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हादसों का खतरा, भोले के भरोसे कांवड़िये
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Sun, 29 Jul 2018 12:52 AM IST
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निर्माणाधीन अंडर पास से गुजरते कांवड़िये।
- फोटो : अमर उजाला
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हरिद्वार से गंगा जल लेकर आने वाले कांवड़ियों की संख्या बढ़ने लगी है। कांवड़ मार्ग की तैयारियां इस बार भोले के भरोसे हैं। मुख्य मार्ग बझेड़ी का रेलवे अंडर पास प्रशासन पूरा नहीं करा पाया है। यहां के हालात इतने खराब हैं कि किसी बड़े हादसे को रोका नहीं जा सकेगा। शहर में कांवड़ मार्ग में सड़क पर गड्ढे, उखड़ी सड़कें, मार्ग का डिविजन नहीं होना और जगह-जगह कूडे़ के ढेर प्रशासन की कार्य प्रणाली को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं।
उत्तर भारत के प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा महोत्सव की भव्यता और अटूट परंपरा के दृष्टिगत सीएम योगी ने शिवभक्त कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा कराने की घोषणा की है। भक्तिभाव में डूबे कांवड़िया हर की पैड़ी से गंगाजल लेकर अपने क्षेत्र के शिवालयों की ओर बढ़ने लगे हैं। अनुमान के मुताबिक जिले से करीब चार करोड़ कांवड़ियां निकलेंगे। विडंबना यह है कि बीते एक दशक में पहली बार प्रशासन की लचर व्यवस्था ने कांवड़ यात्रा को राम भरोसे छोड़ दिया है। प्रशासन की अभी तक पूरी कसरत पत्रावलियों और बैठकों में सिमटी हुई है।
अंडर पास पर हादसे का खतरा
कांवड़ यात्रा के मुख्य मार्ग सिसौना से शिवचौक के बीच बझेड़ी में रेलवे का अधूरा अंडरपास बड़े हादसे का संकेत दे रहा है। शासन ने मई माह में ही प्रशासन को कांवड़ यात्रा की व्यवस्था के निर्देश दे दिए थे, मगर अफसरों ने लेटलतीफी की। अंडरपास में भरा पानी निकाल दिया गया है, लेकिन सीमेंटड रास्ते पर ज्यादा ढलान है तथा कीचड़ भी फैली है।
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कैसे पैदल यात्रा में पैरों में पड़े छालों के साथ कांवड़ियां इस रास्ते से चल पाएंगे यह भविष्य तय करेगा। अंडर पास के बराबर की दीवारों पर लंबे सरियों के बीम बने हैं। बराबर की पटरी से गुजरना भी कांवड़ियों के लिए खतरे से खाली नहीं है। हजारों की भीड़ का हुजूम यदि बहक गया तो सरिये जान लेवा बनेंगे। लगातार बारिश के कारण अंडरपास के आस-पास की पटरी की मिट्टी कमजोर हो चुकी है। अंडर पास से निकाला गया पानी गांव बझेडी की बस्तियों में भर गया है। पानी निकासी को ग्रामीण जुटे हैं।
स्पीड में ट्रेनें और खुला फाटक
अंडर पास के निर्माण की वजह रेलवे प्रशासन ने बझेडी के रेलवे फाटक को खत्म कर दिया था। करोड़ों कांवड़ियां लय में यहां से निकलेगा तो ट्रैक पर दौड़ती ट्रेनों को कौन संभालेगा। हालांकि फिलहाल एसएसपी अनंतदेव ने फाटक के पास एक दरोगा और दो सिपाहियों की ड्यूटी लगाई है। दिल्ली-अमृतसर रेलवे लाइन पर एक्सप्रेस और पैसेंजर गाड़ियों की भरमार है। ऐसी स्थिति में फाटक पर कांवड़ियों को संभालना आसान नहीं होगा।
