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मोदी सरकार- 2: बहुतों को मिला लाभ तो बहुत से पात्र हो रहे वंचित
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मोदी सरकार- 2: बहुतों को मिला लाभ तो बहुत से पात्र हो रहे वंचित
मुजफ्फरनगर। केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा हो गया। केंद्र की भाजपा सरकार ने गरीब कल्याण की कई योजनाएं संचालित की। इनका लाभ भी लोगों को मिला, लेकिन अभी भी बहुत से लोग पात्र होने के बावजूद योजनाओं से वंचित हैं। अमर उजाला ने इन योजनाओं की पड़ताल की तो जिन लोगों को लाभ मिल चुका है वे खुश हैं लेकिन जो वंचित हैं, वे व्यवस्था की खामियों से परेशान हैं...
1.90 लाख को मिला लाभ, पचास हजार की निधि अटकीं
किसान सम्मान निधि योजना
मुजफ्फरनगर। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को छह हजार रुपये वार्षिक तीन किस्तों में दिए जाते हैं। सरकारी आंकड़ों की बात करें तो जिले में एक लाख 90 हजार किसानों को योजना का लाभ दिया जा चुका है, लेकिन अभी भी करीब 50 हजार किसान भटकते घूम रहे हैं। बीते लोकसभा चुनाव से पहले लागू की गई इस योजना के तहत आनन-फानन में किसानों के खातों में धनराशि भेजनी शुरू कर दी गई थी, लेकिन जैसे-जैसे जांच होती गई खामियां सामने आती गईं। वास्तविक किसान के बजाय किसी दूसरे के खाते में धनराशि जाने, खातों से राशि वापस होने आदि के मामले भी सामने आए। जिले में कुल 2.60 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 1.90 लाख किसानों के खाते में पांचवीं किस्त पहुंच गई। 50 हजार किसानों के आधार गलत होने के कारण उनकी किस्त रुक गई है। उपनिदेशक कृषि जसवीर तेवतिया ने बताया कि अब केवल उन्हीं किसानों को लाभ दिया जाएगा, जिनका लिंक हो गया है। आधार सही कराने के लिए न्याय पंचायत स्तर के कर्मचारियों को किसानों की सूची दे दी गई है। 30 जून तक इसमें संशोधन किया जा सकता है।
जानसठ के मोहल्ला करीमुल्ला पट्टी निवासी बनारसी देवी के पास दो बीघा जमीन है। खाते में दो-दो हजार रुपये की किस्तें आने से काफी राहत मिली है। फसल की लागत के लिए देखना नहीं पड़ता है। इसी तरह मोरना खेत्र के गांव भेड़ाहेड़ी निवासी हरपाल यादव, करहेड़ा निवासी पंकज तोमर और तिस्सा निवासी उदयवीर राठी के खाते में भी प्रधानमंत्री किसान योजना की किस्त आ गईं हैं।
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आयुष्मान भारत: दो साल में नहीं तलाशे जा सके 2.60 लाख लोग
मुजफ्फरनगर। 23 सितंबर 2018 से शुरू हुई आयुष्मान भारत योजना के आंकड़े और जमीनी हकीकत भी जुदा है। जिले में 69292 परिवार इस योजना में शामिल हैं लेकिन लोगों की पात्रता को लेकर लगातार सवाल खड़े होते रहे। स्वास्थ्य विभाग अभी सभी पात्रों के गोल्डन कार्ड भी नहीं बना सका। यदि एक परिवार में पांच सदस्यों का औसत मानें तो तीन लाख 46 हजार 460 कार्ड बनाए जाने थे, लेकिन अभी मात्र 84 हजार कार्ड ही बन पाए हैं। बाकी दो लाख 62 हजार 460 सदस्यों को विभाग खोज ही नहीं पाया। सीएमओ डा. प्रवीण कुमार चोपड़ा का कहना है कि लॉकडाउन के चलते फिलहाल काम प्रभावित हुआ है। स्थिति सामान्य होने पर कार्ड बनाने का काम तेजी से शुरू किया जाएगा।
तीन हजार मरीजों को मिला एक करोड़ का लाभ
मुजफ्फरनगर। आयुष्मान भारत योजना गरीब बीमारों के लिए वरदान साबित हुई है। उन्होंने एक साल में पांच लाख रुपये तक के निशुल्क उपचार का लाभ मिला। सीएमओ डॉ. प्रवीण कुमार चोपड़ा के अनुसार अब तक करीब तीन हजार मरीजों को लगभग एक करोड़ रुपये का उपचार निशुल्क दिया जा चुका है।
