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जटिल रोगों का अचूक बाण है प्राणायाम और योग
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योग प्रशिक्षक संजीव त्यागी
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
जटिल रोगों का अचूक बाण है प्राणायाम और योग
मुजफ्फरनगर, चरथावल। भागदौड़ की जिंदगी में योग और प्राणायाम जटिल रोगों को अचूक बाण है। तनावमुक्त जीवन के लिए लोगों को दिनचर्या में इसे ढालना होगा। राष्ट्रीय अवार्ड विजेता संजीव त्यागी ने योग और खेल में चरथावल को पहचान दी है। उनके द्वारा प्रशिक्षित सैकड़ों युवा देश-विदेश में योग सिखा रहे हैं।
कस्बे के मोहल्ला चौहट्टा निवासी स्वर्गीय राजेंद्र त्यागी और राजबाला के बेटे संजीव त्यागी ने की योग और स्पोर्ट से मास्टर डिग्री लेकर करियर के उच्च मुकाम को छुआ है। देश के विभिन्न शहरों में करीब 20 वर्षों से वह योग शिक्षा दे रहे हैं। पिछले वर्ष उन्हें योग इंडिया ट्रस्ट और भारतीय खेल संघ की तरफ से राष्ट्रीय अवार्ड मिला। वर्तमान में वह अपनी पत्नी कविता के साथ लुधियाना में एवरेस्ट योग इंस्टीट्यूट चला रहे हैं। योग विषय पर वह कहते हैं कि प्राणायाम हर मर्ज की दवा हैं। मोटापा और पेट की दिक्कत में चक्की आसन, दंडासन और उत्तान पाद आसन, गठिया निवारण के लिए ज्वाइंट एक्सरसाइज, डायबिटीज के खात्मे को पवन मुक्तासन, कुर्मासन और उत्तानपाद आसान अचूक बाण है। तनाव के लिए मंडूक आसन, शवासन और सुखासन बेहतर हैं। कहते हैं कि भाग दौड़ की जिंदगी में समय निकालकर योग प्राणायाम करें।
उनका कहना है कि चुनौतियां के सामने स्वास्थ्य के प्रति ध्यान घटना हानिकारक है। आत्मज्ञान के लिए नियमित योग जरूरी है। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने 23 मार्च से 21 जून तक ऑनलाइन योगा क्लास चलाकर दुनिया के लाखों लोगों को योग से जोड़े रखा। गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार से योगा की पढ़ाई के दौरान वह स्वामी रामदेव के संपर्क में रहे और वहां योग शिक्षक का कार्य किया। पिछले वर्ष उनकी संस्था के तीन विद्यार्थी योग वर्ल्ड चैंपियन बने हैं। खेल शिक्षक कुशल पाल त्यागी बताते है कि संजीव ने योग के अलावा हॉकी और एथलीट में राष्ट्रीय स्तर पर चमक बनाई है।
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मुजफ्फरनगर, चरथावल। भागदौड़ की जिंदगी में योग और प्राणायाम जटिल रोगों को अचूक बाण है। तनावमुक्त जीवन के लिए लोगों को दिनचर्या में इसे ढालना होगा। राष्ट्रीय अवार्ड विजेता संजीव त्यागी ने योग और खेल में चरथावल को पहचान दी है। उनके द्वारा प्रशिक्षित सैकड़ों युवा देश-विदेश में योग सिखा रहे हैं।
कस्बे के मोहल्ला चौहट्टा निवासी स्वर्गीय राजेंद्र त्यागी और राजबाला के बेटे संजीव त्यागी ने की योग और स्पोर्ट से मास्टर डिग्री लेकर करियर के उच्च मुकाम को छुआ है। देश के विभिन्न शहरों में करीब 20 वर्षों से वह योग शिक्षा दे रहे हैं। पिछले वर्ष उन्हें योग इंडिया ट्रस्ट और भारतीय खेल संघ की तरफ से राष्ट्रीय अवार्ड मिला। वर्तमान में वह अपनी पत्नी कविता के साथ लुधियाना में एवरेस्ट योग इंस्टीट्यूट चला रहे हैं। योग विषय पर वह कहते हैं कि प्राणायाम हर मर्ज की दवा हैं। मोटापा और पेट की दिक्कत में चक्की आसन, दंडासन और उत्तान पाद आसन, गठिया निवारण के लिए ज्वाइंट एक्सरसाइज, डायबिटीज के खात्मे को पवन मुक्तासन, कुर्मासन और उत्तानपाद आसान अचूक बाण है। तनाव के लिए मंडूक आसन, शवासन और सुखासन बेहतर हैं। कहते हैं कि भाग दौड़ की जिंदगी में समय निकालकर योग प्राणायाम करें।
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उनका कहना है कि चुनौतियां के सामने स्वास्थ्य के प्रति ध्यान घटना हानिकारक है। आत्मज्ञान के लिए नियमित योग जरूरी है। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने 23 मार्च से 21 जून तक ऑनलाइन योगा क्लास चलाकर दुनिया के लाखों लोगों को योग से जोड़े रखा। गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार से योगा की पढ़ाई के दौरान वह स्वामी रामदेव के संपर्क में रहे और वहां योग शिक्षक का कार्य किया। पिछले वर्ष उनकी संस्था के तीन विद्यार्थी योग वर्ल्ड चैंपियन बने हैं। खेल शिक्षक कुशल पाल त्यागी बताते है कि संजीव ने योग के अलावा हॉकी और एथलीट में राष्ट्रीय स्तर पर चमक बनाई है।
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