नहीं बना कंट्रोल रूम, बेरिकेडिंग भी अधूरी
शिव चौक स्थित गोल मार्किट के ऊपरी तल पर कंट्रोल रूम बनाकर सीसीटीवी के जरिये कानून व्यवस्था के लिए कांवड़ यात्रा पर निगाहें रखी जाती हैं। कंट्रोल रूम का काम संचालित नहीं हो पाया है। नगरीय क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव से जुड़ी बस्ती, मोहल्लों की गलियों के बाहर बेरिकेडिंग नहीं लग सकती है।
सरवट गेट से शिवचौक तक लगाई गई बेरिकेडिंग में लोहे के पाइपों का प्रयोग किया गया है। बारिश के दौरान यदि गलती से पाइपों में करंट दौड़ गया तो स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। अभी तक बल्लियों की बेरिकेडिंग की जाती रही है। बिजली के खंभों पर सुरक्षा के लिए जो पन्नी चिपकाई जानी है, वो काम भी लेटलतीफी का शिकार है।
गड्ढों की सड़क से गुजरते कांवड़िये
मुजफ्फरनगर। सरकार का गड्ढा मुक्त सड़कों का दावा कांवड़ यात्रा जैसे अहम पर्व में भी फेल हो गया है। एनएच-58 से कांवडियां जैसे ही सिसौना से शहर में एंट्री का सड़क मार्ग पकड़ते हैं, वैसे ही गड्ढों से जूझना पड़ रहा है। लोनिवि, एमडीए और पालिका के अधिकारी सड़कों के गड्ढे क्यों नहीं भर पाये, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। कांवड़ मार्ग पर आनन-फानन में जो सड़क बनाई गई, उसके मेटिरियल की क्वालिटी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई हैं। एक सप्ताह में ही सड़क की रोड़ियां कांवडियों के पैरों को छलनी कर रही हैं।
लगे हैं कूड़े के ढेर, सांस लेना दूभर
मुजफ्फरनगर। कांवड़ मार्ग पर सरकार का स्वच्छता अभियान भी चिढ़ा रहा है। मदीना चौक पर नाले के स्लैब पालिका प्रशासन ने हटा दिए। कूड़ा और मलबा सड़क पर आ गया। बारिश में कैसे कूड़ा हटेगा और नालों की सफाई होगी। सरवट से अहिल्या बाई चौक तथा रुडकी रोड से सूजडू चुंगी तक सड़क के दोनो ओर कूडे के ढेर लगे हैं।
बदबू के कारण रास्ते पर चलना कांवड़ियों के लिए दुखदाई बना हैं। कई जगहों पर पालतू पशुओं के गोबर के ढेर लगे हैं। सरवट रोड पर कब्रिस्तान की दीवार गिर गई है। ग्रामीणों ने डीएम से गुहार लगाई, मगर प्रशासन ने दीवार बनाने से इंकार कर दिया। कांवड़ मार्ग पर सुरक्षा के लिहाज से दीवार महत्वपूर्ण है।
डायवर्जन का मुख्य मार्ग अधर में
मुजफ्फरनगर। मीनाक्षी चौक से महावीर चौक के बीच जल निगम ने अमृत योजना के अंतर्गत पाइप लाइन बिछाई थी, लेकिन चार माह से यह सड़क नहीं बनी है। जगह-जगह मिट्टी फैली है, गड्ढे अस्थायी तरीके से भरे गए हैं। कांवड़ यात्रा में रूट डायवर्जन में आर्य समाज रोड ही मुख्य मार्ग है।
एक माह पहले डीएम के साथ अंडर पास और कांवड़ मार्ग का मौके पर निरीक्षण किया था। प्रशासन को बीस दिन पहले सभी कार्य पूरे करा देना चाहिए था। यह घोर लापरवाही है। पूरे स्थिति की जानकारी सीएम योगी आदित्यनाथ को लिखित भेजी जायेगी।
- कपिल देव अग्रवाल, शहर विधायक।
