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Muzaffarnagar News: व्यापारी आजाद की हत्या में भतीजे राहुल को आजीवन कारावास

Sun, 05 Jul 2026 12:54 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jul 2026 12:54 AM IST
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Nephew Rahul sentenced to life imprisonment for the murder of businessman Azad.
मुजफ्फरनगर। छपार के व्यापारी आजाद उर्फ चंचल (48) की प्लॉट के विवाद में नौ साल पहले हुई हत्या के मामले में अदालत ने उसके भतीजे राहुल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। गवाहों के पक्षद्रोही होने पर अदालत ने नई दिल्ली के लोधी रोड पर 27 साल पहले बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन केस की नजीर दी। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-03 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने फैसला सुनाया। एक लाख पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया।
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छपरा गांव का रहने वाला बेऔलाद आजाद उर्फ चंचल छपार में इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान करता था। दुकान पर उसके साथ काम करने वाले भतीजे राहुल के साथ प्लॉट खरीदने को लेकर विवाद हुआ। सलेमपुर निवासी वादी संजय ने छह जनवरी 2017 को प्राथमिक दर्ज कराई कि शाम करीब साढ़े सात बजे बाइक पर सवार होकर दुकान से घर लौटते हुए भतीजे राहुल ने तमंचे से गोली मारकर चंचल की हत्या कर दी।
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पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मुजफ्फरनगर में प्लॉट खरीदने का विवाद हत्या की वजह बना। पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 12 गवाह पेश किए।
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अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-03 में शनिवार को अभियुक्त पर दोष सिद्ध हुआ। अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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इसलिए की गई थी चाचा की हत्या
छपरा निवासी चंचल और उसकी पत्नी कविता बेऔलद थे। इसी वजह से चंचल के भाई प्रहलाद का बेटा राहुल उसके पास रहने लगा। दोनों छपार में दुकान पर भी साथ ही आते थे। चंचल ने मुजफ्फरनगर में अपनी पत्नी के नाम प्लॉट खरीदने की योजना बनाई। अभियुक्त का कहना था कि प्लॉट उसके या उसकी पत्नी के नाम से खरीदा जाना चाहिए। इसी बात को लेकर विवाद हुआ। ट्रायल के दौरान अभियुक्त पर चाची को धमकाने का मामला भी सामने आया था।

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संजीव नंदा के बीएमडब्ल्यू हिट एंड रन केस की नजीर
अदालत ने फैसले में 27 साल पहले दिल्ली के संजीव नंदा केस की नजीर दी। सुप्रीम कोर्ट की ओर प्रतिपादित विधिक सिद्धांत फैसले में लिखा, जिसमें कहा गया कि गवाह का पक्षद्रोही होना एक ऐसा पीड़ा दायक बिंदु है, जिसका भारत के आपराधिक न्यायालयों को सामना करना पड़ता है। गवाहों के पक्षद्रोही हो जाने के अनेक कारण हैं। अब कुछ दिनों से विशेषकर हाईप्रोफाइल मामलों में गवाह नियमित रूप से पक्षद्रोही हो रहे हैं। जनता में यह भावना उत्पन्न हो रही है कि अभियुक्त और बलशाली व्यक्ति कानून के शिकंजे से बच निकलते हैं। न्यायालयों को वास्तविकता से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए, यदि कोई गवाह न्यायिक प्रक्रिया को तोड़ने के लिए या नष्ट करने के लिए पक्षद्रोही हुआ है, तब न्यायालयों को मूक दर्शक बनकर नहीं रहना चाहिए और न्यायालय के द्वारा प्रत्येक कोशिश अभिलेख पर सत्य लाने के लिए की जानी चाहिए।
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