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जंगलों में भूखे प्यासे भटकते रहे प्रवासी मजदूर
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गंगा खादर क्षेत्र से भटक कर शुकतीर्थ पहुंचे प्रवासी मजदूर।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
जंगलों में भूखे प्यासे भटकते रहे प्रवासी मजदूर
जानसठ। रास्ता भटक गए प्रवासी श्रमिक दो दिन तक जंगलों में भटकते रहे। ग्रामीणों ने सहारा दिया और भोजन कराया। इसके बाद ये श्रमिक अपने घर की ओर कूच कर गए।
सोमवार को गांव ढांसरी के जंगल में बिहार प्रांत के प्रवासी मजदूर ग्रामीणों से मदद मांगते हुए व रास्ता पूछते हुए नजर आए। गांव के जंगल में 25 मजदूरों को देखकर ग्रामीणों ने उनसे उनके बारे में जानकारी ली। जंगलों में भटक रहे प्रवासी श्रमिक गांव नाईपुरा निवासी भारतीय किसान यूनियन के नेता ओमप्रकाश शर्मा ने उनको भोजन कराया। भाकियू नेता ने एसडीएम को गांव के जंगल में प्रवासी मजदूरों के भटकने की सूचना दी तथा एसडीएम के कहने पर प्रवासी मजदूरों को एक डीसीएम में बिठाकर तहसील में भिजवा दिया गया। प्रवासी मजदूरों ने बताया कि वे बिहार मुजफ्फरपुर दरियाबाद के रहने वाले हैं वे सभी पटियाला की अनाज मंडी में मजदूरी करते थे। तीन मार्च को पटियाला गए थे वहां कुछ दिन तो मजदूरी मिली, उसके बाद मजदूरी मिलनी बंद हो गई। उसके बाद वह लॉकडाउन में फंस गए। काम न होने से भूखे तड़फने लगे। उन्होंने बताया कि यहां भूखे मरने से बेहतर तो अपने प्रदेश में जाकर अपने गांव में भूखे मरना बेहतर होगा। जिसके चलते वह पैदल ही जंगलों के रास्ते चल दिए। कई जगह पुलिस वालों ने उन्हें कई दिन तक एक स्कूल में घर भेजने के लिए बिठाए रखा, लेकिन कोई सुविधा एवं खाना नहीं मिलने के कारण उन्होंने भी उन्हें जंगल के रास्ते से ही आगे की और भेज दिया। इन सभी प्रवासी 25 मजदूरों को एक गाड़ी में बिठा कर कवाल में बने राजकीय इंटर कॉलेज में क्वांरटीन कर दिया गया।
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जानसठ। रास्ता भटक गए प्रवासी श्रमिक दो दिन तक जंगलों में भटकते रहे। ग्रामीणों ने सहारा दिया और भोजन कराया। इसके बाद ये श्रमिक अपने घर की ओर कूच कर गए।
सोमवार को गांव ढांसरी के जंगल में बिहार प्रांत के प्रवासी मजदूर ग्रामीणों से मदद मांगते हुए व रास्ता पूछते हुए नजर आए। गांव के जंगल में 25 मजदूरों को देखकर ग्रामीणों ने उनसे उनके बारे में जानकारी ली। जंगलों में भटक रहे प्रवासी श्रमिक गांव नाईपुरा निवासी भारतीय किसान यूनियन के नेता ओमप्रकाश शर्मा ने उनको भोजन कराया। भाकियू नेता ने एसडीएम को गांव के जंगल में प्रवासी मजदूरों के भटकने की सूचना दी तथा एसडीएम के कहने पर प्रवासी मजदूरों को एक डीसीएम में बिठाकर तहसील में भिजवा दिया गया। प्रवासी मजदूरों ने बताया कि वे बिहार मुजफ्फरपुर दरियाबाद के रहने वाले हैं वे सभी पटियाला की अनाज मंडी में मजदूरी करते थे। तीन मार्च को पटियाला गए थे वहां कुछ दिन तो मजदूरी मिली, उसके बाद मजदूरी मिलनी बंद हो गई। उसके बाद वह लॉकडाउन में फंस गए। काम न होने से भूखे तड़फने लगे। उन्होंने बताया कि यहां भूखे मरने से बेहतर तो अपने प्रदेश में जाकर अपने गांव में भूखे मरना बेहतर होगा। जिसके चलते वह पैदल ही जंगलों के रास्ते चल दिए। कई जगह पुलिस वालों ने उन्हें कई दिन तक एक स्कूल में घर भेजने के लिए बिठाए रखा, लेकिन कोई सुविधा एवं खाना नहीं मिलने के कारण उन्होंने भी उन्हें जंगल के रास्ते से ही आगे की और भेज दिया। इन सभी प्रवासी 25 मजदूरों को एक गाड़ी में बिठा कर कवाल में बने राजकीय इंटर कॉलेज में क्वांरटीन कर दिया गया।
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