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शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
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शुकतीर्थ के दण्डी आश्रम में भागवत कथा सुनाते अमित वेदाचार्य महाराज।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
मोरना। शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को कथाव्यास अमित वेदाचार्य महाराज ने कहा कि यदि संत बनना है तो दूसरे के गुणों को देखो और अपने दोषों का स्मरण करो।
दंडी आश्रम में चल रही भागवत कथा में अमित वेदाचार्य महाराज ने कहा कि प्रवृत्ति छोड़ने से संत नहीं बना जाता, इसके लिए पाप छोड़ना पड़ता है। भगवान बड़े दयालु हैं, नास्तिक को भी धन, मान व सुख देते हैं। मन का ऐसा स्वभाव है, जब भय लगता है तो पाप को छोड़ देता है और भक्ति करता है। जिस मानव की पांच प्रकार की शुद्धि परिपूर्ण हैं, उसी को भगवान का दर्शन करने की इच्छा होती है।
विशिष्ट अतिथि हनुमान पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज ने कहा, जो काम के अधीन रहता है, उसको काल के अधीन होना पड़ेगा। जो धीरे-धीरे संयम को बढ़ाता है, वह भक्ति में रम जाता है। जीव अभिमान को छोड़कर सर्वकाल भगवान की भक्ति करता है तो भगवान भी जीव को अपने से बड़ा बना देते हैं। कोई भी सत्कर्म निरंतर 12 वर्ष तक नियत रहे तो उसकी शक्ति स्वत: ही बढ़ जाएगी। काम को मारने के लिए रात्रि में भक्ति करें। भक्ति जब बढ़ जाती है, तब भेद का विनाश होता है। आश्रम प्रबंधक मनोहर शर्मा व्यवस्था बनाने में रहे।
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मोरना। शुकतीर्थ स्थित दंडी आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में सोमवार को कथाव्यास अमित वेदाचार्य महाराज ने कहा कि यदि संत बनना है तो दूसरे के गुणों को देखो और अपने दोषों का स्मरण करो।
दंडी आश्रम में चल रही भागवत कथा में अमित वेदाचार्य महाराज ने कहा कि प्रवृत्ति छोड़ने से संत नहीं बना जाता, इसके लिए पाप छोड़ना पड़ता है। भगवान बड़े दयालु हैं, नास्तिक को भी धन, मान व सुख देते हैं। मन का ऐसा स्वभाव है, जब भय लगता है तो पाप को छोड़ देता है और भक्ति करता है। जिस मानव की पांच प्रकार की शुद्धि परिपूर्ण हैं, उसी को भगवान का दर्शन करने की इच्छा होती है।
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विशिष्ट अतिथि हनुमान पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज ने कहा, जो काम के अधीन रहता है, उसको काल के अधीन होना पड़ेगा। जो धीरे-धीरे संयम को बढ़ाता है, वह भक्ति में रम जाता है। जीव अभिमान को छोड़कर सर्वकाल भगवान की भक्ति करता है तो भगवान भी जीव को अपने से बड़ा बना देते हैं। कोई भी सत्कर्म निरंतर 12 वर्ष तक नियत रहे तो उसकी शक्ति स्वत: ही बढ़ जाएगी। काम को मारने के लिए रात्रि में भक्ति करें। भक्ति जब बढ़ जाती है, तब भेद का विनाश होता है। आश्रम प्रबंधक मनोहर शर्मा व्यवस्था बनाने में रहे।
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