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देवबंद सीट पर भाजपा-सपा ने ही महिलाओं पर जताया भरोसा
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देवबंद सीट पर भाजपा और सपा ने ही जताया था महिलाओं पर भरोसा
देवबंद (सहारनपुर)। आजादी के बाद से देवबंद विधानसभा सीट पर भाजपा व सपा को छोड़कर किसी भी राजनीतिक दल ने महिलाओं पर भरोसा नहीं जताया। भाजपा ने सन 1993 के विधानसभा चुनाव में शशीबाला पुंडीर तो सपा ने 2016 के उपचुनाव में दिवंगत राज्यमंत्री राजेंद्र सिंह राणा की पत्नी मीना सिंह राणा पर भरोसा करते हुए उन्हें बतौर प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतारा था।
बता दें कि देवबंद सीट पर सर्वाधिक 37 साल तक कांग्रेस के विधायकों का कब्जा रहा है। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने भी कभी किसी महिला को अपना प्रत्याशी नहीं बनाया। यही हाल बसपा का भी रहा। यहां से 2002 में बसपा के टिकट पर राजेंद्र सिंह राणा और 2007 में मनोज चौधरी ने चुनाव लड़ा था। चुनाव जीतने के बाद राजेंद्र राणा बसपा को अलविदा कहकर मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार में शामिल हो गए थे। महिलाओं की बात करें तो भाजपा ने 1993 में राजपूत बिरादरी की महिला शशीबाला पुंडीर को पहली बार चुनाव मैदान में उतारा था। शशीबाला बसपा प्रत्याशी हाजी मुर्तजा को पराजित कर देवबंद की पहली महिला विधायक बनी थी। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने 2016 में हुए उपचुनाव में (राजेंद्र सिंह राणा की मृत्यु के बाद रिक्त हुई सीट पर) मीना सिंह राणा पर भरोसा करते हुए उन्हें प्रत्याशी बनाया था। लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी माविया अली ने मीना सिंह राणा को हरा दिया था। हालांकि गंगोह की सफूरा बेगम ने 1993 और देवबंद की जीनत नाज ने 1996 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा भरा था। लेकिन दोनों महिलाएं चुनाव हार गई थी।
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देवबंद (सहारनपुर)। आजादी के बाद से देवबंद विधानसभा सीट पर भाजपा व सपा को छोड़कर किसी भी राजनीतिक दल ने महिलाओं पर भरोसा नहीं जताया। भाजपा ने सन 1993 के विधानसभा चुनाव में शशीबाला पुंडीर तो सपा ने 2016 के उपचुनाव में दिवंगत राज्यमंत्री राजेंद्र सिंह राणा की पत्नी मीना सिंह राणा पर भरोसा करते हुए उन्हें बतौर प्रत्याशी बनाकर चुनाव मैदान में उतारा था।
बता दें कि देवबंद सीट पर सर्वाधिक 37 साल तक कांग्रेस के विधायकों का कब्जा रहा है। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने भी कभी किसी महिला को अपना प्रत्याशी नहीं बनाया। यही हाल बसपा का भी रहा। यहां से 2002 में बसपा के टिकट पर राजेंद्र सिंह राणा और 2007 में मनोज चौधरी ने चुनाव लड़ा था। चुनाव जीतने के बाद राजेंद्र राणा बसपा को अलविदा कहकर मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार में शामिल हो गए थे। महिलाओं की बात करें तो भाजपा ने 1993 में राजपूत बिरादरी की महिला शशीबाला पुंडीर को पहली बार चुनाव मैदान में उतारा था। शशीबाला बसपा प्रत्याशी हाजी मुर्तजा को पराजित कर देवबंद की पहली महिला विधायक बनी थी। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने 2016 में हुए उपचुनाव में (राजेंद्र सिंह राणा की मृत्यु के बाद रिक्त हुई सीट पर) मीना सिंह राणा पर भरोसा करते हुए उन्हें प्रत्याशी बनाया था। लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी माविया अली ने मीना सिंह राणा को हरा दिया था। हालांकि गंगोह की सफूरा बेगम ने 1993 और देवबंद की जीनत नाज ने 1996 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पर्चा भरा था। लेकिन दोनों महिलाएं चुनाव हार गई थी।
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