योजना से मिली नई जिंदगी
(फोटो: हाजी याकूब) फोटो संख्या-55
मुजफ्फरनगर। ग्राम ककरौली निवासी हाजी याकूब हृदय रोग से ग्रसित थे लेकिन उपचार महंगा होने के कारण अपने खर्च पर करा पाना मुश्किल था। वह बताते हैं कि आयुष्मान भारत योजना ने उन्हें नई जिंदगी दी है। करीब एक लाख से भी ज्यादा का खर्च उपचार में आया। उन्हें कुछ नहीं देना पड़ता। इसी तरह नगर के मोहल्ला रामपुरी निवासी आशा पांचाल किडनी स्टोन से जूझ रही थी उन्होंने भी गोल्डन कार्ड के जरिए निशुल्क उपचार कराया है।
1510 परिवारों को दूसरी किस्त का इंतजार
शहरी आवास योजना
मुजफ्फरनगर। शहरी क्षेत्र में जर्जर आवासों में रह रहे तथा आवासहीन लोगों के लिए संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत जिले में 1510 परिवारों को दूसरी किस्त का इंतजार है। डूडा के परियोजना अधिकारी संदीप सिंह ने बताया कि जिले में योजना की प्रगति काफी अच्छी है। अब तक कुल 21226 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 5485 अपात्र पाए गए। इनसे भी प्रत्यावेदन मांगा गया है। इसके अलावा कुल 15741 पात्र पाए गए, जिनमें से 11160 को पहली किस्त, 9650 को दूसरी तथा 624 को तीसरी किस्त मिल चुकी है। इसके अलावा भी जिन आवासों को जीओ टैगिंग हो गई है, उसकी डिमांड पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है।
बोले लाभार्थी, अपना भी बना आशियाना
मुजफ्फरनगर। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत लाभ पाने वाले सिसौली के मोहल्ला चौधरान निवासी रवि कुमार तथा पुरानी आबादी की बबीता का कहना है कि उनके खुद के आवास का सपना पूरा हुआ है। रैदासपुरी निवासी बेबी, मुकेश एवं नरेश के खाते में भी दूसरी किस्त लॉकडाउन से पहले आ गई। उन्होंने बताया कि लिंटर का काम पूरा हो गया है। अब तीसरी किस्त का इंतजार है। उनका मकान पुराना और जर्जर हो चुका था। बारिश के दिनों में छत टपकती थी। अब उनके सिर पर भी पक्की छत आ गई है।
पीएम आवास ग्रामीण: तीन साल में बने 184 आवास
मुजफ्फरनगर। ग्रामीण क्षेत्र में हर गरीब को आवास उपलब्ध कराने की योजना भी फाइलों में उलझकर रह गई। 2011 की सूची में शामिल लोगों में से तीन साल में मात्र 184 ही परिवार पात्र पाए गए। बीते वित्तीय वर्ष में तो केवल एक ही मकान बन सका। 2011 की सूची से बचे पात्रों को लाभ देने के लिए करीब एक साल पहले सर्वे कराया गया। इसमें 3989 पात्र पाए गए थे, लेकिन यह अभी लागू नहीं हुआ। इस योजना में 1.20 लाख रुपये मिलते हैं। परियोजना निदेशक डीआरडीए जय सिंह यादव का कहना है कि नए सर्वे में पात्र मिले परिवारों की आधार सीडिंग का काम चल रहा है। इसके बाद शासन से जो निर्देश होंगे, उसी के आधार पर काम किया जाएगा।भोपा क्षेत्र के गांव रुडकली निवासी फरमान जर्जर कच्चे मकान में रह रहा है। इसी गांव में इम्तियाज अली, तिरपड़ी निवासी राजकुमार, मुरादपुरा निवासी शकील के मकान भी जर्जर हैं।
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मुजफ्फरनगर। केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा हो गया। केंद्र की भाजपा सरकार ने गरीब कल्याण की कई योजनाएं संचालित की। इनका लाभ भी लोगों को मिला, लेकिन अभी भी बहुत से लोग पात्र होने के बावजूद योजनाओं से वंचित हैं। अमर उजाला ने इन योजनाओं की पड़ताल की तो जिन लोगों को लाभ मिल चुका है वे खुश हैं लेकिन जो वंचित हैं, वे व्यवस्था की खामियों से परेशान हैं...
