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ऋषि दयानंद के आदर्शों से बढ़ा राष्ट्र का गौरव : गुरुदत्त
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एमडीएस विद्या मन्दिर इण्टर कॉलिज, मन्सूरपुर में महर्षि दयानन्द सरस्वती की 199 वीं जयंती धूमधाम
- महान समाज सुधारक की 200 वीं जयंती पर नमन, यज्ञ में दी आहुतियां
- आर्य समाज द्वारा जिले भर में कार्यक्रम आयोजित
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। महान समाज सुधारक, वेदों के पुर्नउद्धारक, आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती की 200 वीं जयंती पर यज्ञ में आहुतियां अर्पित की गई। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि ऋषि दयानंद के आदर्शों, सिद्धांतों से विश्व में भारत का गौरव बढ़ा है।
संतोष विहार स्थित वैदिक संस्कार चेतना केंद्र पर आयोजित समारोह का शुभारंभ देव यज्ञ से हुआ। ब्रह्म डॉ. नीरज शास्त्री एवं यज्ञमान अथर्व और लक्ष्य देव रहे। प्रवचन में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि ऋषि दयानंद ने वेदों के सत्य ज्ञान, यज्ञ और योग से राष्ट्र को जोड़कर हिंदुओं की रक्षा की। उनकी राष्ट्रभक्ति और सदाचरण अतुलनीय है। शुकतीर्थ से पधारे स्वामी ऋतानन्द सरस्वती ने कहा कि महर्षि ने पाखंड, अंधविश्वास और कुरीतियों में घिरे देश में सनातन वैदिक धर्म की अलख जगाई थी। स्वामी योगानन्द ने कहा कि वेदों की वाणी घर-घर गूंजेगी, तभी धर्म और संस्कृति की रक्षा संभव है। ऋषि ग्रन्थों को युवा पढ़े।
खतौली से आए राजपाल आर्य ने कहा कि ऋषि दयानंद और गुरु विरजानन्द ने 1857 की प्रथम क्रांति की नींव रखी थी। आरपी शर्मा ने कहा कि ऋषि संयमी, तपस्वी महापुरुष थे, जिन्होंने लोकोपकार को जीवन बलिदान किया। वैध मोहर सिंह आर्य तथा गजेंद्र राणा ने महर्षि की महिमा के भजन प्रस्तुत किए। विनीत आर्य, स्वामी धर्ममुनि, मुकेश आर्य, आनंद पाल सिंह आर्य, जनेश्वर प्रसाद आर्य, अनूप सिंह, पूर्व प्रवक्ता गजेंद्र पाल सिंह, आत्मा राम धीमान, देवेंद्र राणा, दीपक कुमार, ओम प्रकाश धीमान, सुघोष आर्य, डॉ. प्रदीप आर्य, योगेश्वर दयाल, डॉ. जीत सिंह तोमर, शिव कुमार शर्मा, वेदपाल सिंह, पूर्व एबीएसए सहदेव सिंह, योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह आर्य, पुरोहित सत्यव्रत आर्य, पूर्व प्रधानाचार्य विजय कुश, शिक्षक पुष्पेंद्र कुमार। थानाभवन के जलालाबाद से आये कुलदीप आर्य, लक्ष्मीचंद, रत्न सिंह, पुरकाजी से आए सोमपाल सिंह आदि ने भाग लिया। संचालन यज्ञदत्त आर्य ने किया।
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संतों, आचार्यों और पुरोहितों का करें सम्मान
वैदिक संस्कृति के प्रसार प्रचार में जुटे शुकतीर्थ के स्वामी ऋतानन्द सरस्वती को आचार्य गुरुदत्त आर्य ने वस्त्र और सम्मानित राशि भेंट की। आचार्य ने कहा कि संतों, आचार्यो और पुरोहितों का सदैव सम्मान करें। थानाभवन के जलालाबाद कस्बे से आये कुलदीप आर्य, लक्ष्मीचंद आर्य, रत्न सिंह, पुरकाजी से आए सोमपाल सिंह आर्य आदि ने भाग लिया। विकास कौशिक की ओर से श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। विदुषी आर्या, रेणु शर्मा, सुनीता शर्मा आदि ने यज्ञ में आहुतियां दी।
क्रांतिकारियों के प्रेरक थे महर्षि
मुजफ्फरनगर। आर्य समाज गांधी कालोनी में युग प्रवर्तक महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती पर यज्ञ में आहुतियां दी गई। ब्रह्म इंद्र पाल सिंह आर्य एवं विपिन गर्ग तथा यज्ञमान बड़कली इंटर कऍलेज के प्रधानाचार्य अवनीश त्यागी रहे। विजय पाल सिंह, आचार्य दयाचंद, जय सिंह धीमान, अशोक राठी, गजेंद्र सिंह राणा, संगीता राठी, कांता, ओमवती आदि ने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में ऋषि दयानंद की प्रेरणा से लाला लाजपत राय, शहीद भगत सिंह, वीर सावरकर, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, मदन लाल ढिंगरा, लाला हरदयाल, स्वामी श्रद्धानन्द जैसे क्रांतिकारियों ने जीवन की आहुति दी थी।
