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गंगा बैराज में छोड़े संरक्षित प्रजाति के घड़ियाल
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मुजफ्फरनगर : गंगा के उजियाली क्षेत्र में घड़ियालों को गंगा में छोड़ते अधिकारी।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
मीरापुर (मुजफ्फरनगर)। वन विभाग द्वारा पर्यावरण संरक्षण के तहत मध्य गंगा बैराज के उजियाली के पास गंगा में संरक्षित प्रजाति के 20 घड़ियाल छोड़े गए। इन सभी को लखनऊ के कुकरैल घड़ियाल प्रजनन केंद्र से लाया गया था। वन विभाग व विश्व प्रकृति निधि की टीम अगले छह माह तक गंगा नदी में छोड़े गए इन घड़ियालों पर नजर रखेगी।
बृहस्पतिवार दोपहर मुख्य वन संरक्षक पश्चिमी जोन मेरठ एनके जानू गंगा बैराज पहुंचे। उन्होंने डीएफओ सूरज कुमार के साथ हैदरपुर वेटलैंड में कराए जा रहे विकास कार्यों का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने उजियाली के पास लखनऊ के कुकरैल घड़ियाल प्रजनन केंद्र से लाए गए 20 घड़ियाल गंगा में छोड़े। इनमें तीन नर व 17 मादा घड़ियाल हैं। मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि घड़ियाल दुर्लभ वन्य जीव है, जिसे जीवित रहने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। घड़ियालों के संरक्षण व प्राकृतिक आवास के लिए शुद्ध पानी व रेतीला तट उपयुक्त पाया गया है, इसके चलते इन घड़ियालों को यहां छोड़ा गया है।
वन क्षेत्राधिकारी मोहन बहुखंडी ने बताया कि मगरमच्छ व घड़ियाल की प्रजाति अलग होती है। मगरमच्छ मनुष्य को नुकसान पहुंचाता है, जबकि घड़ियाल मनुष्य को नुकसान नहीं पहुंचाता। इसके जबड़े की बनावट भी विशेष होती है, जिससे वह मछलियों को ही शिकार बनाता है। छोड़े गए सभी घड़ियाल की उम्र दो वर्ष और वजन करीब पांच से सात किलो तक है। इस दौरान विश्व प्रकृति निधि के कार्यकर्ता संजीव यादव, शाहनवाज, वन दारोगा मोहनलाल, रवि कुमार, दीपक कुमार, पुनीत, अली रजा और शबाब आलम आदि मौजूद रहे।
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बृहस्पतिवार दोपहर मुख्य वन संरक्षक पश्चिमी जोन मेरठ एनके जानू गंगा बैराज पहुंचे। उन्होंने डीएफओ सूरज कुमार के साथ हैदरपुर वेटलैंड में कराए जा रहे विकास कार्यों का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने उजियाली के पास लखनऊ के कुकरैल घड़ियाल प्रजनन केंद्र से लाए गए 20 घड़ियाल गंगा में छोड़े। इनमें तीन नर व 17 मादा घड़ियाल हैं। मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि घड़ियाल दुर्लभ वन्य जीव है, जिसे जीवित रहने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। घड़ियालों के संरक्षण व प्राकृतिक आवास के लिए शुद्ध पानी व रेतीला तट उपयुक्त पाया गया है, इसके चलते इन घड़ियालों को यहां छोड़ा गया है।
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वन क्षेत्राधिकारी मोहन बहुखंडी ने बताया कि मगरमच्छ व घड़ियाल की प्रजाति अलग होती है। मगरमच्छ मनुष्य को नुकसान पहुंचाता है, जबकि घड़ियाल मनुष्य को नुकसान नहीं पहुंचाता। इसके जबड़े की बनावट भी विशेष होती है, जिससे वह मछलियों को ही शिकार बनाता है। छोड़े गए सभी घड़ियाल की उम्र दो वर्ष और वजन करीब पांच से सात किलो तक है। इस दौरान विश्व प्रकृति निधि के कार्यकर्ता संजीव यादव, शाहनवाज, वन दारोगा मोहनलाल, रवि कुमार, दीपक कुमार, पुनीत, अली रजा और शबाब आलम आदि मौजूद रहे।
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