1.90 लाख को मिला लाभ, पचास हजार की निधि अटकीं
किसान सम्मान निधि योजना
मुजफ्फरनगर। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को छह हजार रुपये वार्षिक तीन किस्तों में दिए जाते हैं। सरकारी आंकड़ों की बात करें तो जिले में एक लाख 90 हजार किसानों को योजना का लाभ दिया जा चुका है, लेकिन अभी भी करीब 50 हजार किसान भटकते घूम रहे हैं। बीते लोकसभा चुनाव से पहले लागू की गई इस योजना के तहत आनन-फानन में किसानों के खातों में धनराशि भेजनी शुरू कर दी गई थी, लेकिन जैसे-जैसे जांच होती गई खामियां सामने आती गईं। वास्तविक किसान के बजाय किसी दूसरे के खाते में धनराशि जाने, खातों से राशि वापस होने आदि के मामले भी सामने आए। जिले में कुल 2.60 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया था। इनमें से 1.90 लाख किसानों के खाते में पांचवीं किस्त पहुंच गई। 50 हजार किसानों के आधार गलत होने के कारण उनकी किस्त रुक गई है। उपनिदेशक कृषि जसवीर तेवतिया ने बताया कि अब केवल उन्हीं किसानों को लाभ दिया जाएगा, जिनका लिंक हो गया है। आधार सही कराने के लिए न्याय पंचायत स्तर के कर्मचारियों को किसानों की सूची दे दी गई है। 30 जून तक इसमें संशोधन किया जा सकता है।
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जानसठ के मोहल्ला करीमुल्ला पट्टी निवासी बनारसी देवी के पास दो बीघा जमीन है। खाते में दो-दो हजार रुपये की किस्तें आने से काफी राहत मिली है। फसल की लागत के लिए देखना नहीं पड़ता है। इसी तरह मोरना खेत्र के गांव भेड़ाहेड़ी निवासी हरपाल यादव, करहेड़ा निवासी पंकज तोमर और तिस्सा निवासी उदयवीर राठी के खाते में भी प्रधानमंत्री किसान योजना की किस्त आ गईं हैं।
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आयुष्मान भारत: दो साल में नहीं तलाशे जा सके 2.60 लाख लोग
मुजफ्फरनगर। 23 सितंबर 2018 से शुरू हुई आयुष्मान भारत योजना के आंकड़े और जमीनी हकीकत भी जुदा है। जिले में 69292 परिवार इस योजना में शामिल हैं लेकिन लोगों की पात्रता को लेकर लगातार सवाल खड़े होते रहे। स्वास्थ्य विभाग अभी सभी पात्रों के गोल्डन कार्ड भी नहीं बना सका। यदि एक परिवार में पांच सदस्यों का औसत मानें तो तीन लाख 46 हजार 460 कार्ड बनाए जाने थे, लेकिन अभी मात्र 84 हजार कार्ड ही बन पाए हैं। बाकी दो लाख 62 हजार 460 सदस्यों को विभाग खोज ही नहीं पाया। सीएमओ डा. प्रवीण कुमार चोपड़ा का कहना है कि लॉकडाउन के चलते फिलहाल काम प्रभावित हुआ है। स्थिति सामान्य होने पर कार्ड बनाने का काम तेजी से शुरू किया जाएगा।
तीन हजार मरीजों को मिला एक करोड़ का लाभ
मुजफ्फरनगर। आयुष्मान भारत योजना गरीब बीमारों के लिए वरदान साबित हुई है। उन्होंने एक साल में पांच लाख रुपये तक के निशुल्क उपचार का लाभ मिला। सीएमओ डॉ. प्रवीण कुमार चोपड़ा के अनुसार अब तक करीब तीन हजार मरीजों को लगभग एक करोड़ रुपये का उपचार निशुल्क दिया जा चुका है।
