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UP: पाकिस्तान के वारिस पर फिर चल सकता है मुकदमा, हाईकोर्ट में दोबारा रिट दाखिल, डीएम ने कहा- मुझे नहीं जानकारी

Tue, 24 May 2022 08:18 PM IST
कपिल kapil मदन बालियान, अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर
मदन बालियान, अमर उजाला ब्यूरो, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Tue, 24 May 2022 08:18 PM IST
सार

पाकिस्तान के वारिस और यूपी के अशफाक पर फिर से मुकदमा चल सकता है। इस मामले में दोबारा से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।

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Muzaffarnagar News: Waris of Pakistan and Ashfaq can be tried again and writ filed in High Court
अदालत। - फोटो : amar ujala

विस्तार

हाईकोर्ट के आदेश के बाद रिहा हुए जौला गांव के अशफाक उर्फ नन्हे और पाकिस्तान के नागरिक वारिस उर्फ राजा की मुश्किलें फिर से बढ़ सकती हैं। अभियोजन पक्ष शासन से अनुमति लेकर दोनों के खिलाफ ट्रायल शुरू कराने की तैयारी में है और हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उधर, शासन की अनुमति मिलने के बाद कैराना कोर्ट ने संबंधित पक्षों को तलब किया है। यहां 30 जून को सुनवाई होगी।  

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पुलिस ने 31 मार्च 2000 को गांव जौला से अशफाक और पाकिस्तान के गुजरावाला निवासी वारिस को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उस समय दावा किया था कि वारिस आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद से जुड़ा है और इन दोनों के पास से अवैध असलहा व हैंड ग्रेनेड बरामद हुआ है। 18 मई 2017 को एडीजे-7 ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जिला कारागार से अशफाक को आगरा और वारिस को बरेली जेल शिफ्ट कर दिया गया था। अशफाक की ओर से पैरवी कर चुके अधिवक्ता पवन सिंह पुंडीर ने बताया कि अशफाक की अपील पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी। 
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हाईकोर्ट ने पांच अगस्त 2019 को अशफाक और वारिस को बरी कर दिया था। इसकी वजह यह थी कि प्रशासन ने राष्ट्रद्रोह (धारा 121) का मुकदमा चलाने के लिए  सीआरपीसी की धारा 196(1) में राज्य सरकार की पूर्व अनुमति नहीं ली थी। अधिवक्ता ने बताया कि अब फिर से शासन की अनुमति लेकर दोबारा मुकदमा चलाने के लिए याचिका दाखिल की गई है, इसकी सुनवाई की तिथि तय नहीं हुई है। 
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22 साल बाद याद आई अनुमति, दोबारा मुकदमे का कानून नहीं
पुलिस-प्रशासन ने 22 साल पहले धारा 121 का मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार की अनुमति नहीं ली थी। तब जौला गांव शामली के कांधला थाना क्षेत्र में आता था और वर्तमान में बुढ़ाना क्षेत्र में है। अधिवक्ता पवन सिंह पुंडीर का कहना है कि दोबारा मुकदमा चलाने का कानून नहीं है। सुनवाई की तिथि तय होने पर अदालत ही इस पर अंतिम फैसला करेगी।

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जौला गांव में खेती कर रहा अशफाक
जौला गांव के अशफाक की मुलाकात वारिस से कांधला में एक परिचित के मकान पर हुई थी। बाद में वारिस जौला भी आने जाने लगा। इसी दौरान पुलिस ने उसे पकड़ लिया और अशफाक को भी आरोपी बनाया गया। अशफाक अपने गांव में इन दिनों खेती कर रहा है। मुकदमे में कांधला के गय्यूर अली, सरदार अली और मुस्तकीम भी आरोपी बनाए गए थे।

गिरफ्तारी के दौरान वारिस ने नाम बताया था असद
पुलिस ने जांच रिपोर्ट में लिखा था कि अशफाक के पास बैठे वारिस को पकड़ा तो पहले उसने खुद को जौला का ही असद बताया था। लेकिन पूछताछ के बाद साफ हुआ कि वह पाकिस्तानी नागरिक है।

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जेल से रिहा होकर पुलिस की निगरानी में वारिस
19 साल जेल में बिताने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर वारिस रिहा हुआ तो पाकिस्तान ने उसे अपना नागरिक मानने से इंकार कर दिया था। तब से वह शामली पुलिस की निगरानी में है। बताया जा रहा है कि उसे अलग-अलग थानों में रखा जाता है। फिलहाल उसके थाना बाबरी में होने की चर्चा है, लेकिन अधिकृत तौर पर इसकी कोई पुष्टि करने को तैयार नहीं है। एएसपी ओपी सिंह का कहना है कि थाने में कोई पाकिस्तानी नागरिक पुलिस की अभिरक्षा में है, इसकी मुझे कोई जानकारी नहीं है। डीएम जसजीत कौर का कहना है कि मेरी जानकारी में ऐसा कोई मामला नहीं है। न ही इस मामले में कोई पत्राचार मेरे द्वारा किया गया है।

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