कांवड़ यात्रा में करोड़ों शिवभक्त नगर में आते हैं। बझेड़ी में बने अंडरपास और रेलवे फाटक की सुरक्षित व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रशासन की है। प्रदेश सरकार की निगाहें कांवड़ यात्रा की सुरक्षा और शिव भक्तों की सुविधा पर है। ऐसे में लापरवाही होना चिंताजनक है। इस संबंध में प्रशासन से वार्ता की जाएगी।
- डॉ संजीव बालियान, सांसद।
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उत्तर भारत के प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा महोत्सव की भव्यता और अटूट परंपरा के दृष्टिगत सीएम योगी ने शिवभक्त कांवड़ियों पर हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा कराने की घोषणा की है। भक्तिभाव में डूबे कांवड़िया हर की पैड़ी से गंगाजल लेकर अपने क्षेत्र के शिवालयों की ओर बढ़ने लगे हैं। अनुमान के मुताबिक जिले से करीब चार करोड़ कांवड़ियां निकलेंगे। विडंबना यह है कि बीते एक दशक में पहली बार प्रशासन की लचर व्यवस्था ने कांवड़ यात्रा को राम भरोसे छोड़ दिया है। प्रशासन की अभी तक पूरी कसरत पत्रावलियों और बैठकों में सिमटी हुई है।
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अंडर पास पर हादसे का खतरा
कांवड़ यात्रा के मुख्य मार्ग सिसौना से शिवचौक के बीच बझेड़ी में रेलवे का अधूरा अंडरपास बड़े हादसे का संकेत दे रहा है। शासन ने मई माह में ही प्रशासन को कांवड़ यात्रा की व्यवस्था के निर्देश दे दिए थे, मगर अफसरों ने लेटलतीफी की। अंडरपास में भरा पानी निकाल दिया गया है, लेकिन सीमेंटड रास्ते पर ज्यादा ढलान है तथा कीचड़ भी फैली है।
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कैसे पैदल यात्रा में पैरों में पड़े छालों के साथ कांवड़ियां इस रास्ते से चल पाएंगे यह भविष्य तय करेगा। अंडर पास के बराबर की दीवारों पर लंबे सरियों के बीम बने हैं। बराबर की पटरी से गुजरना भी कांवड़ियों के लिए खतरे से खाली नहीं है। हजारों की भीड़ का हुजूम यदि बहक गया तो सरिये जान लेवा बनेंगे। लगातार बारिश के कारण अंडरपास के आस-पास की पटरी की मिट्टी कमजोर हो चुकी है। अंडर पास से निकाला गया पानी गांव बझेडी की बस्तियों में भर गया है। पानी निकासी को ग्रामीण जुटे हैं।
स्पीड में ट्रेनें और खुला फाटक
अंडर पास के निर्माण की वजह रेलवे प्रशासन ने बझेडी के रेलवे फाटक को खत्म कर दिया था। करोड़ों कांवड़ियां लय में यहां से निकलेगा तो ट्रैक पर दौड़ती ट्रेनों को कौन संभालेगा। हालांकि फिलहाल एसएसपी अनंतदेव ने फाटक के पास एक दरोगा और दो सिपाहियों की ड्यूटी लगाई है। दिल्ली-अमृतसर रेलवे लाइन पर एक्सप्रेस और पैसेंजर गाड़ियों की भरमार है। ऐसी स्थिति में फाटक पर कांवड़ियों को संभालना आसान नहीं होगा।
नहीं बना कंट्रोल रूम, बेरिकेडिंग भी अधूरी
शिव चौक स्थित गोल मार्किट के ऊपरी तल पर कंट्रोल रूम बनाकर सीसीटीवी के जरिये कानून व्यवस्था के लिए कांवड़ यात्रा पर निगाहें रखी जाती हैं। कंट्रोल रूम का काम संचालित नहीं हो पाया है। नगरीय क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव से जुड़ी बस्ती, मोहल्लों की गलियों के बाहर बेरिकेडिंग नहीं लग सकती है।