योजना से मिली नई जिंदगी
(फोटो: हाजी याकूब) फोटो संख्या-55
मुजफ्फरनगर। ग्राम ककरौली निवासी हाजी याकूब हृदय रोग से ग्रसित थे लेकिन उपचार महंगा होने के कारण अपने खर्च पर करा पाना मुश्किल था। वह बताते हैं कि आयुष्मान भारत योजना ने उन्हें नई जिंदगी दी है। करीब एक लाख से भी ज्यादा का खर्च उपचार में आया। उन्हें कुछ नहीं देना पड़ता। इसी तरह नगर के मोहल्ला रामपुरी निवासी आशा पांचाल किडनी स्टोन से जूझ रही थी उन्होंने भी गोल्डन कार्ड के जरिए निशुल्क उपचार कराया है।
1510 परिवारों को दूसरी किस्त का इंतजार
शहरी आवास योजना
मुजफ्फरनगर। शहरी क्षेत्र में जर्जर आवासों में रह रहे तथा आवासहीन लोगों के लिए संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत जिले में 1510 परिवारों को दूसरी किस्त का इंतजार है। डूडा के परियोजना अधिकारी संदीप सिंह ने बताया कि जिले में योजना की प्रगति काफी अच्छी है। अब तक कुल 21226 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 5485 अपात्र पाए गए। इनसे भी प्रत्यावेदन मांगा गया है। इसके अलावा कुल 15741 पात्र पाए गए, जिनमें से 11160 को पहली किस्त, 9650 को दूसरी तथा 624 को तीसरी किस्त मिल चुकी है। इसके अलावा भी जिन आवासों को जीओ टैगिंग हो गई है, उसकी डिमांड पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है।
बोले लाभार्थी, अपना भी बना आशियाना
मुजफ्फरनगर। प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के तहत लाभ पाने वाले सिसौली के मोहल्ला चौधरान निवासी रवि कुमार तथा पुरानी आबादी की बबीता का कहना है कि उनके खुद के आवास का सपना पूरा हुआ है। रैदासपुरी निवासी बेबी, मुकेश एवं नरेश के खाते में भी दूसरी किस्त लॉकडाउन से पहले आ गई। उन्होंने बताया कि लिंटर का काम पूरा हो गया है। अब तीसरी किस्त का इंतजार है। उनका मकान पुराना और जर्जर हो चुका था। बारिश के दिनों में छत टपकती थी। अब उनके सिर पर भी पक्की छत आ गई है।
पीएम आवास ग्रामीण: तीन साल में बने 184 आवास
मुजफ्फरनगर। ग्रामीण क्षेत्र में हर गरीब को आवास उपलब्ध कराने की योजना भी फाइलों में उलझकर रह गई। 2011 की सूची में शामिल लोगों में से तीन साल में मात्र 184 ही परिवार पात्र पाए गए। बीते वित्तीय वर्ष में तो केवल एक ही मकान बन सका। 2011 की सूची से बचे पात्रों को लाभ देने के लिए करीब एक साल पहले सर्वे कराया गया। इसमें 3989 पात्र पाए गए थे, लेकिन यह अभी लागू नहीं हुआ। इस योजना में 1.20 लाख रुपये मिलते हैं। परियोजना निदेशक डीआरडीए जय सिंह यादव का कहना है कि नए सर्वे में पात्र मिले परिवारों की आधार सीडिंग का काम चल रहा है। इसके बाद शासन से जो निर्देश होंगे, उसी के आधार पर काम किया जाएगा।भोपा क्षेत्र के गांव रुडकली निवासी फरमान जर्जर कच्चे मकान में रह रहा है। इसी गांव में इम्तियाज अली, तिरपड़ी निवासी राजकुमार, मुरादपुरा निवासी शकील के मकान भी जर्जर हैं।