फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Many will act on

...तो बेनकाब हो जाएंगे कई सफेदपोश

Sat, 12 Sep 2015 12:10 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Updated Sat, 12 Sep 2015 12:10 AM IST
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। विधवा पेंशन घोटाला 20 करोड़ से ऊपर जाएगा। जिस तरह के तथ्य सामने आ रहे हैं, इससे साफ हो रहा है कि खेल में सफेदपोश भी शामिल हैं।
विज्ञापन


अभी तक केवल डाकघर में गए पैसे के उन खातेदारों के नाम पता लग पाए, जिनके खातों में पैसा गया। उन लोगों के नाम सामने नहीं आए, बैंकों का पैसा जिनके खातों में गया। यह पैसा इससे पूर्व समाज कल्याण में खुले घोटाले की तरह भी सामने आ सकता है। बैंकों के खाते कई सफेदपोशों से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।

विधवा पेंशन घोटाले की परत-दर-परत लगातार खुलती जा रही है। घोटाला बड़े स्तर पर फैला मिला है। इस घोटाले में डाक विभाग, बैंकों के अधिकारी भी शामिल हैं। जो सबूत सामने आए हैं, इनसे यह स्पष्ट हो गया है कि घोटाला लंबे समय से चल रहा था।
विज्ञापन


घोटाले के बारे में विभागीय अधिकारियों को सब जानकारी थी। जांच टीम अभी तक केवल उन खातेदारों के नाम ही सामने लाने में सफल रही है, जिनके खाते में डाकघर से पैसा गया। अभी उन लोगों के नाम सामने नहीं आए हैं बैंक शाखाओं से जिन लोगों के खातों में पैसा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में बनी कमेटी जब एक सप्ताह तक कोई रिजल्ट नहीं दे सकी तो डीएम को इस मामले को सीडीओ की निगरानी में देना पड़ा। सीडीओ ने जांच शुरू कराई तो कुछ ही घंटों में लाखों में सामने आया घोटाला करोड़ों में पहुंच गया। सुजडू पीएनबी मैनेजर ने जांच टीम का कोई सहयोग नहीं किया।

न ही सरकारी रिकार्ड टीम को दिया। घोटाले में संलिप्त इस बैंक शाखा के मैनेजर और कंप्यूटर ऑपरेटर भी नामजद हुए हैं। अब टीम उन लोगों के नाम सामने लाने में लगी है, बैंकों से जिन के खातों में विधवा पेंशन का पैसा गया है। विधवा पेंशन का पैसा 29 नोडल ब्रांचों में जाता था, जिनमें 28 बैंक और एक डाकघर था। अभी तक केवल डाकघर के सबूत ही मिल पाए हैं। बैंकों का रिकार्ड भी खंगाला जा रहा है। यदि इस पूरे मामले की गहराई से जांच हुई तो सफेदपोश भी इसमें सामने आ सकते हैं।


नियम विरुद्ध चल रहे थे खाते

ढाई वर्ष पूर्व शासन से यह आदेश आ गया था कि किसी भी अधिकारी के पदनाम का खाता बैंकों में नहीं रहेगा। एलडीएम के माध्यम से सभी बैंकों में डीएम की ओर से पत्र भी जारी हो गया था। बावजूद इसके अधिकारियों के पदनाम का खाता कैसे चलता रहा, यह भी बड़ा सवाल है। इससे यह भी साबित होता है कि बैंक और डाकघर कर्मियों की घोटाले में मिलीभगत है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed