{"_id":"5908cca94f1c1b961f440f63","slug":"nrhm-vehicle-scam","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनआरएचएम में वाहन घोटाले की जांच पूरी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनआरएचएम में वाहन घोटाले की जांच पूरी
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 02 May 2017 11:45 PM IST
विज्ञापन
scam Logo
- फोटो : google
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एनआरएचएम में मोबाइल हेल्थ वैन लगाने में किए गए वाहन घोटाले का राजफाश होने से स्वास्थ्य महकमे की नींद उड़ी हुई है। दो बाबुओं को सस्पेंड कर कई बड़े खिलाड़ियों को बचाने का ताना-बुना जा रहा है। हालांकि आला अफसर लखनऊ से रिपोर्ट आने के इंतजार में है। इसके बाद ही कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिरेगी।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन के तहत गांव-गांव मोबाइल हेल्थ वैन लगाकर योजना का क्रियान्वयन किया गया। हेल्थ प्रोग्राम में जो वाहन लगाए गए वह नियमों के विपरीत रहे। पूर्व सीएमओ डॉ सुबोध कुमार, वित्तीय अधिकारियों और विभाग के कर्मचारियों ने मिलीभगत कर पुराने और जनपद में बिना पंजीकरण के वाहन दौड़ा दिए। कुल 27 वाहनों में 14 ऐसे रहे, जो दो वर्ष पुराने थे। इनमें 10 का जिले में कोई पंजीकरण भी नहीं मिला।
सीडीओ, एआरटीओ प्रवर्तन की जांच में पूर्व सीएमओ डॉ सुबोध कुमार, डॉ पुष्पेंद्र, डॉ सतीश, डॉ संजीव समेत 11 लोग दोषी निकले हैं। मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बाबू बालेश्वर और ब्रजभूषण को सस्पेंड कर दिया। उधर, विभाग में भीतर खाने इस खेल के कई बड़े खिलाड़ियों पर मेहरबानी करनी तैयारी की जा रही है। खेल में असल गुनहगारों को विभाग बचाने की जुगत में है। क्योंकि राजफाश होने के बाद एक भी चिकित्सक पर कार्रवाई नहीं हो सकी है।
विज्ञापन
उधर, तत्कालीन डीएम डीके सिंह ने पूरे प्रकरण की अपने स्तर से भी रिपोर्ट लखनऊ मुख्यालय भेजी है। स्वास्थ्य विभाग इसी रिपोर्ट के इंतजार में है। रिपोर्ट आने के बाद कई अन्य चिकित्सक और कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी तय है।
एकाउंट विभाग पर पैनी नजर
मुजफ्फरनगर। घोटाले में भले ही कई डॉक्टर शामिल रहे हैं, लेकिन विभाग के वित्त विभाग पर अधिकारियों के साथ प्रशासन की पैनी नजर है। एनआरएचएम के अलावा भी कई अन्य योजनाओं में हेरफेर होने की आशंका को लेकर गोपनीय जांच की जा रही है। क्योंकि विभाग में इन दिनों भी कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित है, जिनके लिए पैसा वित्त विभाग से जारी हो रहा है।
घपलेबाजी के प्रकरण में डीएम साहब ने लखनऊ रिपोर्ट भेजी है। वहां से अभी तक उनके पास रिपोर्ट नहीं पहुंची है। लखनऊ से जो भी आदेश आएंगे, उस पर तत्काल कार्रवाई होगी। एकाउंट विभाग पर नजर रखी जा रही है। -डॉ पीएस मिश्रा, सीएमओ, मुजफ्फरनगर।
विज्ञापन
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन के तहत गांव-गांव मोबाइल हेल्थ वैन लगाकर योजना का क्रियान्वयन किया गया। हेल्थ प्रोग्राम में जो वाहन लगाए गए वह नियमों के विपरीत रहे। पूर्व सीएमओ डॉ सुबोध कुमार, वित्तीय अधिकारियों और विभाग के कर्मचारियों ने मिलीभगत कर पुराने और जनपद में बिना पंजीकरण के वाहन दौड़ा दिए। कुल 27 वाहनों में 14 ऐसे रहे, जो दो वर्ष पुराने थे। इनमें 10 का जिले में कोई पंजीकरण भी नहीं मिला।
विज्ञापन
सीडीओ, एआरटीओ प्रवर्तन की जांच में पूर्व सीएमओ डॉ सुबोध कुमार, डॉ पुष्पेंद्र, डॉ सतीश, डॉ संजीव समेत 11 लोग दोषी निकले हैं। मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बाबू बालेश्वर और ब्रजभूषण को सस्पेंड कर दिया। उधर, विभाग में भीतर खाने इस खेल के कई बड़े खिलाड़ियों पर मेहरबानी करनी तैयारी की जा रही है। खेल में असल गुनहगारों को विभाग बचाने की जुगत में है। क्योंकि राजफाश होने के बाद एक भी चिकित्सक पर कार्रवाई नहीं हो सकी है।
विज्ञापन
उधर, तत्कालीन डीएम डीके सिंह ने पूरे प्रकरण की अपने स्तर से भी रिपोर्ट लखनऊ मुख्यालय भेजी है। स्वास्थ्य विभाग इसी रिपोर्ट के इंतजार में है। रिपोर्ट आने के बाद कई अन्य चिकित्सक और कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी तय है।
एकाउंट विभाग पर पैनी नजर
मुजफ्फरनगर। घोटाले में भले ही कई डॉक्टर शामिल रहे हैं, लेकिन विभाग के वित्त विभाग पर अधिकारियों के साथ प्रशासन की पैनी नजर है। एनआरएचएम के अलावा भी कई अन्य योजनाओं में हेरफेर होने की आशंका को लेकर गोपनीय जांच की जा रही है। क्योंकि विभाग में इन दिनों भी कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित है, जिनके लिए पैसा वित्त विभाग से जारी हो रहा है।
घपलेबाजी के प्रकरण में डीएम साहब ने लखनऊ रिपोर्ट भेजी है। वहां से अभी तक उनके पास रिपोर्ट नहीं पहुंची है। लखनऊ से जो भी आदेश आएंगे, उस पर तत्काल कार्रवाई होगी। एकाउंट विभाग पर नजर रखी जा रही है। -डॉ पीएस मिश्रा, सीएमओ, मुजफ्फरनगर।