फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   MP Dr. Sanjeev Balian

भाजपा के लिए अब  रालोद और भाकियू गढ़ को साधना होगी बड़ी चुनौती

Mon, 04 Sep 2017 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Mon, 04 Sep 2017 12:39 AM IST
विज्ञापन
MP Dr. Sanjeev Balian
भाजपा सांसद डॉ. संजीव बालियान। - फोटो : अमर उजाला
 केंद्रीय मंत्रिमंडल में भाजपा हाईकमान ने सिर्फ जाट राजनीति का चेहरा बदला है, वेस्ट यूपी से जाट प्रतिनिधित्व बरकरार रहा है। मोदी सरकार में राज्यमंत्री बनाए गए डॉ सत्यपाल सिंह को वे विभाग भी दिए गए हैं, जिनके मंत्री डाक्टर संजीव बालियान थे। रालोद और भाकियू के गढ़ में   जाटों को साधे रखने की चुनौती मुंबई के पूर्व कमिश्नर सत्यपाल सिंह के लिए आसान नहीं है। 
विज्ञापन


बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा और आगरा की जाट बेल्ट में सियासत की धुरी काफी हद तक खापों और उनके मुखियाओं के इर्द गिर्द घूमती रही है। रालोद और भाकि यू फैक्टर भी इसमें काफी महत्वपूर्ण है। दंगों के बाद 2014 में बने माहौल जाटों का इकतरफा समर्थन भाजपा को मिला था। तभी भी सरकार बनने पर  पूर्व नौकरशाह डाक्टर सत्यपाल सिंह को मंत्री मंडल में जगह मिलने चर्चाएं चली थी लेकिन बाजी डाक्टर संजीव बालियान मार ले गए थे।
विज्ञापन


उस समय संघ का भी साथ डाक्टर संजीव बालियान को मिला था। तीन वर्ष मोदी सरकार में राज्यमंत्री का जिम्मा संभाल चुके डॉक्टर बालियान से इस्तीफा ले लिया गया और मिशन 2019 में जुटी मोदी सरकार में नए जाट चेहरे डाक्टर सत्यपाल सिंह को आगे किया गया है। जाट बेल्ट में वोट गणित को साधने के लिए मोदी और शाह ने डॉ सत्यपाल सिंह को बालियान के मंत्रालयों के साथ मानव संसाधन विकास मंत्रालय का जिम्मा भी सौंपा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


वैसे भी जल संसाधन और नदी विकास मंत्रालय में मोदी सरकार ने वेस्ट यूपी में जो प्रोजेक्ट प्रारंभ किए है, मोदी उनकी गति को बनाए रखना चाहते हैं। गन्ना बकाया भुगतान और बिजली की समस्याएं अब उतनी पेचीदी नहीं है। भाकियू के पास मुद्दे कम है। बालियान के मुजफ्फरनगर सांसद होने की वजह से भाकियू का रुख नरम ही बना रहा। देखने की बात यह होगी कि डॉ सत्यपाल सिंह कैसे भाकियू और खाप चौधरियों के बीच समन्वय बनाते है। 

सत्यपाल सिंह के बहाने, मोदी ने साधे तीन निशाने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसद डॉ सत्यपाल सिंह को मानव संसाधन, जल संसाधन और नदी विकास राज्यमंत्री बनाकर एक तीर से तीन निशाने साधे हैं। एक गढ़ में ही रालोद की वापसी रोकने के लिए उन्हें ताकत दी गई, दूसरे सरकार में वेस्ट यूपी से जाट बिरादरी का प्रतिनिधित्व बरकरार रहा और तीसरा करीब 30 साल की उनकी पुलिस सेवा के अनुभव का लाभ उठाने की तैयारी। केंद्र सरकार के दो साल बचे हैं, चुनौतियां अधिक हैं। भाजपा का दांव किस करवट बैठेगा, इसको लेकर सियासी हल्कों में कयास शुरू हो गए हैं। 

केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ सत्यपाल सिंह दूसरे भाजपा सांसद है, जो रालोद के गढ़ बागपत से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे। उन्होंने बड़े अंतर से चौधरी अजित सिंह को हराया था। इस चुनाव में रालोद मुखिया अजित सिंह तीसरे स्थान पर रहे थे। दो साल बाद फिर चुनाव है। बागपत में सियासत का इतिहास बताता है कि 1998 के लोकसभा चुनाव में चौधरी अजित सिंह को हराकर रालोद के किले में सेंध लगाई थी, लेकिन अगले साल ही 1999 में हुए लोकसभा चुनाव में चौधरी अजित ने सिंह फिर से अपने गढ़ पर कब्जा कर लिया था।

