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Muzaffarnagar News: भाईचारे के लिए कृष्णानंद गुप्ता को याद करते हैं लोग
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1991 में नगर पंचायत के चुनाव में चेयरमैन बने थे कृष्णानंद गुप्ता
उनके बाद परिवार ने नगर पंचायत की राजनीति में कोई भागीदारी नहीं की
संवाद न्यूज एजेंसी
जानसठ। नगर पंचायत जानसठ में कृष्णानंद गुप्ता ने चेयरमैन पद पर रहते हुए दोनों समुदाय को एक साथ लेकर अपना कार्यकाल पूरा किया था। उन्होंने छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस होने पर कस्बे का माहौल खराब नहीं होने दिया।
वर्ष 1991 में नगर पंचायत के चुनाव में कृष्णानंद गुप्ता चेयरमैन बने थे। बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय वह दिन और रात में पुलिस बल और पीएसी बल को साथ लेकर गली व मोहल्ले में घूमते थे। शांति व्यवस्था बनाने के लिए दोनों समुदायों लोगों से अपील करते रहे। उन्होंने कस्बे का माहौल खराब नहीं होने दिया।
जून, 1996 में चेयरमैन कृष्णानंद गुप्ता की आकस्मिक मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद उनके परिवार के किसी भी व्यक्ति ने नगर पंचायत की राजनीति में कोई भागीदारी नहीं की। उनके पुत्र विशाल गुप्ता का कहना है कि उनके पिता कृष्णनंद गुप्ता की मौत के बाद उन्होंने नगर पंचायत की राजनीति में कोई भागीदारी नहीं की।
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उनके बाद परिवार ने नगर पंचायत की राजनीति में कोई भागीदारी नहीं की
संवाद न्यूज एजेंसी
जानसठ। नगर पंचायत जानसठ में कृष्णानंद गुप्ता ने चेयरमैन पद पर रहते हुए दोनों समुदाय को एक साथ लेकर अपना कार्यकाल पूरा किया था। उन्होंने छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद विध्वंस होने पर कस्बे का माहौल खराब नहीं होने दिया।
वर्ष 1991 में नगर पंचायत के चुनाव में कृष्णानंद गुप्ता चेयरमैन बने थे। बाबरी मस्जिद विध्वंस के समय वह दिन और रात में पुलिस बल और पीएसी बल को साथ लेकर गली व मोहल्ले में घूमते थे। शांति व्यवस्था बनाने के लिए दोनों समुदायों लोगों से अपील करते रहे। उन्होंने कस्बे का माहौल खराब नहीं होने दिया।
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जून, 1996 में चेयरमैन कृष्णानंद गुप्ता की आकस्मिक मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद उनके परिवार के किसी भी व्यक्ति ने नगर पंचायत की राजनीति में कोई भागीदारी नहीं की। उनके पुत्र विशाल गुप्ता का कहना है कि उनके पिता कृष्णनंद गुप्ता की मौत के बाद उन्होंने नगर पंचायत की राजनीति में कोई भागीदारी नहीं की।
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