फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Naresh Tikait says Central government does not want to end the farmers movement

भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत बोले : केंद्र सरकार आंदोलन को खत्म कराना नहीं चाहती, विधानसभा चुनाव को लेकर कही बड़ी बात

Thu, 27 May 2021 12:50 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 27 May 2021 12:50 AM IST
सार

भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार आंदोलन को खत्म कराना नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि यदि कृषि कानून वापस नहीं लिए गए तो 2022 के विधानसभा चुनाव में भाकियू भाजपा का विरोध करेगी।

विज्ञापन
Naresh Tikait says Central government does not want to end the farmers movement
भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तीन कृषि कानून के विरोध में दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे किसान आंदोलन को छह माह हो गए। यह किसानों का अब तक का सबसे बड़ा आंदोलन है। आंदोलन के छह माह होने परे किसान संगठनों के साथ भाकियू ने भी बुधवार को काला दिवस मनाया।

विज्ञापन


भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार आंदोलन को खत्म कराना नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि यदि कृषि कानून वापस नहीं लिए गए तो 2022 के विधानसभा चुनाव में भाकियू भाजपा का विरोध करेगी।
विज्ञापन


भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने बातचीत के दौरान कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार को किसानों, मजदूरों और नौजवानों ने बड़ी उम्मीद के साथ बनाया था, लेकिन सरकार की हठधर्मिता के कारण आज किसान काला दिवस मनाने पर मजबूर है। अब किसान आगे भी अपनी लड़ाई को मजबूती के साथ लड़ेगा, हरेक गांव का दिल्ली बॉर्डर पर कैंप लगाया जाएगा, जिसमें बॉर्डर पर प्रत्येक गांव की उपस्थिति अनिवार्य होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

इस आंदोलन में अब तक सबसे बड़ी बात यह रही कि सरकार जिद्दी रवैया अपनाए हुए हैं। सरकार ने ऐसे बिल बनाए हैं, जिसमें किसान के साथ ही आम आदमी और मजदूर भी बर्बाद हो जाएगा। व्यापारियों को असीमित भंडारण की छूट दे रखी है।

कॉट्रेक्ट खेती में पूंजीपतियों की निगाह किसान की जमीन हड़पने पर है। केंद्र सरकार अपनी जिद छोड़कर किसान संयुक्त मोर्चा से सौहार्दपूर्ण तरीके से बात करे। तीन काले कानूनों को वापस ले। एमएसपी पर कानून बनाए। अन्यथा किसान वही बॉर्डर पर बैठा रहेगा। 

उन्होंने कहा कि यूपी में बिजली के रेट सबसे ज्यादा बढ़े हुए है और चीनी मिलों पर किसानों का 23 हजार करोड़ बकाया है। गन्ने का कोई रेट नहीं बढ़ा है। किस फार्मूले के तहत सरकार 2022 में किसानों की आमदनी दोगुनी करने का दावा कर रही थी। सरकार के अभी तक के किए गए सभी वादे झूठे साबित हुए हैं। किसानों की मांग पूरी नहीं होने पर भारतीय किसान यूनियन 2022 में यूपी में विधानसभा के होने वाले चुनाव में भाजपा का विरोध करेगी।

भाकियू अध्यक्ष ने कहा कि बॉर्डर पर किसान सर्दी गर्मी और बरसात के सभी मौसम भी देख चुका है। 400 से ज्यादा किसानों की शहादत भी हो चुकी है, लेकिन सरकार चुप बैठी है। किसान संयुक्त मोर्चे ने प्रधानमंत्री मोदी को वार्ता के लिए चिट्टी लिखी थी, लेकिन सरकार कि ओर से 25 मई तक कोई जवाब नहीं आया, इसलिए आज काला दिवस मनाना पड़ रहा है। इससे तो ऐसा लगता है कि इस सरकार को कोई पार्टी विशेष ना चलाकर कोई कारपोरेट घराना चला रहा हो। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed