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जिले में भी खूब हो रही नकली सॉस की खपत
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फौस्ट फूड कार्नर पर रखी सॉस की बोतल।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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जिले में भी खूब हो रही नकली सॉस की खपत
मुजफ्फरनगर। मेरठ में नकली टमेटो सॉस बनाने का मामला सामने आने के बाद जनपद के लोगों के भी कान खड़े हो गए हैं। यहां भी बड़े पैमाने पर मेरठ से टमेटो सॉस मंगाई जाती है। फास्ट फूड के साथ टमेटो सॉस का खूब इस्तेमाल किया जाता है। विक्रेता इन्हें प्लास्टिक की बोतलों में भरकर रखते हैं, जिस पर न तो कोई लेबल होता है और न ही यह पता लगता है कि सॉस किस कंपनी की है।
नगर में जहां-तहां चाऊमीन, बर्गर, मोमोज आदि फास्ट फूड के ठेले लगे नजर आते हैं। टाउन हाल, गांधी कॉलोनी, रुड़की रोड समेत कई क्षेत्र फास्ट फूड के लिए मशहूर हैं। शाम होते ही सड़कों के किनारे ठेले लग जाते हैं और देर रात तक लोग इन पर फास्ट फूड का आनंद लेते हैं। इन ठेलों पर जिस सॉस का इस्तेमाल होता है वह ज्यादातर प्लास्टिक की बोतल में भरकर रखी जाती है। इस पर किसी कंपनी का लेबल भी नहीं होता है। बताया जाता है कि जनपद में बड़े पैमाने पर मेरठ से टमेटो सॉस यहां लाकर खपाई जाती है। फास्ट फूड विक्रेता अनिल का कहना है कि टमेटो सॉस के अलावा सिरका, चिली सॉस, सोया सॉस का भी इस्तेमाल होता है। वह तो पंसारी की दुकान से यह सामान खरीदते हैं। पंसारी कहां से सॉस लाते हैं उन्हें इस बात की जानकारी नहीं।
सस्ते के चक्कर में नकली सॉस का इस्तेमाल
ब्रांडेड कंपनियों की टमेटो सॉस की एक लीटर की बोतल 95 रुपये से लेकर 130 रुपये तक की मिलती है। महंगी होने के कारण फास्टफूड विक्रेता इनका इस्तेमाल नहीं करते। वे 50 से 60 रुपये वाली टमेटो सॉस प्रयोग करते हैं। यह मिलावटी हो सकती है इस पर कोई गौर ही नहीं करता।
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मिलावटी पाए जाते हैं सॉस के नमूने
मुजफ्फरनगर। खाद्य सुरक्षा विभाग के प्रभारी अभिहीत अधिकारी विवेक कुमार बताते हैं कि विभाग खाद्य सामग्रियों की जांच के लिए जब भी अभियान चलता है, उसमें सॉस के नमूने भी लिए जाते हैं। इनमें कई बार टमेटो सॉस के नमूने फेल भी पाए हैं। इनमें कई तरह की मिलावट होने की पुष्टि हुई है। नमूने फेल होने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। वह सॉस के नमूनों से संबंधित पूरा रिकार्ड तैयार करा रहे हैं। साथ ही नमूने लेने के लिए भी अभियान चलाया जाएगा।
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मुजफ्फरनगर। मेरठ में नकली टमेटो सॉस बनाने का मामला सामने आने के बाद जनपद के लोगों के भी कान खड़े हो गए हैं। यहां भी बड़े पैमाने पर मेरठ से टमेटो सॉस मंगाई जाती है। फास्ट फूड के साथ टमेटो सॉस का खूब इस्तेमाल किया जाता है। विक्रेता इन्हें प्लास्टिक की बोतलों में भरकर रखते हैं, जिस पर न तो कोई लेबल होता है और न ही यह पता लगता है कि सॉस किस कंपनी की है।
नगर में जहां-तहां चाऊमीन, बर्गर, मोमोज आदि फास्ट फूड के ठेले लगे नजर आते हैं। टाउन हाल, गांधी कॉलोनी, रुड़की रोड समेत कई क्षेत्र फास्ट फूड के लिए मशहूर हैं। शाम होते ही सड़कों के किनारे ठेले लग जाते हैं और देर रात तक लोग इन पर फास्ट फूड का आनंद लेते हैं। इन ठेलों पर जिस सॉस का इस्तेमाल होता है वह ज्यादातर प्लास्टिक की बोतल में भरकर रखी जाती है। इस पर किसी कंपनी का लेबल भी नहीं होता है। बताया जाता है कि जनपद में बड़े पैमाने पर मेरठ से टमेटो सॉस यहां लाकर खपाई जाती है। फास्ट फूड विक्रेता अनिल का कहना है कि टमेटो सॉस के अलावा सिरका, चिली सॉस, सोया सॉस का भी इस्तेमाल होता है। वह तो पंसारी की दुकान से यह सामान खरीदते हैं। पंसारी कहां से सॉस लाते हैं उन्हें इस बात की जानकारी नहीं।
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सस्ते के चक्कर में नकली सॉस का इस्तेमाल
ब्रांडेड कंपनियों की टमेटो सॉस की एक लीटर की बोतल 95 रुपये से लेकर 130 रुपये तक की मिलती है। महंगी होने के कारण फास्टफूड विक्रेता इनका इस्तेमाल नहीं करते। वे 50 से 60 रुपये वाली टमेटो सॉस प्रयोग करते हैं। यह मिलावटी हो सकती है इस पर कोई गौर ही नहीं करता।
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मिलावटी पाए जाते हैं सॉस के नमूने
मुजफ्फरनगर। खाद्य सुरक्षा विभाग के प्रभारी अभिहीत अधिकारी विवेक कुमार बताते हैं कि विभाग खाद्य सामग्रियों की जांच के लिए जब भी अभियान चलता है, उसमें सॉस के नमूने भी लिए जाते हैं। इनमें कई बार टमेटो सॉस के नमूने फेल भी पाए हैं। इनमें कई तरह की मिलावट होने की पुष्टि हुई है। नमूने फेल होने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। वह सॉस के नमूनों से संबंधित पूरा रिकार्ड तैयार करा रहे हैं। साथ ही नमूने लेने के लिए भी अभियान चलाया जाएगा।