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चुनाव से जुड़ी है कई बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा, आंखों में कटी रात, जीत का आखिरी दांव
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 25 Nov 2017 11:52 PM IST
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चुनाव की तैयारियों का जायजा लेते अधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरनगर नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में जीत की आखिरी बाजी के लिए सभी प्रत्याशियों ने अपनी बिसात बिछा ली है। चुनाव की जीत कई नेताओं की प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है। भाजपा किसी भी कीमत पर अपनी जीत का सिलसिला बरकरार रखना चाहती है। वहीं, सपा ने भी अति पिछड़ा वर्ग कार्ड खेला हुआ है, जबकि बसपा और कांग्रेस ने भी जीत के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
आजादी के बाद पहली बार नगरपालिका में महिला चेयरमैन चुनी जाएगी। भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा जीत के लिए दिनभर वोटों को समेटने की कवायद में लगी रहीं। अनुभवी पार्टी पदाधिकारियों और बूथवार वोटों के जानकारों के साथ प्रत्याशियों और पार्टियों के बड़े नेताओं ने रणनीति बनाई। किस प्रत्याशी को किस जाति और धर्म का वोट कितना मिल सकता है, इसको लेकर जद्दोजहद रही।
भाजपा प्रत्याशी सुधाराज शर्मा की जीत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान, शहर विधायक कपिलदेव अग्रवाल और अरविंदराज शर्मा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है। केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार होना भी एक कारण है। अनुकूल माहौल में भाजपा अपनी जीत का प्रवाह बनाए रखना चाहती है। संसदीय, विधानसभा और जिला पंचायत चुनाव में भाजपा की हैट्रिक बनी थी।
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अतिपिछड़ों का रुझान पिछले चुनावों में भाजपा की ओर था, अबकी बार जिलाध्यक्ष रुपेंद्र सैनी पर पिछड़ों को भाजपा के साथ बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी है। राजनीतिक दृष्टि से भाजपा की जीत के कई मायने रहेंगे। कांग्रेस के निवर्तमान चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने बदली रणनीति में अपनी चाची अंजू अग्रवाल को चुनाव में उतार कर भाजपा को चुनौती दे रखी है। मतदाताओं की संख्या के लिहाज से मुस्लिम और वैश्य पहले और दूसरे स्थान पर हैं।
कांग्रेस का पूरा दारोमदार इन्हीं वोटों पर है। पूर्व सांसद सईदुजमा, हरेंद्र मलिक, पूर्व विधायक सोमांश प्रकाश, पूर्व मंत्री दीपक कुमार जैसे वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस के लिए ताकत लगा रखी है। पूर्व विधायक मिथलेश पाल को प्रत्याशी बनाकर सपा ने अतिपिछड़ा कार्ड खेला है।
सपा के परंपरागत वोटबैंक मुस्लिमों और अतिपिछड़ों के सहारे सपा पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव जीतना चाहती है। सपा के लिए वैश्य मतों को उम्मीदवार के पक्ष में डलवाने की पार्टी जिलाध्यक्ष गौरव स्वरूप पर अहम जिम्मेदारी है। शहरी क्षेत्र में सपा का वैश्य चेहरा वही हैं। पूर्व राज्यमंत्री मुकेश चौधरी, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी, सतेंद्र सैनी, पूर्व मंत्री उमा किरण आदि प्रतिष्ठा भी दांव पर है।
बसपा एकमात्र पार्टी है, जिसने पालिका चुनाव में मुस्लिम को प्रत्याशी बनाया है। बसपा नेता जियाउर्रमान की पत्नी मुदस्सिर की जीत के लिए बामसेफ कैडर ने रणनीति बनाई है। बसपा के चुनाव का जिम्मा बामसेफ से जुड़े सतप्रकाश और उनकी टीम पर है। पूर्व सांसद राजपाल सैनी, पूर्व विधायक अनिल कुमार, बसपा जिलाध्यक्ष रामनिवास पाल आदि की परीक्षा की घड़ी है।
नवाजुद्दीन की मेहनत कितनी काम आएगी