सरवट गेट से शिवचौक तक लगाई गई बेरिकेडिंग में लोहे के पाइपों का प्रयोग किया गया है। बारिश के दौरान यदि गलती से पाइपों में करंट दौड़ गया तो स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। अभी तक बल्लियों की बेरिकेडिंग की जाती रही है। बिजली के खंभों पर सुरक्षा के लिए जो पन्नी चिपकाई जानी है, वो काम भी लेटलतीफी का शिकार है।
गड्ढों की सड़क से गुजरते कांवड़िये
मुजफ्फरनगर। सरकार का गड्ढा मुक्त सड़कों का दावा कांवड़ यात्रा जैसे अहम पर्व में भी फेल हो गया है। एनएच-58 से कांवडियां जैसे ही सिसौना से शहर में एंट्री का सड़क मार्ग पकड़ते हैं, वैसे ही गड्ढों से जूझना पड़ रहा है। लोनिवि, एमडीए और पालिका के अधिकारी सड़कों के गड्ढे क्यों नहीं भर पाये, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। कांवड़ मार्ग पर आनन-फानन में जो सड़क बनाई गई, उसके मेटिरियल की क्वालिटी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई हैं। एक सप्ताह में ही सड़क की रोड़ियां कांवडियों के पैरों को छलनी कर रही हैं।
लगे हैं कूड़े के ढेर, सांस लेना दूभर
मुजफ्फरनगर। कांवड़ मार्ग पर सरकार का स्वच्छता अभियान भी चिढ़ा रहा है। मदीना चौक पर नाले के स्लैब पालिका प्रशासन ने हटा दिए। कूड़ा और मलबा सड़क पर आ गया। बारिश में कैसे कूड़ा हटेगा और नालों की सफाई होगी। सरवट से अहिल्या बाई चौक तथा रुडकी रोड से सूजडू चुंगी तक सड़क के दोनो ओर कूडे के ढेर लगे हैं।
बदबू के कारण रास्ते पर चलना कांवड़ियों के लिए दुखदाई बना हैं। कई जगहों पर पालतू पशुओं के गोबर के ढेर लगे हैं। सरवट रोड पर कब्रिस्तान की दीवार गिर गई है। ग्रामीणों ने डीएम से गुहार लगाई, मगर प्रशासन ने दीवार बनाने से इंकार कर दिया। कांवड़ मार्ग पर सुरक्षा के लिहाज से दीवार महत्वपूर्ण है।
डायवर्जन का मुख्य मार्ग अधर में
मुजफ्फरनगर। मीनाक्षी चौक से महावीर चौक के बीच जल निगम ने अमृत योजना के अंतर्गत पाइप लाइन बिछाई थी, लेकिन चार माह से यह सड़क नहीं बनी है। जगह-जगह मिट्टी फैली है, गड्ढे अस्थायी तरीके से भरे गए हैं। कांवड़ यात्रा में रूट डायवर्जन में आर्य समाज रोड ही मुख्य मार्ग है।
एक माह पहले डीएम के साथ अंडर पास और कांवड़ मार्ग का मौके पर निरीक्षण किया था। प्रशासन को बीस दिन पहले सभी कार्य पूरे करा देना चाहिए था। यह घोर लापरवाही है। पूरे स्थिति की जानकारी सीएम योगी आदित्यनाथ को लिखित भेजी जायेगी।
- कपिल देव अग्रवाल, शहर विधायक।
कांवड़ यात्रा में करोड़ों शिवभक्त नगर में आते हैं। बझेड़ी में बने अंडरपास और रेलवे फाटक की सुरक्षित व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रशासन की है। प्रदेश सरकार की निगाहें कांवड़ यात्रा की सुरक्षा और शिव भक्तों की सुविधा पर है। ऐसे में लापरवाही होना चिंताजनक है। इस संबंध में प्रशासन से वार्ता की जाएगी।
- डॉ संजीव बालियान, सांसद।