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- आर्य समाज द्वारा जिले भर में कार्यक्रम आयोजित
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। महान समाज सुधारक, वेदों के पुर्नउद्धारक, आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती की 200 वीं जयंती पर यज्ञ में आहुतियां अर्पित की गई। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि ऋषि दयानंद के आदर्शों, सिद्धांतों से विश्व में भारत का गौरव बढ़ा है।
संतोष विहार स्थित वैदिक संस्कार चेतना केंद्र पर आयोजित समारोह का शुभारंभ देव यज्ञ से हुआ। ब्रह्म डॉ. नीरज शास्त्री एवं यज्ञमान अथर्व और लक्ष्य देव रहे। प्रवचन में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि ऋषि दयानंद ने वेदों के सत्य ज्ञान, यज्ञ और योग से राष्ट्र को जोड़कर हिंदुओं की रक्षा की। उनकी राष्ट्रभक्ति और सदाचरण अतुलनीय है। शुकतीर्थ से पधारे स्वामी ऋतानन्द सरस्वती ने कहा कि महर्षि ने पाखंड, अंधविश्वास और कुरीतियों में घिरे देश में सनातन वैदिक धर्म की अलख जगाई थी। स्वामी योगानन्द ने कहा कि वेदों की वाणी घर-घर गूंजेगी, तभी धर्म और संस्कृति की रक्षा संभव है। ऋषि ग्रन्थों को युवा पढ़े।
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खतौली से आए राजपाल आर्य ने कहा कि ऋषि दयानंद और गुरु विरजानन्द ने 1857 की प्रथम क्रांति की नींव रखी थी। आरपी शर्मा ने कहा कि ऋषि संयमी, तपस्वी महापुरुष थे, जिन्होंने लोकोपकार को जीवन बलिदान किया। वैध मोहर सिंह आर्य तथा गजेंद्र राणा ने महर्षि की महिमा के भजन प्रस्तुत किए। विनीत आर्य, स्वामी धर्ममुनि, मुकेश आर्य, आनंद पाल सिंह आर्य, जनेश्वर प्रसाद आर्य, अनूप सिंह, पूर्व प्रवक्ता गजेंद्र पाल सिंह, आत्मा राम धीमान, देवेंद्र राणा, दीपक कुमार, ओम प्रकाश धीमान, सुघोष आर्य, डॉ. प्रदीप आर्य, योगेश्वर दयाल, डॉ. जीत सिंह तोमर, शिव कुमार शर्मा, वेदपाल सिंह, पूर्व एबीएसए सहदेव सिंह, योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह आर्य, पुरोहित सत्यव्रत आर्य, पूर्व प्रधानाचार्य विजय कुश, शिक्षक पुष्पेंद्र कुमार। थानाभवन के जलालाबाद से आये कुलदीप आर्य, लक्ष्मीचंद, रत्न सिंह, पुरकाजी से आए सोमपाल सिंह आदि ने भाग लिया। संचालन यज्ञदत्त आर्य ने किया।
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संतों, आचार्यों और पुरोहितों का करें सम्मान
वैदिक संस्कृति के प्रसार प्रचार में जुटे शुकतीर्थ के स्वामी ऋतानन्द सरस्वती को आचार्य गुरुदत्त आर्य ने वस्त्र और सम्मानित राशि भेंट की। आचार्य ने कहा कि संतों, आचार्यो और पुरोहितों का सदैव सम्मान करें। थानाभवन के जलालाबाद कस्बे से आये कुलदीप आर्य, लक्ष्मीचंद आर्य, रत्न सिंह, पुरकाजी से आए सोमपाल सिंह आर्य आदि ने भाग लिया। विकास कौशिक की ओर से श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। विदुषी आर्या, रेणु शर्मा, सुनीता शर्मा आदि ने यज्ञ में आहुतियां दी।
क्रांतिकारियों के प्रेरक थे महर्षि
मुजफ्फरनगर। आर्य समाज गांधी कालोनी में युग प्रवर्तक महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती पर यज्ञ में आहुतियां दी गई। ब्रह्म इंद्र पाल सिंह आर्य एवं विपिन गर्ग तथा यज्ञमान बड़कली इंटर कऍलेज के प्रधानाचार्य अवनीश त्यागी रहे। विजय पाल सिंह, आचार्य दयाचंद, जय सिंह धीमान, अशोक राठी, गजेंद्र सिंह राणा, संगीता राठी, कांता, ओमवती आदि ने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में ऋषि दयानंद की प्रेरणा से लाला लाजपत राय, शहीद भगत सिंह, वीर सावरकर, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, मदन लाल ढिंगरा, लाला हरदयाल, स्वामी श्रद्धानन्द जैसे क्रांतिकारियों ने जीवन की आहुति दी थी।

एमडीएस विद्या मन्दिर इण्टर कॉलिज, मन्सूरपुर में महर्षि दयानन्द सरस्वती की 199 वीं जयंती धूमधाम

एमडीएस विद्या मन्दिर इण्टर कॉलिज, मन्सूरपुर में महर्षि दयानन्द सरस्वती की 199 वीं जयंती धूमधाम