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पानी को तरसे मंडी में आने वाले लोग
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पानी को तरसे मंडी में आने वाले लोग
मुजफ्फरनगर। दी गुड खांडसारी एंड ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन नवीन मंडी स्थल की बैठक में खराब पड़े वाटर कूलरों के बारे में गहरा रोष प्रकट किया गया। मंडी समिति के सचिव को पत्र भेजने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय मित्तल एवं मंत्री श्याम सिंह सैनी ने कहा की अनेकों बार मंडी समिति को पत्राचार करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। मंडी में आने वाले किसान मजदूर व्यापारी पानी के लिए तरस गए हैं, मंडी का कोई भी नल व वाटर कूलर चालू नहीं है। डीएम से मांग करते हैं की अविलंब इन वाटर कुलरो को ठीक कराने का निर्देश जारी करे। पांच वर्षों से हमारी एसोसिएशन नए वाटर कूलर लगाने की मांग मंडी समिति से कर रही है, मगर फंड न होने की बात कहकर बार-बार इस बात को टाल दिया जाता है, इस कारण मंडी में किसानों मजदूरों वे व्यापारियों में भारी रोष है। पिछले वर्ष तीन वाटर कूलर अलग-अलग स्थानों पर व्यापारियों ने अपने पैसे से लगाए थे, इतना भारी भरकम मंडी शुल्क आने के बाद भी मंडी की यह दुर्दशा है, जबकि हाईकोर्ट के आदेश है की मंडी शुल्क का 60 परसेंट रुपया मंडी के व्यापारियों किसानों व मजदूरों की सुख-सुविधाओं पर खर्च करना होगा।
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मुजफ्फरनगर। दी गुड खांडसारी एंड ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन नवीन मंडी स्थल की बैठक में खराब पड़े वाटर कूलरों के बारे में गहरा रोष प्रकट किया गया। मंडी समिति के सचिव को पत्र भेजने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय मित्तल एवं मंत्री श्याम सिंह सैनी ने कहा की अनेकों बार मंडी समिति को पत्राचार करने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। मंडी में आने वाले किसान मजदूर व्यापारी पानी के लिए तरस गए हैं, मंडी का कोई भी नल व वाटर कूलर चालू नहीं है। डीएम से मांग करते हैं की अविलंब इन वाटर कुलरो को ठीक कराने का निर्देश जारी करे। पांच वर्षों से हमारी एसोसिएशन नए वाटर कूलर लगाने की मांग मंडी समिति से कर रही है, मगर फंड न होने की बात कहकर बार-बार इस बात को टाल दिया जाता है, इस कारण मंडी में किसानों मजदूरों वे व्यापारियों में भारी रोष है। पिछले वर्ष तीन वाटर कूलर अलग-अलग स्थानों पर व्यापारियों ने अपने पैसे से लगाए थे, इतना भारी भरकम मंडी शुल्क आने के बाद भी मंडी की यह दुर्दशा है, जबकि हाईकोर्ट के आदेश है की मंडी शुल्क का 60 परसेंट रुपया मंडी के व्यापारियों किसानों व मजदूरों की सुख-सुविधाओं पर खर्च करना होगा।
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