माना जा रहा है कि रालोद को फिर से वापसी का मौका न मिले, इसलिए डॉ. सत्यपाल सिंह का कद बढ़ाया गया है। मुजफ्फरनगर के सांसद डॉ संजीव बालियान के इस्तीफे के बाद वेस्ट यूपी की जाट बेल्ट में भाजपा के प्रति असंतोष की भावना न पनपे, इस नजरिए से वेस्ट यूपी से मोदी मंत्रीमंडल में भाजपा का जाट चेहरा भी है। असल में बीजेपी का राष्ट्रीय नेतृत्व जानता है कि  डॉ सत्यपाल सिंह ने महाराष्ट्र कैडर की पुलिस सेवा में रहते हुए नाम कमाया।

सीबीआई में सेवाएं दी और वह मुंबई के पुलिस कमिश्नर भी रहे। मुंबई के संगठित अपराध को तोड़ने में उनकी अहम भूमिका रही। पीएम मोदी ने उनकी इसी छवि और कार्यशैली का प्रयोग करने के लिए मंत्रीमंडल में जगह दी। लेकिन उनके लिए चुनौतियां भी कम नहीं है।  केंद्रीय राज्यमंत्री बनने के बाद लोगों को उनसे उम्मीदें भी बढ़ गई है। जिले के लोग कहते हैं कि समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान होना चाहिए। जिले की जो समस्याएं पांच साल पहले थी, अब भी वही बरकरार है।
 
जाट चेहरों में भाजपा का सिरमौर कौन
बागपत। मोदी मंत्रीमंडल के विस्तार के साथ ही वेस्ट यूपी की जाट सियासत में हलचल मची है। भाजपा की वेस्ट यूपी की जाट राजनीति के पन्ने पलटें तो केंद्र में जब भी भाजपा की सरकार बनी भाजपा एक न एक जाट चेहरे पर दांव खेलती रही है। इस बार सरकार बनने पर डाक्टर संजीव बालियान को भाजपा जाट चेहरे के तौर पर आगे किया।

लेकिन अब अचानक उनसे इस्तीफा लेकर डाक्टर सत्यपाल सिंह को आगे किया है। अब सवाल है कि क्या डाक्टर संजीव बालियान को संगठन में समायोजित किया जाएगा या फिर 2019 के  चुनाव में डाक्टर सत्यपाल सिंह को आगे किया जाएगा। कौन होगा भाजपा के जाट चेहरों में सिरमौर, यह सवाल भी उठ रहा है। 

भाजपा के जाट सांसदों की लंबी फेहरिस्त है। बागपत से शुरू करें तो रालोद मुखिया को हराकर सोमपाल शास्त्री लोकसभा पहुंचे। भाजपा ने उन्हें कृषि मंत्री बनाया, लेकिन वह खुद को जाट लीडरशिप में स्थापित नहीं कर पाए। यहीं के सत्यपाल सिंह भाजपा में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तक रहे, लेकिन वेस्ट यूपी के जाटों का कारवां उनके पीछे चलता नहीं दिखा। मुजफ्फरनगर में नरेश बालियान के अलावा सोहनवीर सिंह राम लहर में जीते जरूर, लेकिन वह भी जाटों का नेतृत्व नहीं कर सकें।

बिजनौर में भारतेंद्र सिंह भाजपा के सांसद है। कैराना सीट से दिवंगत पूर्व राज्यपाल वीरेंद्र वर्मा ने भाजपा के टिकट पर अपने खुद के वजूद से जीत हासिल की, लेकिन यह कड़वा सच है कि भाजपा में उनकी पहचान बड़े जाट लीडर के तौर पर नहीं हुई। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद डॉ. संजीव बालियान लोकसभा पहुंचे।


युवा तुर्क बताकर उन्हें आगे बढ़ाया गया। भाजपा का एक धड़ा उन्हें जाट लीडर के तौर पर पेश करने लगा, लेकिन एकाएक उनसे इस्तीफा ले लिया गया। भाजपा के टिकट पर जाटों ने सीटें जीतीं और मंत्री भी बनें, लेकिन जाटों का काफिला किसी के पीछे चलता हुआ नहीं दिखा।


 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed