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गोपाष्टमी पर गोवंश संवर्धन का आह्वान
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 20 Nov 2015 12:34 AM IST
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मुजफ्फरनगर। श्री गौशाला सभा में गोपाष्टमी उत्सव पर गोपूजन किया। सपा के वरिष्ठ नेता गौरव स्वरुप ने कहा गोवंश भारतीय संस्कृति में पूजनीय है। काली नदी घाट स्थित गोशाला में सदस्यों ने गो पूजन किया। पुरोहितों ने वेद शास्त्रों में गाय की महिमा बताई। महिलाओं ने गोभक्ति गीत सुनाए। सपा नेता गौरव स्वरूप ने कहा घरों में गोपालन बढ़ना चाहिए। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी, भाजपा नेता सूरत वर्मा, संजीव, जनेश्वर दयाल बंसल,प्रवीण अरोरा,सुगंध जैन, अजय गोयल, विपिन सिंघल आदि थे।
सत्य से दूर करती है चिंता : अवधेशानंद
मोरना। शुक्रताल के हनुमत धाम में साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा में गुरुवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। महामंडलेश्वर आचार्य अवधेशानंद महाराज ने कहा कि दान से मन और मन से भक्ति बनती है। चिंता हमें सत्य से दूर करती है। कर्तव्य की चिंता करनी चाहिए। गंगा तट पर स्थित हनुमत धाम की नक्षत्र वटिका महामंडलेश्वर ने कहा कि कलयुग ने हमें अपनों से दूर कर दिया है।
जीवन को वस्तु बना दिया। जब व्यक्ति वस्तु बन जाता है तो वह भागता रहता है। स्पर्धा ने हमें ग्राहक बना दिया, जिसके चलते हमारी उपासना करने की क्षमता निरंतर घटती जा रही है। अधिकारों के प्रति भक्तिभाव बनाने से जीवन बदल जाएगा। कर्तव्यों के प्रति सचेत नहीं होने पर हम अपने अंदर के साधक को कहीं खो देते हैं। साधक नैतिक चरित्रवान, सदाचारी और संयमी होता है। जीवन संभावनाओं, संवेदनाओं, उड़ान के लिए बना है। इस अवसर पर स्वामी केशवानंद महाराज, स्वामी गीतानंद महाराज, स्वामी कुलभूषण जी महाराज आदि रहे।
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सत्य से दूर करती है चिंता : अवधेशानंद
मोरना। शुक्रताल के हनुमत धाम में साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा में गुरुवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। महामंडलेश्वर आचार्य अवधेशानंद महाराज ने कहा कि दान से मन और मन से भक्ति बनती है। चिंता हमें सत्य से दूर करती है। कर्तव्य की चिंता करनी चाहिए। गंगा तट पर स्थित हनुमत धाम की नक्षत्र वटिका महामंडलेश्वर ने कहा कि कलयुग ने हमें अपनों से दूर कर दिया है।
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जीवन को वस्तु बना दिया। जब व्यक्ति वस्तु बन जाता है तो वह भागता रहता है। स्पर्धा ने हमें ग्राहक बना दिया, जिसके चलते हमारी उपासना करने की क्षमता निरंतर घटती जा रही है। अधिकारों के प्रति भक्तिभाव बनाने से जीवन बदल जाएगा। कर्तव्यों के प्रति सचेत नहीं होने पर हम अपने अंदर के साधक को कहीं खो देते हैं। साधक नैतिक चरित्रवान, सदाचारी और संयमी होता है। जीवन संभावनाओं, संवेदनाओं, उड़ान के लिए बना है। इस अवसर पर स्वामी केशवानंद महाराज, स्वामी गीतानंद महाराज, स्वामी कुलभूषण जी महाराज आदि रहे।
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