मशहूर फिल्म अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी की प्रतिष्ठा बुढ़ाना नगर पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव से जुड़ी है। उनकी भाभी सबा सिद्दीकी सपा के टिकट पर चुनाव मैदान में है। सपा की जीत के लिए नवाजुद्दीन ने बीते दो दिन से कसबे में रोड शो और जनसभाएं कीं। हेलिकॉप्टर से बुढ़ाना पहुंचे नवाज ने युवाओं को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
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आजादी के बाद पहली बार नगरपालिका में महिला चेयरमैन चुनी जाएगी। भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा जीत के लिए दिनभर वोटों को समेटने की कवायद में लगी रहीं। अनुभवी पार्टी पदाधिकारियों और बूथवार वोटों के जानकारों के साथ प्रत्याशियों और पार्टियों के बड़े नेताओं ने रणनीति बनाई। किस प्रत्याशी को किस जाति और धर्म का वोट कितना मिल सकता है, इसको लेकर जद्दोजहद रही।
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भाजपा प्रत्याशी सुधाराज शर्मा की जीत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान, शहर विधायक कपिलदेव अग्रवाल और अरविंदराज शर्मा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनी हुई है। केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार होना भी एक कारण है। अनुकूल माहौल में भाजपा अपनी जीत का प्रवाह बनाए रखना चाहती है। संसदीय, विधानसभा और जिला पंचायत चुनाव में भाजपा की हैट्रिक बनी थी।
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अतिपिछड़ों का रुझान पिछले चुनावों में भाजपा की ओर था, अबकी बार जिलाध्यक्ष रुपेंद्र सैनी पर पिछड़ों को भाजपा के साथ बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी है। राजनीतिक दृष्टि से भाजपा की जीत के कई मायने रहेंगे। कांग्रेस के निवर्तमान चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने बदली रणनीति में अपनी चाची अंजू अग्रवाल को चुनाव में उतार कर भाजपा को चुनौती दे रखी है। मतदाताओं की संख्या के लिहाज से मुस्लिम और वैश्य पहले और दूसरे स्थान पर हैं।
कांग्रेस का पूरा दारोमदार इन्हीं वोटों पर है। पूर्व सांसद सईदुजमा, हरेंद्र मलिक, पूर्व विधायक सोमांश प्रकाश, पूर्व मंत्री दीपक कुमार जैसे वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस के लिए ताकत लगा रखी है। पूर्व विधायक मिथलेश पाल को प्रत्याशी बनाकर सपा ने अतिपिछड़ा कार्ड खेला है।
सपा के परंपरागत वोटबैंक मुस्लिमों और अतिपिछड़ों के सहारे सपा पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव जीतना चाहती है। सपा के लिए वैश्य मतों को उम्मीदवार के पक्ष में डलवाने की पार्टी जिलाध्यक्ष गौरव स्वरूप पर अहम जिम्मेदारी है। शहरी क्षेत्र में सपा का वैश्य चेहरा वही हैं। पूर्व राज्यमंत्री मुकेश चौधरी, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रमोद त्यागी, सतेंद्र सैनी, पूर्व मंत्री उमा किरण आदि प्रतिष्ठा भी दांव पर है।
बसपा एकमात्र पार्टी है, जिसने पालिका चुनाव में मुस्लिम को प्रत्याशी बनाया है। बसपा नेता जियाउर्रमान की पत्नी मुदस्सिर की जीत के लिए बामसेफ कैडर ने रणनीति बनाई है। बसपा के चुनाव का जिम्मा बामसेफ से जुड़े सतप्रकाश और उनकी टीम पर है। पूर्व सांसद राजपाल सैनी, पूर्व विधायक अनिल कुमार, बसपा जिलाध्यक्ष रामनिवास पाल आदि की परीक्षा की घड़ी है।
नवाजुद्दीन की मेहनत कितनी काम आएगी
मशहूर फिल्म अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी की प्रतिष्ठा बुढ़ाना नगर पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव से जुड़ी है। उनकी भाभी सबा सिद्दीकी सपा के टिकट पर चुनाव मैदान में है। सपा की जीत के लिए नवाजुद्दीन ने बीते दो दिन से कसबे में रोड शो और जनसभाएं कीं। हेलिकॉप्टर से बुढ़ाना पहुंचे नवाज ने युवाओं को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।