्रम विभाग की विवाह योजना में ढाई साल पहले आवेदन किया था। बेटी की शादी हो चुकी है। राकेश दो साल से लगातार दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी की योजना का लाभ उसे नहीं मिल पाया है।
हमारे यहां पांच हजार आवेदन लंबित
सहायक श्रमायुक्त राजकुमार का कहना है कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही चार्ज लिया है। उनसे पहले के चार हजार से अधिक आवेदन पेंडिंग है। हमारे पास स्टाफ कम हैं, कैसे काम को निपटाएं। इस समय पांच हजार आवेदन लंबित हैं।