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कॉलेज में छात्राओं से छेड़छाड़ : दो छात्राओं ने अदालत में सुनाई आपबीती

Thu, 09 Dec 2021 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 09 Dec 2021 12:18 AM IST
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Molestation of girl students in college: Two girl students narrated their ordeal in court
कॉलेज में छात्राओं से छेड़छाड़ : दो छात्राओं ने अदालत में सुनाई आपबीती
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मुजफ्फरनगर। प्रयोगात्मक परीक्षा के बहाने रात को स्कूल में रोककर छेड़खानी और धमकी दिए जाने के मामले में दो छात्राओं के मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराए गए हैं। पुलिस ने सुरक्षा के बीच छात्राओं को अदालत में पेश किया।
सिटी मजिस्ट्रेट अर्पित विजयवर्गीय ने बताया कि प्रकरण में दो छात्राओं के पुलिस ने धारा 161 के बयान दर्ज किए थे। दोनों पीड़िताओं का मेडिकल भी कराया गया था। दोनों छात्राओं को पुलिस ने सुरक्षा के साथ कोर्ट में पेश कर धारा 164 के बयान दर्ज करा दिए हैं। मजिस्ट्रेट के समक्ष छात्राओं ने आपबीती सुनाई। पुलिस ने दोनों छात्राओं को बयान के बाद उनके परिजनों के साथ भेज दिया है। पॉक्सो एक्ट में मुकदमे के मामले में बालक और बालिकाओं को बाल कल्याण समिति के सामने भी पेश किया।
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बाल कल्याण समिति गांव पहुंची, आठ छात्राओं से मिली
17 छात्राओं को रात में पुरकाजी के एक स्कूल में रोकने और छेड़खानी आदि किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मोरना क्षेत्र के गांव में पहुंची टीम में बाल कल्याण समिति की अध्यक्षा बीना शर्मा, जिला महिला कल्याण अधिकारी शिवांगी बालियान, बाल संरक्षण अधिकारी नीना त्यागी, मनोचिकित्सक अर्पण जैन शामिल रहे। गांव में पहुंची टीम उन छात्राओं के घर पहुंची जिनको स्कूल में रात को रोका गया था। छात्राओं ने बताया कि उन्हें रात में उनकी मर्जी के विरुद्ध स्कूल में रोका गया और रात में ऐसी खिचड़ी खिलाई जिसे खाने के बाद वह बेहोश हो गई।
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टीम ने छात्राओं की काउंसिलिंग की और उन्हें कहा कि किसी भी प्रकार से डरने की जरूरत नहीं है। सरकार और कानून बेटियों के साथ है। अपराधी कोई भी हो उसे छोड़ा नहीं जाएगा।
कानूनी लड़ाई के लिए छह सदस्यों की समिति बनी
छात्राओं की कानूनी मदद को बाल कल्याण समिति ने छह सदस्यों की एक समिति बनाई है। यह समिति इन छात्राओं को हर तरह की मदद करेगी। सरकार की योजना के अंतर्गत छात्राओं को विधिक सहायता से लेकर अन्य सभी सहायता यह समिति करेगी।

आठवीं तक कोई प्रैक्टीकल नहीं होता
बीएसए मायाराम का कहना है कि दोनों आरोपी संचालकों के स्कूल की मान्यता आठवीं तक की है। आठवीं तक के स्कूल में किसी तरह का कोई प्रैक्टीकल नहीं होता। इसलिए छात्राओं को रात में रोकने का कोई मतलब ही नहीं होता। हमने इसकी जांच के लिए एक कमेटी बना दी है।
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