गंगा से जुड़े हैं हमारे प्राण: स्वामी ओमानंद महाराज
मोरना (मुजफ्फरनगर)। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने मां गंगा का निरंतर स्वस्थ निर्मल व अविरल प्रवाह हमारे तथा भारतीय राष्ट्र जीवन की मौलिक आवश्यकता है। गंगा का निर्मल प्रवाह देशकाल संस्कृति सभ्यता आस्था तथा आर्थिक समृद्धि और सहित सभी दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
तीर्थ नगरी शुकतीर्थ भागवत पीठ शुकदेव आश्रम में आयोजित गंगा उत्सव पर्व में संत ने कहा कि गंगा से हमारे प्राण जुड़े हैं। गंगा भारत की आत्मा का प्रतीक है। गंगा अपने में पवित्र और परिपूर्ण है, गंगा का जल अमृत है, गंगा को माता कह के पूजन करते हैं। गंगा पवित्र नदियों के किनारे बैठ कर ही हमारे ऋषि मुनि महापुरुषों ने हमारे ग्रंथों वेद महाभारत गीता रामायण श्रीमद् भागवत आदि ग्रंथों की रचना की। इस अवसर पर पीठाधीश्वर स्वामी ने सब को मां गंगा को प्रदूषण मुक्त कर उसकी रक्षा करने का संकल्प दिलाया। इस अवसर पर चित्रकूट से पधारे स्वामी योगानंद महाराज व हिमाचल से पधारे स्वामी पूर्णानंद महाराज, प्रधानाचार्य आचार्य उत्प्रेति, अरुण कुमार, राणा शास्त्री, ठाकुर आदि मौजूद रहे।