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गौरया चिड़िया की कम होती संख्या पर चर्चा
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बुढ़ाना में कस्बे के डीएवी डिग्री कॉलेज में अपने द्वारा बनाए गए चिड़िया घर के साथ विद्यार्थी।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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बुढ़ाना। कस्बे के डीएवी डिग्री कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अंतर्गत गौरैया चिड़िया घर विषय पर मंगलवार को आयोजित शिविर में संगोष्ठी हुई। इसमें चिड़ियों की घटती संख्या पर चिंता जताई। वहीं, सभी वक्ताओं ने गौरया के संरक्षण पर बल देते हुए उनके घर बनाने की जानकारी दी गई।
कस्बे के डीएवी डिग्री कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अंतर्गत गौरैया चिड़ियाघर विषय पर एक दिवसीय शिविर में संगोष्ठी हुई। इस मौके पर स्वयंसेवकों द्वारा कॉलेज में श्रमदान किया गया। गौरैया के लिए तैयार किए गए घरों पर रंगा गया। इस मौके पर आयोजित गोष्ठी में ग्रुप कैप्टन जुबेर मिर्जा व वसीम ने चिड़ियाघर निर्माण संबंधी जानकारी दी।
प्रवक्ता डॉ. संगीता चौधरी ने बताया कि कस्बा और देहात क्षेत्र में मोबाइल टावर की बढ़ती संख्या और तापमान के कारण गौरैया की संख्या में घट रही है। उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में गौरया के संरक्षण में विशेष योगदान की आवश्यकता है। महाविद्यालय के प्रबंधक अरविंद गर्ग ने कहा कि हम सभी के योगदान से गौरैया चिड़ियाओं को बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में सभी पेड़ों पर गौरैया के लिए घर बनवाए जाएंगे। कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. प्रदीप कुमार, शिखा कौशिक व ध्रुव यादव आदि ने विचार व्यक्त किए।
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कस्बे के डीएवी डिग्री कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना कार्यक्रम अंतर्गत गौरैया चिड़ियाघर विषय पर एक दिवसीय शिविर में संगोष्ठी हुई। इस मौके पर स्वयंसेवकों द्वारा कॉलेज में श्रमदान किया गया। गौरैया के लिए तैयार किए गए घरों पर रंगा गया। इस मौके पर आयोजित गोष्ठी में ग्रुप कैप्टन जुबेर मिर्जा व वसीम ने चिड़ियाघर निर्माण संबंधी जानकारी दी।
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प्रवक्ता डॉ. संगीता चौधरी ने बताया कि कस्बा और देहात क्षेत्र में मोबाइल टावर की बढ़ती संख्या और तापमान के कारण गौरैया की संख्या में घट रही है। उन्होंने बताया कि ऐसी स्थिति में गौरया के संरक्षण में विशेष योगदान की आवश्यकता है। महाविद्यालय के प्रबंधक अरविंद गर्ग ने कहा कि हम सभी के योगदान से गौरैया चिड़ियाओं को बचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में सभी पेड़ों पर गौरैया के लिए घर बनवाए जाएंगे। कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. प्रदीप कुमार, शिखा कौशिक व ध्रुव यादव आदि ने विचार व्यक्त किए।
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