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सड़कें वही, दोगुने से अधिक हो गए वाहन

Thu, 19 Mar 2020 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 19 Mar 2020 12:18 AM IST
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Roads more than double the earlier ones
सड़कें पहले वाली, दोगुने से अधिक हो गए वाहन
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मुजफ्फरनगर। ट्रैफिक जाम से तमाम प्रयासों के बावजूद निजात नहीं मिल पा रही है। शहर के हर चौराहे व मार्ग पर दिनभर जाम की स्थिति रहती है। इसका बड़ा कारण लगातार बढ़ती वाहनों की संख्या है, जो पिछले पांच साल में दोगुने से भी अधिक हो चुकी है।
शहर क्षेत्र में आबादी के साथ ही जरूरी संसाधन घटते जा रहे हैं। शहर की सड़कों के चौड़ीकरण की गुंजाइश लगभग खत्म हो चुकी है, लेकिन वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एआरटीओ प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच साल में ही पंजीकृत वाहनों (बसें, बाइकें व टैक्सी) की संख्या दोगुना से अधिक हो चुकी है। सड़कें, वाहनों का दबाव नहीं झेल पा रहीं हैं। इसका नतीजा हर दिन जाम के रूप में लोगों को भुगतना पड़ रहा है। शहर का मीनाक्षी चौक हो या नावल्टी चौक, शिवचौक हो या प्रकाश चौक, कमोबेश हर जगह का हाल यही है।
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---- पांच साल में कुछ यूं बढ़े पंजीकृत वाहन
वाहन ---- वर्ष 2015 --- वर्ष 2019
बसें ------ 376 --------- 778
टेंपो ------- 562 ---------- 948
टैक्सी ------538 ---------- 922
ट्रक ------ 4,282 ------- 9,744
कार ----- 10,114 ------ 14,450
बाइक ---- 1,02,211 --- 2,50,416
ई-रिक्शाएं- 4,772
-------- सिस्टम की नाकामी दे रही जुगाड़ को बढ़ावा (फोटो )
मुजफ्फरनगर। शहर की सड़कों पर जुगाड़ वाहन (इंजन लगे रेहड़े) की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। शहर क्षेत्र में भारी-भरकम सामान को ले जाने के लिए इन जुगाड़ वाहनों का इस्तेमाल धड़ल्ले से किया जा रहा है, जिनके आगे-पीछे कई फीट तक सरिये, एंगल व अन्य सामान निकला रहता है, जो राहगीरों के लिए भी खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद पुलिस-प्रशासन है कि इन जुगाड़ वाहनों पर लगाम लगा पाने में पूरी तरह सुस्त है। सिस्टम की नाकामी ही है कि इन जुगाड़ वाहनों में लगाए जाने वाले दुपहिया वाहन चोरी के हैं या नहीं, इसकी भी जांच कभी नहीं हो पाती। अधिकांश रेहड़ों में लगने वाले दुपहिया वाहनों के इंजन कबाड़ियों से तीन से पांच हजार रुपये में खरीदे जाते हैं, लेकिन पुलिस-प्रशासन कभी पड़ताल नहीं करता कि आखिर कबाड़ियों के पास ये इंजन आते कहां से हैं ?
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