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दमकल विभाग के पास नहीं एनओसी का डाटा, सभी स्थानों पर नहीं आग बुझाने वाले संयत्र
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नगर में संस्था द्वारा बनाया गया वाटर टैंक।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। जनपद में आग लगने की दशा के मद्देनजर बड़ी लापरवाही बरती जा रही है। जनपद में छोटी बड़ी लगभग सात सौ फैक्टरी है। जिनमें लाखों करोड़ों की लागत लगी है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर अधिकांश फैक्टरी में आग बुझाने वाले संयंत्र व उपकरण नहीं लगाए गए हैं। दमकल टीम द्वारा निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। एनओसी का डाटा भी दमकल विभाग के पास नहीं है।
राष्ट्रीय भवन कोड की गाइडलाइन
राष्ट्रीय भवन कोड के तहत ही सभी जगह पर भवन, होटल, फैक्टरी बनाई जाती है। निर्माण के लिए एक गाइड लाइन जारी की है। लेकिन यहां पर राष्ट्रीय भवन कोड की गाइड लाइन को दरकिनार कर प्रतिष्ठान व फैक्टरी खड़ी की गई है।
आग्निकांड में सबसे संवेदनशील औद्योगिक क्षेत्र
जनपद के औद्योगिक क्षेत्र में लगभग छोटी बड़ी सात सौ से ज्यादा फैक्टरी है। कुछ संस्थान तो ऐसे है, जहां पर निर्माण नहीं होता, बल्कि माल मंगाकर उसे पेक किया जाता है। लेकिन आग के मद्देनजर कोई इंतजाम नहीं हैं। जांच में ऐसे काफी संस्थान मिल जाएंगे।
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यह नियम है लागू
अस्पताल
चार मंजिल वाले दस मीटर से ज्यादा क्षेत्र में फैले अस्पताल के लिए, जिसमें मरीज को भर्ती करने के लिए बेड भी है, वहां पर कम से कम 70 हजार लीटर पानी वाला टैंक, एक हजार वर्ग मीटर वाले अस्पताल में एक लाख लीटर वाला पानी का टेंक होना जरूरी है। साथ ही हर स्थान पर पंप, हाईडेंट वाल्व लगी होनी चाहिए। बिजली लाइन से दूरी बनाए रखनी होगी।
होटल
छोटा होटल होने की दशा में पांच हजार लीटर वाला टैंक व हाईडेंट वाल्व, पंप व आग बुझाने वाले संयत्र सिलेंडर लगे होने चाहिए। बडे होटलों पर अस्पताल वाले नियम लागू होंगे।
स्कूल
सभी स्कूलों में पांच हजार लीटर वाला पानी का टैंक के साथ ही आग बुझाने वाले उपकरण सिलेंडर जरूर लगाएं। तेज प्रेशर वाला पाइप, हाईडेंट वाल्व, पंप भी हो।
फैक्टरी
एक बड़ी फैक्टरी में कम से कम एक लाख लीटर वाला पानी का टैंक, थोड़ी थोड़ी दूरी पर हाईडेंट वाल्व, पंप, नलकूप, जरूर होना चाहिए। अपना फायर टैंकर भी हो।
दो फैक्टरी में लगी आग ने खोली पोल
एक पखवाड़ा पूर्व बुढ़ाना में रबर के टायरों से तेल निकालने वाली फैक्टरी व सिखेडा क्षेत्र में जोली रोड पर एक पेपर मिल में आग लगी थी। दोनों ही स्थानों पर आग बुझाने की कोई व्यवस्था नहीं थी।
इन्होंने कहा
फैक्टरी, होटल, स्कूल आदि सभी प्रतिष्ठानों को राष्ट्रीय भवन कोड के नियम पूरे करने पर एनओसी दी जाती है। वार्षिक निरीक्षण व जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है- कुमार रमा शंकर तिवारी, सीएफओ।
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राष्ट्रीय भवन कोड की गाइडलाइन
राष्ट्रीय भवन कोड के तहत ही सभी जगह पर भवन, होटल, फैक्टरी बनाई जाती है। निर्माण के लिए एक गाइड लाइन जारी की है। लेकिन यहां पर राष्ट्रीय भवन कोड की गाइड लाइन को दरकिनार कर प्रतिष्ठान व फैक्टरी खड़ी की गई है।
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आग्निकांड में सबसे संवेदनशील औद्योगिक क्षेत्र
जनपद के औद्योगिक क्षेत्र में लगभग छोटी बड़ी सात सौ से ज्यादा फैक्टरी है। कुछ संस्थान तो ऐसे है, जहां पर निर्माण नहीं होता, बल्कि माल मंगाकर उसे पेक किया जाता है। लेकिन आग के मद्देनजर कोई इंतजाम नहीं हैं। जांच में ऐसे काफी संस्थान मिल जाएंगे।
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यह नियम है लागू
अस्पताल
चार मंजिल वाले दस मीटर से ज्यादा क्षेत्र में फैले अस्पताल के लिए, जिसमें मरीज को भर्ती करने के लिए बेड भी है, वहां पर कम से कम 70 हजार लीटर पानी वाला टैंक, एक हजार वर्ग मीटर वाले अस्पताल में एक लाख लीटर वाला पानी का टेंक होना जरूरी है। साथ ही हर स्थान पर पंप, हाईडेंट वाल्व लगी होनी चाहिए। बिजली लाइन से दूरी बनाए रखनी होगी।
होटल
छोटा होटल होने की दशा में पांच हजार लीटर वाला टैंक व हाईडेंट वाल्व, पंप व आग बुझाने वाले संयत्र सिलेंडर लगे होने चाहिए। बडे होटलों पर अस्पताल वाले नियम लागू होंगे।
स्कूल
सभी स्कूलों में पांच हजार लीटर वाला पानी का टैंक के साथ ही आग बुझाने वाले उपकरण सिलेंडर जरूर लगाएं। तेज प्रेशर वाला पाइप, हाईडेंट वाल्व, पंप भी हो।
फैक्टरी
एक बड़ी फैक्टरी में कम से कम एक लाख लीटर वाला पानी का टैंक, थोड़ी थोड़ी दूरी पर हाईडेंट वाल्व, पंप, नलकूप, जरूर होना चाहिए। अपना फायर टैंकर भी हो।
दो फैक्टरी में लगी आग ने खोली पोल
एक पखवाड़ा पूर्व बुढ़ाना में रबर के टायरों से तेल निकालने वाली फैक्टरी व सिखेडा क्षेत्र में जोली रोड पर एक पेपर मिल में आग लगी थी। दोनों ही स्थानों पर आग बुझाने की कोई व्यवस्था नहीं थी।
इन्होंने कहा
फैक्टरी, होटल, स्कूल आदि सभी प्रतिष्ठानों को राष्ट्रीय भवन कोड के नियम पूरे करने पर एनओसी दी जाती है। वार्षिक निरीक्षण व जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है- कुमार रमा शंकर तिवारी, सीएफओ।