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जिंदगी की जरूरत बन गई साईकिल की सवारी

Wed, 02 Jun 2021 12:37 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Jun 2021 12:37 AM IST
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Riding a bicycle has become a necessity of life
जिंदगी की जरूरत बन गई साइकिल की सवारी
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मुजफ्फरनगर/चरथावल। बचपन में साइकिल चलाने का शौक सबको अच्छा लगता है। बच्चों का किशोरावस्था तक ही साइकिल से मोहभंग हो जाता है। वर्तमान में काफी संख्या में अभी भी बुजुर्ग सेहत के लिए साइकिल चलाना ही पसंद करते हैं। माना जाता है कि साइकिल की नियमित सवारी इम्यूनिटी बढ़ाती है। जटिल बीमारियां घर नहीं करती। दिनभर शरीर ताजगी और स्फूर्ति से भरा रहता है। पिछले वर्ष कोरोना काल में स्वस्थ रहने के लिए युवाओं ने भी साइकिल खरीदी थी।
बचपन में सीखी साइकिल आज बनी जरूरत
मुथरा गांव के नानू शहर में एक निजी कंपनी में गार्ड की नौकरी करते हैं। इससे पहले होमगार्ड रह चुके हैं। कहते है कि मुद्दत से साइकिल का साथ रहा और रिटायर हो गए। जिंदगी के 60 बसंत देखने के बाद आज भी उन्हें गांव से मुजफ्फरनगर तक साइकिल की सवारी करना लुभाता है। रोजाना 35 किलोमीटर की साइकिल चलाकर ड्यूटी करना उनका शगल बन गया है। बकौल उनके कक्षा 10 में साइकिल सीखी। पहले चरथावल साइकिल से पढ़ने जाता था। आज जिंदगी की जरूरत बन गई है। पेट्रो पदार्थों के दाम में बढ़ोतरी का उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता।
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पांच दशक से साइकिल चला रहें जनेश्वर
कांहाहेड़ी निवासी जनेश्वर शर्मा (63) छोटी जोत के किसान और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्हें साइकिल की सवारी अच्छी लगती है। गांव से शामली, मुजफ्फरनगर और आसपास के गांव जाने में वह वह बस और ई-रिक्शा में नहीं, बल्कि साइकिल पर भरोसा करते है। पांच दशक से ज्यादा साइकिल चलाकर लोगों की समस्याओं को विभागों से हल कराते हैं। उनका मानना है कि भागदौड़ की जिंदगी में साइकिल चलाने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। साइकिल चलाने से हाथ-पैरों का दर्द नहीं होता। वह पूरी तरह स्वस्थ हैं।
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साइकिल चलाने से इम्यूनिटी बढ़ती है। कोरोना की पहली लहर में साइकिलों की 20 फीसदी तक अतिरिक्त बिक्री हुई थी। फैक्टरियों में माल कम पड़ गया था। इस बार कोरोना की दूसरी लहर में साइकिल की बिक्री में इजाफा नहीं हुआ। पिछली बार कोरोना में युवाओं ने साइकिल की तरफ रुझान किया था।
सुभाष गोयल, बाबूलाल एंड संस ( थोक एवं रिटेल विक्रेता)
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