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Muzaffarnagar News: विक्रम सैनी के बयान, जिलाध्यक्ष बोले... नहीं देते ध्यान
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मुजफ्फरनगर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से एन पहले भाजपा नेताओं के बीच सियासी टकराव आम होने लगा है। अपने तीखे बयानों से पहचान बनाने वाले पूर्व विधायक विक्रम सैनी एक बार फिर भाजपा जिलाध्यक्ष सुधीर सैनी पर हमलावर हो गए हैं। पूर्व विधायक का कहना है कि जिलाध्यक्ष पद पर बदलाव नहीं किया गया तो आने वाले चुनाव में नुकसान होगा। उधर, जिलाध्यक्ष का कहना है कि इस तरह की बातों पर वह ध्यान नहीं देते।
एक दौर में सैनी समाज के जनप्रतिनिधियों के लिए मोरना सीट मुफीद रही। नए परिसीमन के बाद खतौली सीट पर जातीय गणित जीत का आधार बनने लगा। मुजफ्फरनगर दंगे में आरोपी रहे पूर्व विधायक विक्रम सैनी वर्ष 2017 और 2022 में खतौली सीट से जीतकर ही विधानसभा पहुंचे।
दंगे के एक मुकदमे में सजा के कारण उनकी सदस्यता चली गई और उपचुनाव में उनकी पत्नी को हार का सामना करना पड़ा और रालोद के मदन भैया जीतकर विधानसभा पहुंचे।
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टिकट और संगठन में अपनी दावेदारी को लेकर सियासी माहौल गरमा रहा है। पूर्व विधायक विक्रम सैनी के कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें वह भाजपा जिलाध्यक्ष पर सीधे हमले कर रहे हैं। यही नहीं जिलाध्यक्ष के साथ पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डाॅ. संजीव बालियान का नाम भी जोड़ा जा रहा है।
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क्या बोले सुधीर सैनी
भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. सुधीर सैनी का कहना है कि पार्टी ने जो दायित्व दिया है, उसे पूरा कर रहे हैं। संगठन और कार्यकर्ता ही सबसे बड़ा होते हैं। पूर्व विधायक क्यों इस तरह के बयान दे रहे हैं, वह नहीं जानते। इस तरह की बातों पर कभी ध्यान भी नहीं देते।
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सियासत में रहा सैनी समाज का दबदबा
मुजफ्फरनगर। जिले की राजनीति के हर दौर में सैनी समाज का दबदबा रहा है। भाजपा के टिकट पर मोरना सीट से 1991 और 1993 में रामपाल सिंह विधायक बने। 2002 बसपा के टिकट पर राजपाल सैनी विधानसभा पहुंचे और फिर राज्यसभा भी गए। परिसीमन के बाद 2017 और 2022 में खतौली से विक्रम सैनी दो बार विधायक चुने गए। मुजफ्फरनगर का हिस्सा रहने के दौरान थानाभवन सीट से मलखान सिंह सैनी भी विधायक चुने गए थे।
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एक दौर में सैनी समाज के जनप्रतिनिधियों के लिए मोरना सीट मुफीद रही। नए परिसीमन के बाद खतौली सीट पर जातीय गणित जीत का आधार बनने लगा। मुजफ्फरनगर दंगे में आरोपी रहे पूर्व विधायक विक्रम सैनी वर्ष 2017 और 2022 में खतौली सीट से जीतकर ही विधानसभा पहुंचे।
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दंगे के एक मुकदमे में सजा के कारण उनकी सदस्यता चली गई और उपचुनाव में उनकी पत्नी को हार का सामना करना पड़ा और रालोद के मदन भैया जीतकर विधानसभा पहुंचे।
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टिकट और संगठन में अपनी दावेदारी को लेकर सियासी माहौल गरमा रहा है। पूर्व विधायक विक्रम सैनी के कई वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें वह भाजपा जिलाध्यक्ष पर सीधे हमले कर रहे हैं। यही नहीं जिलाध्यक्ष के साथ पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डाॅ. संजीव बालियान का नाम भी जोड़ा जा रहा है।
क्या बोले सुधीर सैनी
भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. सुधीर सैनी का कहना है कि पार्टी ने जो दायित्व दिया है, उसे पूरा कर रहे हैं। संगठन और कार्यकर्ता ही सबसे बड़ा होते हैं। पूर्व विधायक क्यों इस तरह के बयान दे रहे हैं, वह नहीं जानते। इस तरह की बातों पर कभी ध्यान भी नहीं देते।
सियासत में रहा सैनी समाज का दबदबा
मुजफ्फरनगर। जिले की राजनीति के हर दौर में सैनी समाज का दबदबा रहा है। भाजपा के टिकट पर मोरना सीट से 1991 और 1993 में रामपाल सिंह विधायक बने। 2002 बसपा के टिकट पर राजपाल सैनी विधानसभा पहुंचे और फिर राज्यसभा भी गए। परिसीमन के बाद 2017 और 2022 में खतौली से विक्रम सैनी दो बार विधायक चुने गए। मुजफ्फरनगर का हिस्सा रहने के दौरान थानाभवन सीट से मलखान सिंह सैनी भी विधायक चुने गए थे।