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Muzaffarnagar News: शहर में वापसी के लिए किस पर दांव लगाएगी भाजपा
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अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। शहर पालिका सीट पर लगातार दो चुनाव हार चुकी भाजपा वापसी के लिए गुणाभाग में जुटी है। रणनीतिकार खोई सीट को वापस हासिल करने की रणनीति बना रहे हैं। महिला के लिए सीट आरक्षित होने के बाद देखने वाली बात यह होगी कि भाजपा किस प्रत्याशी पर दांव लगाएगी।
पिछले दो चुनाव में शहर सीट पर कांग्रेस की जीत हुई है। पहले कांग्रेस से उद्यमी पंकज अग्रवाल ने भाजपा को हराने का काम किया था, इसके बाद अंजू अग्रवाल कांग्रेस के टिकट पर ही जीतकर पालिकाध्यक्ष बनीं। हालांकि वह बाद में भाजपा में शामिल हो गई थी। उनके कार्यकाल की गूंज लखनऊ तक हुई। संगठन और भाजपा के बड़े नेताओं के साथ समन्वय बनता नहीं दिखा। एक बार फिर चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
शहर सीट पर भाजपा के लिए वापसी की चुनौती रहेगी। इसकी बड़ी वजह यह भी है कि नए परिसीमन पर चुनाव हो रहा है। शहर से सटा ग्रामीण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा पालिका में शामिल हुआ है । चार लाख 21 हजार मतदाताओं का समीकरण साधना सभी राजनीतिक दलों के लिए मुश्किल होगा। पिछले दो चुनाव में हार झेल चुकी भाजपा के लिए प्रत्याशी का चयन भी आसान नहीं रहेगा।
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इसलिए भी अहम शहर का चुनाव
शहर सीट का चुनाव इस बार सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। विधानसभा चुनाव में जिले की पांच सीट हार चुकी भाजपा के पास केवल सदर सीट है। लोकसभा चुनाव से पहले शहर के मतदाताओं का मन परखने का यह अंतिम मौका है। ऐसे में भाजपा के रणनीतिकार हर कदम संभलकर रख रहे हैं।
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मुजफ्फरनगर। शहर पालिका सीट पर लगातार दो चुनाव हार चुकी भाजपा वापसी के लिए गुणाभाग में जुटी है। रणनीतिकार खोई सीट को वापस हासिल करने की रणनीति बना रहे हैं। महिला के लिए सीट आरक्षित होने के बाद देखने वाली बात यह होगी कि भाजपा किस प्रत्याशी पर दांव लगाएगी।
पिछले दो चुनाव में शहर सीट पर कांग्रेस की जीत हुई है। पहले कांग्रेस से उद्यमी पंकज अग्रवाल ने भाजपा को हराने का काम किया था, इसके बाद अंजू अग्रवाल कांग्रेस के टिकट पर ही जीतकर पालिकाध्यक्ष बनीं। हालांकि वह बाद में भाजपा में शामिल हो गई थी। उनके कार्यकाल की गूंज लखनऊ तक हुई। संगठन और भाजपा के बड़े नेताओं के साथ समन्वय बनता नहीं दिखा। एक बार फिर चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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शहर सीट पर भाजपा के लिए वापसी की चुनौती रहेगी। इसकी बड़ी वजह यह भी है कि नए परिसीमन पर चुनाव हो रहा है। शहर से सटा ग्रामीण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा पालिका में शामिल हुआ है । चार लाख 21 हजार मतदाताओं का समीकरण साधना सभी राजनीतिक दलों के लिए मुश्किल होगा। पिछले दो चुनाव में हार झेल चुकी भाजपा के लिए प्रत्याशी का चयन भी आसान नहीं रहेगा।
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इसलिए भी अहम शहर का चुनाव
शहर सीट का चुनाव इस बार सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। विधानसभा चुनाव में जिले की पांच सीट हार चुकी भाजपा के पास केवल सदर सीट है। लोकसभा चुनाव से पहले शहर के मतदाताओं का मन परखने का यह अंतिम मौका है। ऐसे में भाजपा के रणनीतिकार हर कदम संभलकर रख रहे हैं।