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कोई अधिकारी दिलासा देने नहीं पहुंचा
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कोई अधिकारी दिलासा देने नहीं पहुंचा
मुजफ्फरनगर। बदलते सामाजिक हालात की यह एक दुखदायी तस्वीर है, जिसमें मुफलिसी का कोई रहबर दूर तक नजर नहीं आया। एक ही गांव के चार युवाओं की सड़क हादसे में मौत होने के बावजूद किसी जनप्रतिनिधि ने इन परिवारों की कोई सुध नहीं ली। कोई अफसर भी पीड़ित परिवारों को सांत्वना देने पीपलहेड़ा तक नहीं पहुंचा।
गांव पीपलहेड़ा के चार युवकों की सहारनपुर जनपद में हुए हादसे में मौत की घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। गांव निवासी अनुसूचित जाति के तीन परिवार, जिनके पास न तो परवरिश करने वाला न खेत है। आय का कोई भी अन्य जरिया भी नहीं। सभी परिवार ईंट-भट्ठों पर आठ माह तक मजदूरी कर साल भर का राशन जुटाने की जद्दोजहद करते हैं। इनमें से दो परिवार, जिनके तीन सदस्य मौत के मुंह में समा गए, उनमें कोई कमाने-खाने वाला तक नहीं बचा। तंगहाली में जीवन जी रहे इन दोनों परिवारों के वृद्ध मां-बाप, युवा महिलाएं व छोटे बच्चों का भविष्य में क्या होगा, कौन इनका पालनहार बनेगा, क्या इन्हें किसी तरह की आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी, इस संबंध में किसी जनप्रतिनिधि का कोई बयान तक नहीं आया। किसी अफसर ने भी गांव में जाकर इन श्रमिकों के परिवार के सदस्यों को सांत्वना देने तक नहीं पहुंचा।
पूर्व विधायक व किसान नेता ने ही पीड़ित परिवारों के पोंछे आंसू
तितावी। गांव पीपलहेड़ा में चार लोगों की हादसे में मौत के बाद उनके परिवारों को सांत्वना देने के लिए पहुंचने वाले लोगों में केवल पूर्व पुरकाजी विधायक अनिल कुमार और सपा नेता मुकेश चौधरी ही शामिल रहे। इनके अलावा, भारतीय किसान संगठन के अध्यक्ष ठाकुर पूरण सिंह भी गांव में पहुंचे। पुलिस-प्रशासन की ओर से केवल थाना तितावी एसएसआई वीरेंद्र यादव शवों के अंतिम संस्कार के समय गांव में मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर। बदलते सामाजिक हालात की यह एक दुखदायी तस्वीर है, जिसमें मुफलिसी का कोई रहबर दूर तक नजर नहीं आया। एक ही गांव के चार युवाओं की सड़क हादसे में मौत होने के बावजूद किसी जनप्रतिनिधि ने इन परिवारों की कोई सुध नहीं ली। कोई अफसर भी पीड़ित परिवारों को सांत्वना देने पीपलहेड़ा तक नहीं पहुंचा।
गांव पीपलहेड़ा के चार युवकों की सहारनपुर जनपद में हुए हादसे में मौत की घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। गांव निवासी अनुसूचित जाति के तीन परिवार, जिनके पास न तो परवरिश करने वाला न खेत है। आय का कोई भी अन्य जरिया भी नहीं। सभी परिवार ईंट-भट्ठों पर आठ माह तक मजदूरी कर साल भर का राशन जुटाने की जद्दोजहद करते हैं। इनमें से दो परिवार, जिनके तीन सदस्य मौत के मुंह में समा गए, उनमें कोई कमाने-खाने वाला तक नहीं बचा। तंगहाली में जीवन जी रहे इन दोनों परिवारों के वृद्ध मां-बाप, युवा महिलाएं व छोटे बच्चों का भविष्य में क्या होगा, कौन इनका पालनहार बनेगा, क्या इन्हें किसी तरह की आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी, इस संबंध में किसी जनप्रतिनिधि का कोई बयान तक नहीं आया। किसी अफसर ने भी गांव में जाकर इन श्रमिकों के परिवार के सदस्यों को सांत्वना देने तक नहीं पहुंचा।
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पूर्व विधायक व किसान नेता ने ही पीड़ित परिवारों के पोंछे आंसू
तितावी। गांव पीपलहेड़ा में चार लोगों की हादसे में मौत के बाद उनके परिवारों को सांत्वना देने के लिए पहुंचने वाले लोगों में केवल पूर्व पुरकाजी विधायक अनिल कुमार और सपा नेता मुकेश चौधरी ही शामिल रहे। इनके अलावा, भारतीय किसान संगठन के अध्यक्ष ठाकुर पूरण सिंह भी गांव में पहुंचे। पुलिस-प्रशासन की ओर से केवल थाना तितावी एसएसआई वीरेंद्र यादव शवों के अंतिम संस्कार के समय गांव में मौजूद रहे।
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