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Muzaffarnagar News: युवा वैज्ञानिकाें के रॉकेट की हुई लाॅन्चिंग
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एसडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में लैब का निरीक्षण करते हुए कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार-स्त्रोत स्वयं
मुजफ्फरनगर। रविवार को एसडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में प्रदेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अनिल कुमार ने स्पेस एंड रोबोटिक्स लैब का उद्घाटन किया। मंत्री की मौजदूगी में कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा बनाए गए रॉकेट एसडीसीईटी सैट-1 की सफल लांचिंग हुई। राॅकेट ने 3.5 किमी की दूरी तय की तो तालियों की गडगडाहट से परिसर गूंज उठा। मंत्री ने कहा कि युवा वैज्ञानिक हमारे देश की शान हैं।
जानसठ रोड स्थित कालेज में इसरो से मान्यता प्राप्त इंडोप्लेनेटएक्स के वैज्ञानिकों की देखरेख में रॉकेट को छोड़ा गया। समझा जा रहा था कि रॉकेट 2 किलोमीटर ऊंचाई तक जाएगा लेकिन वह करीब 3.5 किलोमीटर ऊंचाई तक पहुंचा। रॉकेट को पैराशूट के सहारे मानवरहित सुरक्षित क्षेत्र में उतारा गया।
इंडोप्लेनेटएक्स के सीईओ अंकित कुमार ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने कड़ी मेहनत की थी। उनकी लगन और प्रयास के साथ रॉकेट के डिजाइन और निर्माण का कार्य पूरा हुआ। कार्यक्रम में मौजूद प्रदेश के मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि छात्रों ने यह साबित किया कि वे केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वास्तविक जीवन में भी अपनी वैज्ञानिक सोच को साकार कर सकते हैं। उनका यह प्रयास और सोच तारीफ के काबिल है। उन्होंने दिखा दिया कि शहर सकारात्मक रूप में बदल रहा है।
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इस मौके पर कॉलेज प्रबंध समिति के सचिव अनुभव कुमार, शिक्षक मनोज, प्रगति के निर्देशन में छात्र साकिब, समर्थ और उत्तम शर्मा ने सक्रिय भूमिका निभाई है। कार्यक्रम में नगर पालिकाध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप, निरंकार स्वरूप, हरी भूषण गुप्ता, सीके जैन, विनोद कुमार, आकाश कुमार, गौरव स्वरूप, अंकिता कुमार आदि उपस्थित रहे।
ईंधन और इंजन के हुए अनगिनत परीक्षण
प्रोजेक्ट में सहायक शिक्षिका प्रगति ने बताया कि पिछले छह महीने से प्रोजेक्ट को लांच करने की तैयारी चल रही थी। ईंधन और इंजन के कई बार टेस्ट किए गए। चार बार स्टेटिक टेस्ट किए गए जिसमें ईंधन और हवा के प्रेशर को जांचा गया। लांच से दो दिन पहले चल रही तेज हवाओं के कारण कोडिंग में बदलाव किए गए।
कोडिंग के जरिए पैराशूट को किया सेट
रॉकेट के उड़ान भरने से पहले पैराशूट को कोडिंग के जरिए सेट किया गया। तय ऊंचाई से थोडा ऊपर जाने के बाद पैराशूट ऑटोमेटिक खुलकर रॉकेट के साथ नीचे आया। रॉकेट का वजन लगभग साढ़े तीन किलो था। इसलिए संभावित ऊंचाई पर जाकर गिरने से खतरा पैदा हो सकता था। इसलिए कोडिंग के जरिए पैराशूट सेट किया गया।
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जानसठ रोड स्थित कालेज में इसरो से मान्यता प्राप्त इंडोप्लेनेटएक्स के वैज्ञानिकों की देखरेख में रॉकेट को छोड़ा गया। समझा जा रहा था कि रॉकेट 2 किलोमीटर ऊंचाई तक जाएगा लेकिन वह करीब 3.5 किलोमीटर ऊंचाई तक पहुंचा। रॉकेट को पैराशूट के सहारे मानवरहित सुरक्षित क्षेत्र में उतारा गया।
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इंडोप्लेनेटएक्स के सीईओ अंकित कुमार ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने कड़ी मेहनत की थी। उनकी लगन और प्रयास के साथ रॉकेट के डिजाइन और निर्माण का कार्य पूरा हुआ। कार्यक्रम में मौजूद प्रदेश के मंत्री अनिल कुमार ने कहा कि छात्रों ने यह साबित किया कि वे केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वास्तविक जीवन में भी अपनी वैज्ञानिक सोच को साकार कर सकते हैं। उनका यह प्रयास और सोच तारीफ के काबिल है। उन्होंने दिखा दिया कि शहर सकारात्मक रूप में बदल रहा है।
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इस मौके पर कॉलेज प्रबंध समिति के सचिव अनुभव कुमार, शिक्षक मनोज, प्रगति के निर्देशन में छात्र साकिब, समर्थ और उत्तम शर्मा ने सक्रिय भूमिका निभाई है। कार्यक्रम में नगर पालिकाध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप, निरंकार स्वरूप, हरी भूषण गुप्ता, सीके जैन, विनोद कुमार, आकाश कुमार, गौरव स्वरूप, अंकिता कुमार आदि उपस्थित रहे।
ईंधन और इंजन के हुए अनगिनत परीक्षण
प्रोजेक्ट में सहायक शिक्षिका प्रगति ने बताया कि पिछले छह महीने से प्रोजेक्ट को लांच करने की तैयारी चल रही थी। ईंधन और इंजन के कई बार टेस्ट किए गए। चार बार स्टेटिक टेस्ट किए गए जिसमें ईंधन और हवा के प्रेशर को जांचा गया। लांच से दो दिन पहले चल रही तेज हवाओं के कारण कोडिंग में बदलाव किए गए।
कोडिंग के जरिए पैराशूट को किया सेट
रॉकेट के उड़ान भरने से पहले पैराशूट को कोडिंग के जरिए सेट किया गया। तय ऊंचाई से थोडा ऊपर जाने के बाद पैराशूट ऑटोमेटिक खुलकर रॉकेट के साथ नीचे आया। रॉकेट का वजन लगभग साढ़े तीन किलो था। इसलिए संभावित ऊंचाई पर जाकर गिरने से खतरा पैदा हो सकता था। इसलिए कोडिंग के जरिए पैराशूट सेट किया गया।

एसडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में लैब का निरीक्षण करते हुए कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार-स्त्रोत स्वयं

एसडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में लैब का निरीक्षण करते हुए कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार-स्त्रोत स्वयं