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सिटी मजिस्ट्रेट और चेयरपर्सन में ठनी

Tue, 31 Dec 2019 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 31 Dec 2019 12:15 AM IST
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Muzaffarnagar: City magistrate and chairperson rar
सिटी मजिस्ट्रेट और चेयरपर्सन में ठनी
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मुजफ्फरनगर। नगर पालिका चेयरपर्सन और सिटी मजिस्ट्रेट के बीच अब तक पर्दे के पीछे चल रही खींचतान सोमवार को खुलकर सामने आ गई। नगर पालिका पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट ने जांच के लिए कैश बुक एवं अन्य दस्तावेज दिखाने को कहा, तो चेयरपर्सन ने इंकार कर दिया। उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट पर नगर पालिका के कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया। इसे लेकर दोनों में तीखी बहस हुई। बाद में सिटी मजिस्ट्रेट बिना दस्तावेज देखे ही लौट गए।
सोमवार को सुबह करीब 11 बजे सिटी मजिस्ट्रेट अतुल कुमार नगर पालिका पहुंचे। पहले तो वे ईओ विनय कुमार मणि त्रिपाठी के कक्ष में बैठे रहे। उन्होंने कुछ फाइलें भी जांच के लिए मंगाई। एकाउंट से संबंधित दस्तावेज मांगने पर संबंधित लिपिक ने उन्हें बताया कि कैशबुक चेयरपर्सन के पास हैं। लिपिक को कैशबुक लेने के लिए भेजा गया। करीब एक बजे लिपिक के साथ चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल भी नगर पालिका आ गईं। पालिकाध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट को बताया कि इन दिनों 14वें वित्त की धनराशि से कार्य चल रहे हैं। पालिका का पूरा ध्यान इन कार्यों को पूरा कराने में है, क्योंकि 31 दिसंबर के बाद धनराशि लैप्स हो सकती है। इसलिए कैशबुक एवं अन्य दस्तावेज 31 दिसंबर के बाद देख लें। चेयरपर्सन का कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट ने एक जरूरी दस्तावेज की फोटो कापी भी ले रखी थी। उन्होंने फोटोकापी दिए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि उन्हें देखना है तो संबंधित फाइलें देख लें। फोटोकापी उन्हें कौन दे रहा है? इस बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। पालिका अध्यक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट पर नगर पालिका के कार्यों में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है।
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नगर पालिका की गई शिकायतों की जांच मैं कर रहा हूं। इसी सिलसिले में पालिका गया था। 14वें वित्त की धनराशि के लिए कमेटी बनी हुई है। निर्माण के बाद ही भुगतान होगा, लेकिन एकाउंटेंट के हस्ताक्षर के बिना चेयरपर्सन ने भुगतान के लिए अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं। ऐसी करीब 30 फाइलें हैं। उन्होंने लिपिक को कैशबुक दिखाने को कहा तो चेयरपर्सन भी उसके साथ आ गईं। उन्होंने कैशबुक और फाइलें दिखाने से इनकार कर दिया और कहा कि जो लिखना है लिख दें। प्रभारी अधिकारी स्थानीय निकाय होने के नाते मैं शिकायत की जांच कर सकता हूं।
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- अतुल कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट।
- नगर पालिका के कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप किया जा रहा है। यह सब कमीशन बाजी के लिए हो रहा है। मैं भ्रष्टाचार नहीं होने दूंगी। मुख्यमंत्री ने पालिकाओं को सेल्फ डिपेंड बनाने के लिए कहा है, लेकिन ऐसा होने नहीं दिया जा रहा। धनराशि खर्च करने को 31 दिसंबर तक का समय है, लेकिन उन्हें काम नहीं कराने दिया जा रहा। 14वें वित्त की धनराशि से जो कार्यों की सूची तैयार की गई थी उसे बदल दिया गया। जो सड़कें ठीक-ठाक हैं उन्हें बनवाने के लिए सूूची में शामिल कर दी गईं। मैं यह भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी नहीं होने दूंगी। लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री से मिलूंगी।
- अंजू अग्रवाल, चेयरपर्सन, नगर पालिका।
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