फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Parents worry more than children due to online studies

ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों के परिजनों पर बढ़ा वर्कलोड़

Fri, 23 Apr 2021 12:19 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 23 Apr 2021 12:19 AM IST
विज्ञापन
Parents worry more than children due to online studies
ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों से ज्यादा अभिभावक परेशान
विज्ञापन

मुजफ्फरनगर/चरथावल। कोरोना के बढ़ते संक्रमण में ऑनलाइन पढ़ाई मम्मी-पापा की मुसीबत बन गई है। घर में रहकर बच्चों के स्कूल होमवर्क का भार से महिलाओं की दिनचर्या बिगड़ गई है। ग्रामीण अंचल में कमजोर नेटवर्कं ऑनलाइन पढ़ाई को प्रभावित कर रहा है। निजी स्कूलों में भारी भरकम कोर्स देने और फीस वसूलने के लिए बच्चों के अभिभावकों पर दबाव है। कोरोना के दूसरे दौर में अभिभावकों से की गई बातचीत।
मम्मी-पापा की बढ़ी जिम्मेदारी
शहर के हनुमानपुरी निवासी नितिन अग्रवाल की बेटी आराध्या होली एंजिल्स में कक्षा चार में पढ़ती है। ओजस्वी ने एलकेजी में प्रवेश लिया है। ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चों की मम्मी प्रियंका की जिम्मेदारी बढ़ गई है। स्कूल समय में बच्चों को लैपटॉप लेकर खुद सामने बैठना पड़ता है। उनका कहना है घरेलू कामकाज काफी प्रभावित हो गए हैं।
विज्ञापन

होमवर्क का लोड बन रही मां की मुसीबत
कानूनगोयान बस स्टैंड निवासी तरुण त्यागी का बेटा अथर्व पब्लिक स्कूल में पढ़ता है। अवनीश प्ले में है। बच्चों को होमवर्क के भार से उसकी मां मीनाक्षी के सामने मुसीबतें पैदा कर दी है। तरुण ने बताया कि बच्चे पढ़ाई से ज्यादा घर पर रहकर इनडोर गेम कैरम, लूड़ो आदि खेलने की जिद्द करते रहते हैं। पूरे दिन घर रहकर और बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई से मम्मी समय की बचत नहीं कर पाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

बच्चों में हो रही व्यावहारिक ज्ञान की कमी
जय हिंद इंटर कॉलेज में लिपिक अमित कुमार का बेटा अनुभव और बिटिया नंदिनी को ऑनलाइन पढ़ाई करते हुए साल भर से ज्यादा हो गया। बच्चों को व्यावहारिक ज्ञान में कमी आई है। साथ ही कक्षा के मुकाबले मोबाइल पर कुछ समय के लिए वह पढ़ाई करते हैं, लेकिन उनमें आत्मबल की कमी होती जा रही है। नेटवर्किंग की समस्या से रोजाना दिक्कतें झेलनी पड़ती है।
परिजनों पर दबाब है ऑनलाइन पढ़ाई
कुटेसरा के शकील त्यागी कहते हैं कि घर में रहकर सुरक्षित रहना वक्त की जरूरत है। घर में वर्चुअल अथवा व्हाट्सएप पर बच्चों को काम देना उनकी मम्मी-पापा की मुसीबत बढ़ा रहा है। चूंकि छोटे बच्चों को ऑनलाइन कुछ समझ नहीं आता है। उनके बच्चे हफजा, जैंनब, आरजू, हमजा किरण पब्लिक स्कूल में पढ़ते है। मोबाइल की दिक्कत और नेटवर्क नहीं आना भी पढ़ाई में बाधा बना रहता है।

फीस के लिए निजी स्कूल बना रहे बहाने
सीएचसी चरथावल में डाटा एंट्री ऑपरेटर ललित कुमार बताते हैं कि बिटिया वाची को स्कूल से कोर्स दे दिया गया है। अब नए सत्र की फीस वसूलने का दबाव बनाया जा रहा है। बच्चों की मां नीलम पर पढ़ाने की जिम्मेदारी बढ़ गई है। ऑनलाइन शिक्षा के समय घर का जरूरी काम छोड़कर बिटिया के साथ लगना पड़ता है। नगलां के आसिफ कहते हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई के लिए नए कक्षा के कोर्स की लॉगिन और पासवर्ड के लिए एसएमएस भेजकर बुलाया जा रहा है, ताकि उन पर फीस और भारी भरकम कोर्स थमा दिया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed